नई दिल्ली. मध्य प्रदेश में सरकारी अस्पताल की फ्री दवा योजना के तहत मिलने वाली खांसी सिरप पर विवाद बड़ता जा रहा है । बच्चों में किडनी फेलियर से हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 30 दिनों में यह आंकड़ा बढ़कर 9 तक पहुंच गया है। वहीं कई बच्चे भी सीरिसस अस्पताल में एडमिट हैं। बताया जा रहा है कि मौत का यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। इस घटना के बाद एमपी के स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।परिजनों का आरोप है कि बच्चों को दी गई खांसी की दवाइयां कोल्ड्रिफ और नेक्स्ट्रोस डीएस ही इन मौतों की वजह बनीं. लगभग हर बच्चे को पहले बुखार आया, फिर उल्टियां, दस्त और फिर अचानक पेशाब बंद हो जाना शुरू हुआ. यह वही क्लासिक लक्षण हैं जो डायथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) ज़हरखुरानी से होते हैं. मध्य प्रदेश में हुई किडनी बायोप्सी रिपोर्ट भी इसी दिशा में इशारा कर चुकी है. लेकिन जहां तमिलनाडु ने 24 घंटे के भीतर जांच कर बैच को ज़हरीला घोषित कर पाबंदी लगा दी, वहीं मध्य प्रदेश अब भी “रिपोर्ट का इंतज़ार” कर रहा है.विरोधाभास साफ है. 1 अक्टूबर 2025 को तमिलनाडु के ड्रग्स कंट्रोल विभाग को मध्य प्रदेश से बैच SR-13 (कोल्ड्रिफ सिरप) को लेकर पत्र मिला. यह बैच कांचीपुरम ज़िले की श्रीसन फ़ार्मास्युटिकल्स द्वारा बनाया गया था. 1 और 2 अक्टूबर सरकारी छुट्टियां थीं, फिर भी उसी शाम निरीक्षक टीम फैक्ट्री पहुँच गई. जांच में 39 गंभीर खामियां और 325 बड़ी गड़बड़ियां पाई गईं. फैक्ट्री में उपलब्ध कोल्ड्रिफ और अन्य चार सिरप के सैंपल तुरंत सीज़ कर चेन्नई की सरकारी लैब भेज दिए गए.तमिलनाडु ने 24 घंटे में जांच पूरी कर दवा पर रोक लगाई, लेकिन मध्य प्रदेश में 9 बच्चों की मौत के बाद भी रिपोर्ट का इंतज़ार क्यों?दरअसल, बुधवार को इलाज के दौरान नागपुर में एक बच्चे की मौत हो गई, जिसके बाद बच्चों की सिरप की वजह से मरने वाले मासूमों की संख्या 9 हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में अब तक 9 बच्चों की मौत कफ सिरप के कारण हुई है। ये खबर पूरे क्षेत्र में चिंता का विषय बनी हुई है। पूरे इलाके में मातम का माहौल है। माता-पिता के दिलों में खौफ और डर है, कहीं उनके बच्चे की भी जान नहीं चली जाए।
तमिलनाडु एफडीए की जांच में कोल्ड्रिफ कफ सीरप में खतरनाक केमिकल डायथिलीन ग्लाइकॉल मिलने का खुलासा
तमिलनाडु एफडीए की जांच में कोल्ड्रिफ कफ सीरप में खतरनाक केमिकल डायथिलीन ग्लाइकॉल मिलने का खुलासा हुआ। ये केमिकल किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। यह जांच मध्यप्रदेश सरकार के अनुरोध पर की गई थी। इससे पहले मध्यप्रदेश और केंद्र सरकार की लैब जांच में किसी मिलावट की पुष्टि नहीं हुई थी। अब नए खुलासे के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि 6 राज्यों में इस कंपनी की 19 दवाओं की जांच चल रही है। इस घटना ने एक बार फिर दवा निर्माण में सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।तमिलनाडु सरकार ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में 11 बच्चों की मौत के बाद ‘कोल्डरिफ’ कफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि एक अक्टूबर से तमिलनाडु में ‘कफ सिरप’ की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश दिया जाता है। चेन्नई की एक कंपनी यह सिरप बनाती है। अधिकारी ने बताया कि पिछले दो दिन में पड़ोसी जिले कांचीपुरम के सुंगुवरचत्रम में दवा कंपनी की निर्माण इकाई का निरीक्षण किया गया और नमूने एकत्र किए गए।