पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की सियासत गरमा गई है. इसकी बड़ी वजह राज्य में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) है. तृणमूल कांग्रेस ने SIR के दौरान वोटर लिस्ट से लोगों के नाम कटने पर नाराजगी जाहिर की है. इसी मुद्दे को लेकर टीएमसी के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार (8 अप्रैल) को चुनाव आयोग से मुलाकात की. इस प्रतिनिधिमंडल में टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन, सांसद सागरिका घोष के अलावा साकेत गोखले और मेनका गुरुस्वामी शामिल थे. मुलाकात के बाद टीएमसी नेताओं ने चुनाव आयोग पर जमकर निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाए.
टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सांसदों से गेट लॉस्ट. उन्होंने ये भी कहा कि ये मुलाकात महज सात मिनट की थी. सांसद ने कहा कि हमने चुनाव आयोग को 9 चिट्ठी लिखी, 6 उदाहरण दिए, सभी चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा थे, लेकिन चुनाव आयोग की ओर से किसी का कोई रिस्पॉन्स (Response) नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि हम लोग यही बताने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त के पास गए थे.
मीटिंग का ऑडियो या वीडियो रिलीज करे चुनाव आयोग’
सांसद डेरेक ने आगे कहा कि आज जो कुछ भी चुनाव आयोग से मुलाकात के दौरान हुआ वह शर्म की बात है. उन्होंने कहा कि इतने सालों से नो सांसद में हैं, राजनीति में हैं, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ. उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि आज मीटिंग में जो हुआ उसका ऑडियो या वीडियो रिलीज किया जाए.उन्होंने आगे कहा कि यह पहले मुख्य चुनाव आयुक्त हैं, जिनको हटाने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में नोटिस दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि मुख्य चुनाव में आयुक्त को हटाने के नोटिस को लेकर आज शाम सभी लाइक माइंडेड पार्टियों की शाम 5:00 बजे कांस्टीट्यूशन क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी.
डेरेक ओ’ब्रायन पर चिल्लाने का आरोप
इधर सूत्रों के अनुसार टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने चुनाव आयोग से मुलाकात के दौरान चिल्ला चोट की थी. सूत्रों का कहना है कि. मुख्य चुनाव आयोग ने सांसद से आयोग कक्ष में मर्यादा बनाए रखने का अनुरोध किया था और कहा था कि चिल्लाना और अभद्र व्यवहार करना उचित नहीं है.
टीएमसी ने आरोपों को बताया गलत
वहीं टीएमसी नेता साकेत गोखले ने इसे बेबुनियाद और झूठा आरोप बताया. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने कहा ‘यह झूठ है. मैं स्वयं बैठक में उपस्थित था. ऐसी कोई बात नहीं हुई. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हमसे केवल इतना कहा, GET LOST. हम चुनाव आयोग को बैठक का लिखित विवरण जारी करने की चुनौती देते हैं.अन्यथा हम स्वयं ऐसा करेंगे’.
चुनाव आयोग की टीएमसी को दो टूक
वहीं चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस से दो टूक कहा है कि पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव भय मुक्त,हिंसा मुक्त, धमकी मुक्त, प्रलोभन मुक्त और और बिना किसी छापा मुक्त, बूथ जाम या स्रोत जाम के होकर ही रहेंगे.
तृणमूल कांग्रेस ने ज्ञापन में क्या कहा
बता दें कि तृणमूल कांग्रेस के ज्ञापन में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया के दौरान कुछ अधिकारी निष्पक्ष नहीं हैं. इससे चुनाव की पारदर्शिता और भरोसे पर असर पड़ रहा है. पार्टी नेकुछ अधिकारियों पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया गया है कि वे किसी विशेष पार्टी के पक्ष में काम कर रहे हैं. वहींचुनाव के समय अधिकारियों की नियुक्ति/ट्रांसफर को लेकर सवाल उठाए गए हैं. पार्टी ने कहा है कि ऐसे कदमों से चुनाव का माहौल प्रभावित हो सकता है.मतदाताओं का भरोसा कम हो सकता है. टीएमसी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि संदिग्ध अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित हो.
पश्चिम बंगाल में चुनाव
पश्चिम बंगाल चुनाव की बात करें तो राज्य में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव होने हैं, वहीं नतीजे 4 मई 2026 को आएंगे. राज्य की सत्ता पर काबिज होने के लिए बीजेपी पुरजोर कोशिश कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह तक पार्टी के तमाम बड़े नेता चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं. वहीं टीएमसी एक बार फिर से राज्य में सरकार बनाने की जुगत में हैं.
