दिल्ली में 25 नवंबर को रेलवे, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न सरकारी विभागों के हजारों कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली और नए लेबर कोड्स के खिलाफ ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि OPS बहाली और मजदूर-विरोधी लेबर कोड वापस लेने तक आंदोलन और तेज़ होता जाएगा। सरकार की नीतियों से नाराज़ कर्मचारियों का यह एकजुट प्रदर्शन आने वाले दिनों में बड़े संघर्ष का संकेत देता है।पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर दिल्ली का जंतर-मंतर जोरदार नारों से गूंज उठा। एनएमओपीएस के राष्ट्रीय और उत्तराखंड कार्यकारिणी के आह्वान पर जनपद अल्मोड़ा से बड़ी संख्या में शिक्षकों और कर्मचारियों ने इस आंदोलन में भाग लिया।जिला अध्यक्ष गणेश भंडारी और प्रांतीय कोर कमेटी सदस्य धीरेन्द्र कुमार पाठक ने बताया कि जंतर-मंतर पूरी तरह खचाखच भर चुका था, इसके बाद भी प्रतिभागियों का पहुंचना लगातार जारी रहा। रैली का समय दोपहर 1 बजे तक निर्धारित था।राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय बन्धु और राष्ट्रीय सचिव प्रज्ञा ने यह स्पष्ट कहा कि जब तक पुरानी पेंशन योजना बहाल नहीं होती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।प्रदेश अध्यक्ष जीतमणि पैन्युली, सचिव मुकेश रतूड़ी और धीरेन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि एक ही देश में पेंशन के दो अलग-अलग नियम नहीं चल सकते। सरकार को पुरानी पेंशन बहाली हर हाल में करनी ही होगी।जिला अध्यक्ष गणेश भंडारी ने कहा कि अपने अधिकारों की लड़ाई में लगातार संघर्षरत रहना होगा। आंदोलन की समीक्षा बैठक भी जल्द आयोजित की जाएगी।इस दौरान जंतर-मंतर पर मौजूद प्रमुख प्रतिभागियों में गिरिजा भूषण जोशी, चन्द्र शेखर नेगी, मनोज शर्मा, मदनमोहन शर्मा, मोहन जोशी, ब्लॉक अध्यक्ष गोपाल कृष्ण, उपाध्यक्ष मनीष पांडे, डॉक्टर बलवंत अधिकारी, विनोद थापा, दिगम्बर फुलोरिया, पूरन बेस्ट बिष्ट, रक्षित जोशी, राजेंद्र प्रसाद, ललित मोहन भाकुनी, गिरीश मठपाल, गंगाधर तिवारी, जीवन चंद जोशी, शांति जुयाल, बालादत्त पांडे, बुद्धि बल्लभ, डॉक्टर नवीन चंद जोशी, ललित पाण्डेय, जीवन मेहरा, मदन ध्यानी, दिनेश भण्डारी सहित कई अन्य लोग शामिल रहे।
पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु के आह्वान पर आज जनपद हरिद्वार से भारी संख्या में शिक्षकों एवं कर्मचारियों के द्वारा प्रतिभाग किया गया । गढ़वाल मंडल का नेतृत्व कर रहे विकास कुमार शर्मा ने जानकारी दी कि गढ़वाल के सात जनपदों से अच्छी संख्या में शिक्षक कर्मचारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया है । पेंशन बुढ़ापे की लाठी एवं सम्मान है । रैली प्रभारी वीरसिंह पंवार द्वारा जानकारी दी गई कि जनपद हरिद्वार पेंशन की लड़ाई में हमेशा से अग्रणी भूमिका में रहा है जिसका उदाहरण आज हमने देख लिया है । जनपद प्रभारी सदाशिव भास्कर ने जानकारी दी कि सरकार को एनपीएस एवं यूपीएस पेंशन योजना के साथ ओपीएस का विकल्प भी अवश्य देना चाहिए । जनपद अध्यक्ष सुखदेव सैनी एवं जनपद मंत्री ने संयुक्त रूप से जानकारी दी कि जनपद हरिद्वार में विगत सप्ताह से पुरानी पेंशन बहाली हेतु जागरूकता अभियान सभी विभागों में पहुंचकर चलाया जा रहा था जिसके परिणामस्वरूप आज शिक्षकों एवं कर्मचारियों के द्वारा भारी संख्या में दिल्ली में प्रतिभाग किया गया, इससे प्रतीत होता है कि देश के शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने एनपीएस एवं यूपीएस को पूरी तरह नकार दिया है ।दिल्ली महा रैली में जनपद रैली प्रभारी वीर सिंह पवार, सदाशिव भास्कर, रैली सप्रभारी सुरेश पाल सिंह, ललित मोहन जोशी, मदनपाल सिंह, संजय वत्स, निरोंम चौधरी, बस प्रभारी मनोज बरछीवाल, खेमानंद भट्ट, तारा सिंह, बबलू सिंह अधाना, सोमपाल सिंह, कुलदीप सिंह, कृष्ण पाल सिंह, शरद शर्मा, ज्योतिराम, तेजवीर सैनी, मोहम्मद इकराम, सतेन्द्र कुमार, विनय त्यागी, बृजमोहन मौर्य ,दर्शन सिंह पंवार एवं उनके साथ हजारों की संख्या में जनपद के शिक्षक कर्मचारियों के द्वारा प्रतिभा किया गया ।