उन्होंने बताया कि कंपनी राजस्थान, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी को दवाइयां आपूर्ति करती है। उन्होंने बताया कि नमूनों को सरकारी प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा ताकि उनमें ‘डाइएथिलीन ग्लाइकॉल’ रसायन की मौजूदगी का पता लगाया जा सके। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बच्चों की मौत के मामलों का संज्ञान लेते हुए शुक्रवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक परामर्श जारी किया, जिसमें निर्देश दिया गया कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को खांसी और सर्दी की दवाएं न दी जाएं।
छिंदवाड़ा में 4 सितंबर को हुई थी पहली मौत
बता दें कि यह मामला सबसे पहले छिंदवाड़ा जिले में किडनी फेलियर से बच्चों की मौत का सिलसिला 4 सितंबर को पहली मौत के साथ शुरू हुआ था और एक महीने के भीतर यह 9 पर पहुंच गया। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। वहीं इस मामले में परासिया एसडीएम सौरभ कुमार यादव ने कहा प्रशासन अब तक 1,400 बच्चों की स्क्रीनिंग कर चुकी है। बच्चों की बीमारी की जड़ का पता लगाने के लिए स्क्रीनिंग की जा रही है।
छिंदवाड़ा के कलेक्टर इस त्रासदी पर क्या बोले
वहीं छिंदवाड़ा के कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह का कहना है कि जांच करा रहे हैं कि बच्चों को उनके अभिभावकों ने किससे दवा दिलाई थी। फिलहाल किडनी संक्रमण की वजह पता करने के लिए पानी की भी जांच कराई जा रही है। अगर किसी झोलाछाप से दवा लेकर बच्चों को खिलाई होगी तो उस डॉक्टर पर कार्रवाई होगी।
तमिलनाडु में एमपी के पत्र के बाद 48 घंटों में एक्शन एमपी के ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्या ने बताया था कि स्वास्थ्य विभाग ने दोनों कफ सिरप (coldrif व Nextro DS) का प्रोडक्शन रुकवाने तमिलनाडु और हिमाचल को पत्र लिखा है।तमिलनाडु सरकार ने मप्र की ओर से पत्र मिलते ही 24 घंटे के भीतर कोल्ड्रिफ सिरप (बैच नंबर SR-13) का सैंपल लेकर जांच कराई। इसमें डाईएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) 48.6% मिला, जो एक विषैला पदार्थ है। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसके तुरंत बाद पूरे तमिलनाडु में इसके उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
केंद्र सरकार ने एडवाइजरी जारी की
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को हेल्थ एडवाइजरी जारी करके कहा कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप (खांसी और सर्दी की दवाएं) न दी जाएं। सरकार ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से 11 बच्चों की मौत की खबरों के बाद एडवाइजरी जारी की है।स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले DGHS ने एडवाइजरी में कहा कि आमतौर पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं दिया जाना चाहिए। इससे बड़े बच्चों को यदि कफ सिरप दिया जाए तो उनका इस्तेमाल सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए।यानी जिस बच्चे को दवा दी जा रही है, उसे कड़ी निगरानी में रखा जाए। उसे उचित खुराक दी जाए। कम से कम समय के लिए दवा दी जाए। कई दवाओं के साथ कफ सिरप नहीं दिया जाए। DGHS की डॉ. सुनीता शर्मा ने यह एडवाइजरी जारी की है।
