बांग्लादेश में गुरुवार को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। प्रथोम ओलो के मुताबिक BNP+गठबंधन ने 299 सीटों में से 212 सीटें हासिल कर बहुमत के लिए जरूरी 150 के आंकड़े को पार कर लिया। अब तक 297 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं।जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन को अब तक 77 सीटें मिली हैं। देश में करीब 20 साल बाद BNP की सरकार बनेगी। 2008 से 2024 तक वहां शेख हसीना की आवामी लीग सत्ता में थी। इस जीत के साथ BNP अध्यक्ष तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना तय माना जा रहा है।
तारिक ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों पर जीत हासिल की है। तारिक रहमान की जीत पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा, ‘मेरे भाई तारिक, उनकी टीम और बाकी सभी को बधाई।बांग्लादेश में 35 साल बाद कोई पुरुष प्रधानमंत्री बनेगा। 1988 में काजी जफर अहमद प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद 1991 से 2024 तक देश की राजनीति में पूर्व पीएम शेख हसीना और खालिदा जिया का दबदबा रहा। ये दोनों ही प्रधानमंत्री बनती रहीं।
हिंदू-अवामी लीग के वोट BNP को मिले, जमात को हराया
बांग्लादेश चुनाव में कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी बुरी तरह हारी है। उसके गठबंधन को सिर्फ 70 सीटें मिलीं हैं। शेख हसीना की सरकार गिराने वाले स्टूडेंट्स की पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी यानी NCP को भी बांग्लादेशियों ने नकार दिया।
एक्सपर्ट्स BNP की एकतरफा जीत की तीन वजह बताते हैं…
पूर्व PM शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के वोट खासकर हिंदू वोटर BNP में शिफ्ट हो गए। BNP को अवामी लीग के गढ़ रहे गोपालगंज के अलावा खुलना, सिलहट, चटगांव, ठाकुरगंज में जीत मिली है।
जमात का अतीत आड़े आ गया, लोगों को याद रहा कि उसने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का विरोध किया था। जमात इस दाग को नहीं धो पाई।
स्टूडेंट्स की नेशनल सिटीजन पार्टी को आपसी फूट और जमात से गठबंधन करना भारी पड़ा। उन्हें लोगों ने पूरी तरह खारिज कर दिया।
तारिक रहमान का PM बनना लगभग तय
तारिक रहमान 25 जनवरी को ब्रिटेन से बांग्लादेश लौटे थे। उनकी वापसी के सिर्फ पांच दिन बाद, पूर्व प्रधानमंत्री और उनकी मां खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। इसके बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की कमान पूरी तरह उनके हाथों में आ गई।तारिक पर 2001 से 2006 के BNP शासनकाल में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। 2007 में अंतरिम सरकार के दौरान उन्हें 18 महीने जेल में रहना पड़ा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए तारिक 2008 में लंदन भाग गए थे। तब उन्हें उस समय इलाज के लिए देश से बाहर जाने की अनुमति मिली थी। इसके बाद वे देश नहीं लौटे। देश से बाहर रहने के बावजूद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) में तारिक को ही पार्टी का नेता माना जाता रहा। पार्टी की रणनीति, आंदोलन और राजनीतिक लाइन लंबे समय तक उन्हीं के इशारों पर तय होती रही। तारिक रहमान खुद को शांत, सुनने वाला और पॉलिसी पर फोकस नेता की तरह पेश कर रहे हैं। वे हर साल 5 करोड़ पेड़ लगाने, ढाका में नए ग्रीन जोन बनाने और तकनीकी शिक्षा बढ़ाने की बात करते हैं।
बांग्लादेशी संविधान में भी बड़े बदलाव की तैयारी
बांग्लादेश में संविधान सुधार से जुड़े प्रस्तावों पर जारी जनमत संग्रह में अभी तक ‘YES’ वोट आगे चल रहा है। संसदीय चुनाव के दिन यानी कल ही सरकार ने संविधान सुधारों से जुड़े प्रस्तावों को लागू करने के लिए जनमत संग्रह कराया था।अगर ‘YES’ जीतता है तो सरकार इन संविधान सुधारों को लागू कर सकेगी। इन बदलावों के तहत प्रधानमंत्री की कुछ ताकतें कम होंगी और राष्ट्रपति की कुछ ताकतें बढ़ेंगी।संवैधानिक पदों पर नियुक्ति एक समिति करेगी, जिसमें सत्ताधारी दल, विपक्ष और कुछ मामलों में न्यायपालिका के प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। अभी ज्यादातर कार्यकारी अधिकार प्रधानमंत्री के पास रहते हैं और राष्ट्रपति को अधिकतर फैसले प्रधानमंत्री की सलाह पर लेने पड़ते हैं।जनमत संग्रह के पक्ष में रिजल्ट आने पर पर देश में दो सदनों वाली संसद बनेगी। तब संविधान में बदलाव करने के लिए निचले सदन में दो-तिहाई और ऊपरी सदन में बहुमत का समर्थन जरूरी होगा।अगर ‘हां’ जीतता है तो अगले राष्ट्रीय चुनाव के बाद चुने गए प्रतिनिधि मिलकर एक संविधान सुधार परिषद बनाएंगे। यह परिषद अपनी पहली बैठक से 180 कार्यदिवस के भीतर सुधार का काम पूरा करेगी। हालांकि अगर परिषद तय समय में सुधार पूरा नहीं कर पाती है, तो आगे क्या होगा यह साफ नहीं बताया गया है।प्रस्ताव यह भी कहते हैं कि कोई भी इंसान जीवन में अधिकतम 10 साल तक ही प्रधानमंत्री रह सकेगा। साथ ही प्रधानमंत्री अपनी पार्टी का प्रमुख नहीं रहेगा। हालांकि इस मुद्दे पर BNP की राय अलग है। इन बदलावों के बाद राष्ट्रपति मानवाधिकार आयोग, सूचना आयोग, प्रेस काउंसिल, विधि आयोग, बांग्लादेश बैंक के गवर्नर और ऊर्जा नियामक आयोग जैसे पदों पर अपने अधिकार से नियुक्ति कर सकेंगे।
बांग्लादेश चुनाव के नतीजों पर आया तसलीमा नसरीन का रिएक्शन
बांग्लादेश चुनाव के नतीजों पर जानी मानी लेखिका तसलीमा नसरीन का रिएक्शन आया है. उन्होंने कहा कि इस चुनाव में मैं बीएनपी की जीत से खुश नहीं हूं, बल्कि इसलिए खुश हूं कि इस्लामी-जिहादी-आतंकवादी समूह हार गया. पिछले डेढ़ साल में उन्होंने बेशर्मी से अपना दबदबा कायम किया, लाखों समर्थकों के साथ रैलियां कीं, दिन-रात जब मन चाहा हिंसा की, जिसे चाहा मारा-पीटा और यातनाएँ दीं, हिंदू घरों में आग लगाई, हिंदुओं को पीट-पीटकर जला दिया और एक भी महिला को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं दी. इस बेहद महिला-विरोधी पार्टी ने कामकाजी महिलाओं को वेश्या कहकर उनका अपमान किया, महिला नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाई, महिलाओं को बुर्का और नकाब के अंधेरे में धकेल दिया, महिलाओं को पुरुषों की गुलाम और यौन गुलाम समझा और महिला-विरोधी शरिया कानून लागू करने का सपना देखा. जनता ने जमात-ए-इस्लामी को सत्ता में नहीं आने दिया.