शिक्षक प्रदर्शन के इतिहास में मंगलवार को नई दिल्ली में एक और बड़ी महारैली देखने को मिली। राष्ट्रीय राजधानी में जंतर मंतर पर देशभर से आए लाखों शिक्षकों कर्मचारियों ने लगातार दूसरे दिन पुरानी पेंशन, निजीकरण व टीईटी अनिवार्यता की समाप्ति को लेकर आवाज बुलंद की। नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) व सहयोगी संगठनों के बैनर तले आयोजित इस धरना प्रदर्शन में शिक्षक व शैक्षिक कर्मचारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें न तो एनपीएस और न ही यूपीएस चाहिए उन्हें सिर्फ और सिर्फ पुरानी पेंशन ही चाहिए। इस अवसर पर नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने देशभर से आए शिक्षक कर्मचारी को संबोधित करते हुए कहा कि कर्मचारियों को तैयार करने के लिए एक गहन देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा,पूरे जंतर-मंतर क्षेत्र में मोबाइल जैमर लगा दिया गया है ताकि शिक्षक कर्मचारियों की आवाजों को दबाया जा सके। कहा कि, अब सरकार की तानाशाही नहीं चलेगी और पुरानी पेंशन हर स्थिति में लागू ही करनी पड़ेगी। उन्होंने टीईटी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यदि सरकार 20 साल पहले नौकरी पाए शिक्षकों को निकाल सकती है। तो हिम्मत है तो यूपीएससी से चयनित अधिकारियों को निकाल कर दिखाए। उन्होंने देश भर के शिक्षक कर्मचारियों को सोशल मीडिया के बेहतर इस्तेमाल करने का आह्वान किया साथ ही ‘कलम चलाओ आंदोलन बढ़ाओ’का नारा दिया। इस दौरान उन्होंने फिर से अर्द्धसैनिक बलों को पुरानी पेंशन देने की मांग उठाई और कहा कि नेता साढ़े तीन लाख रुपये पेंशन पा रहा है वह भी हमारे टैक्स से और हमारे कर्मचारी 1250 रुपये की पेंशन पाएं यह कौन सा लोकतंत्र है। उन्होंने कुछ कर्मचारी नेताओं की सरकार से चापलूसी को भी निशाना बनाते हुए कहा कि ऐसे लोगों से स्वयं बचें, देश को बचाएं और अपने अधिकारों की रक्षा करें। उन्होंने अपने संगठन, आंदोलन, शिक्षक कर्मचारी की एकता पर गर्व करते हुए कहा कि जिस दौर में देश में तानाशाही चरम पर है, उस समय कुछ लोग तो हैं जो आवाज उठा रहे हैं। वहीं संगठन की राष्ट्रीय महासचिव प्रज्ञा ने कहा कि सरकार एनपीएस से यूपीएस पर आई और जल्द ही यूपीएस से ओपीएस पर आना पड़ेगा। देश के 97% कर्मचारियों ने यूपीएस को नकार दिया है। पीबीएसएस हरियाणा के विजेंदर धारीवाल, राष्ट्रीय संयोजक रेलवे अमरीक सिंह, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी प्रदीप ठाकुर आदि सभी ने भी एक स्वर में पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी बात रखी।
केंद्रीय कर्मचारी संगठन ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स’ ने ‘8वें वेतन आयोग’ में संशोधन और ‘पुरानी पेंशन बहाली’ सहित कई मुद्दों पर संघर्ष का बिगुल बजाने की घोषणा की है। ‘कॉन्फेडरेशन’ के महासचिव एसबी यादव के मुताबिक, सिलसिलेवार संघर्ष के लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सभी सदस्यों/पदाधिकारियों, राज्यों की सभी केंद्रीय कार्यकारी समितियों के महासचिव और संबद्ध संगठनों के सभी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को अलर्ट कर दिया है। कर्मचारियों को तैयार करने के लिए एक गहन देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा। राष्ट्रीय सचिवालय के सदस्य तय कार्यक्रम के अनुसार, विभिन्न राज्यों का दौरा करेंगे। यह अभियान 15 दिसंबर 2025 तक पूरा किया जाना है। 16 दिसंबर को सभी कार्यस्थलों/कार्यालयों में दोपहर के भोजन के समय विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
सभी कर्मचारियों के लिए ओपीएस बहाल करें
‘कॉन्फेडरेशन’ के महासचिव एसबी यादव द्वारा सभी पदाधिकारियों को भेजे गए पत्र के अनुसार, सरकार से यह मांग की गई है कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन-भत्तों में संशोधन और अन्य मुद्दों पर परिसंघ और कर्मचारी पक्ष एनसी-जेसीएम द्वारा दिए गए सुझावों/विचारों को शामिल करते हुए 8वें वेतन आयोग की विचारणीय शर्तों में संशोधन करे। 50% डीए/डीआर को मूल वेतन/पेंशन में मिलाए और 1.1.2026 से अंतरिम राहत (आईआर) के रूप में वेतन/पेंशन का 20% प्रदान करें। एनपीएस/यूपीएस को समाप्त करें, सभी कर्मचारियों के लिए ओपीएस बहाल करें।
कर्मचारी संघों पर दमनकारी नीतियों का इस्तेमाल
केंद्रीय कर्मचारियों को प्रभावित करने वाली अपनी सात सूत्रीय मांगों को लेकर परिसंघ पिछले साल से ही आंदोलन कर रहा है। इसका समापन 9 जुलाई 2025 को एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल के रूप में हुआ। 8वीं केंद्रीय कार्यकारी समिति के गठन के अलावा, सरकार द्वारा कर्मचारियों की शिकायतों के निवारण/समाधान के लिए अभी तक कोई ठोस कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। इसके विपरीत, सरकार द्वारा संघों/संघों पर दमनकारी उपाय अपनाए जा रहे हैं, जैसे संगठनों की मान्यता रद्द करना या कई विभागों द्वारा संघों/संघों को मान्यता देने से मना करना, जबकि संगठन सीसीएस आरएसए नियम 1993 की सभी शर्तों को पूरा करते हैं। केवल संघ की गतिविधियों के लिए संघ पदाधिकारियों का प्रतिशोधात्मक उत्पीड़न एक आम बात हो गई है। हाल ही में केरल सीओसी के मुख्य सचिव का निलंबन और एआईजीडीएसयू (डीओपी) के मुख्य सचिव को नियुक्ति से बर्खास्त करना प्रतिशोधात्मक उत्पीड़न के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। सरकार जेसीएम के तहत मध्यस्थता बोर्ड द्वारा दिए गए निर्णयों को लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता का सम्मान करने में अनिच्छुक है, जिन पर कर्मचारी पक्ष के साथ सहमति हुई थी।
पेंशन के संशोधन को दायरे से बाहर रखा गया
यादव के अनुसार, जैसा कि अनुमान था, वित्त विधेयक 25 के एक भाग पेंशन अधिनियम 25 के सत्यापन के प्रभाव भारत सरकार, वित्त मंत्रालय के राजपत्र अधिसूचना दिनांक 03.11.2025 में परिलक्षित होते हैं। इसके तहत 8वें वेतन आयोग का गठन ‘टीओआर’ के साथ किया गया है। इसमें पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों के लिए पेंशन के संशोधन को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। “गैर-अंशदायी पेंशन योजनाओं की अप्रदत्त लागत” की जांच के लिए नई शब्दावली के खंड को शामिल करने से मौजूदा ओपीएस पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। परिसंघ ने 25 अक्टूबर को आयोजित अपनी राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की बैठक में सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की और विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से अपने संशोधित मांग पत्र के समर्थन में चरणबद्ध आंदोलन कार्यक्रमों को नवीनीकृत करने का निर्णय लिया।
31 दिसंबर तक आयोजित होंगे राज्य सम्मेलन
मांगपत्र को लोकप्रिय बनाने, संगठनों को मजबूत करने, संघर्षों के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार करने के मकसद से एक गहन देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा। राष्ट्रीय सचिवालय के सदस्य तय कार्यक्रम के अनुसार, राज्यों का दौरा करेंगे। यह अभियान 15 दिसंबर 2025 तक पूरा किया जाना है।अपनी मांगों के समर्थन में 31 दिसंबर तक राज्य सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। राष्ट्रीय सचिवालय के सदस्य ऐसे सम्मेलनों में भाग लेंगे। जिन राज्य समितियों के सम्मेलन लंबित हैं, वे 31 दिसंबर 2025 तक अपने सम्मेलन आयोजित करेंगी। आंदोलन कार्यक्रमों के उपरोक्त चरणों की समीक्षा के बाद आगे की कार्ययोजना तय की जाएगी।
ये है ‘कॉन्फेडरेशन’ के कर्मचारियों का मांग पत्र
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन-भत्तों में संशोधन और अन्य मुद्दों पर परिसंघ और कर्मचारी पक्ष एनसी-जेसीएम द्वारा दिए गए सुझावों/विचारों को शामिल करते हुए 8वें वेतन आयोग की विचारणीय शर्तों में संशोधन करें। 50 प्रतिशत डीए/डीआर को मूल वेतन/पेंशन में शामिल किया जाए। एक जनवरी 2026 से अंतरिम राहत (आईआर) के रूप में वेतन/पेंशन का 20 प्रतिशत प्रदान करें। एनपीएस/यूपीएस को समाप्त करें, सभी कर्मचारियों के लिए ओपीएस बहाल करें। सेवानिवृत्ति की तिथि और केंद्रीय वेतन आयोग की स्वीकृत सिफारिशों जैसे कारकों के आधार पर पेंशनभोगियों के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
डीए/डीएआर की तीन किस्तें भी जारी हों
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को कोविड महामारी के दौरान रोके गए डीए/डीएआर की तीन किस्तें (18 महीने) जारी की जाएं। पेंशन के कम्यूटेड हिस्से को 15 वर्ष के बजाय 11 वर्ष बाद बहाल किया जाए। अनुकंपा नियुक्ति पर लगाई गई 5% की अधिकतम सीमा हटाई जाए। सभी मामलों में मृतक कर्मचारी के आश्रितों/बच्चों को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए। सभी विभागों में सभी संवर्गों के रिक्त पदों को भरा जाए, सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग और निगमीकरण बंद किया जाए।
संघों पर नियम 15 1 (सी) लागू करना बंद करें
संयुक्त आयोग (जेसीएम) प्रणाली के अनुसार संघों के लोकतांत्रिक कामकाज को सुनिश्चित करें। लंबित संघों/संघों को मान्यता प्रदान करें। एआईपीईयू ग्रेड-सी यूनियन, एनएफपीई और इसरोसा के मान्यता रद्द करने के आदेश वापस लें। सेवा संघों/संघों पर नियम 15 1 (सी) लागू करना बंद करें।
संघ के पदाधिकारियों का प्रतिशोधात्मक उत्पीड़न बंद करें। सेवानिवृत्ति योजना सेवाएं, सीए संदर्भ संख्या 3/2001 के मामले में, संयुक्त आयोग (जेसीएम) के अंतर्गत मध्यस्थता बोर्ड द्वारा दिए गए निर्णयों, जिन पर आम सहमति बन गई है, का तत्काल कार्यान्वयन करें। आकस्मिक, संविदा श्रमिकों और जीडीएस कर्मचारियों को नियमित करें, स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के समान दर्जा प्रदान करें।
कर्मियों को संघर्ष में भाग लेने के लिए राजी करें
सरकार ने 21.11.25 के अपने राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से चार श्रम संहिताओं को एकतरफा रूप से अधिसूचित कर दिया है, जिससे संहिता विधेयकों के कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इससे ट्रेड यूनियनों का कामकाज बहुत कठिन हो जाएगा। दस सीटीयू ने उक्त अधिसूचना को निरस्त करने की मांग करते हुए 26 नवंबर को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। परिसंघ सीटीयू के आंदोलन के साथ एकजुटता से खड़ा है। परिसंघ अपने राष्ट्रीय सचिवालय सदस्यों, सभी संबद्ध एसोसिएशनों और फेडरेशनों के महासचिवों/महासचिवों तथा राज्य सीओसी के महासचिवों से आग्रह करता है कि वे कृपया एक-दूसरे के साथ समन्वय स्थापित करें। कार्यकर्ताओं के बीच संयुक्त रूप से जोरदार अभियान चलाएं। उन्हें मांगों के बारे में शिक्षित करें और संघर्ष में भाग लेने के लिए राजी करें।
क्या है ओल्ड पेंशन स्कीम (What is Old Pension Scheme)?
OPS यानी पुरानी पेंशन स्कीम में सरकारी कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद हर महीने पूरी पेंशन मिलती है। यह पेंशन कर्मचारी की आखिरी सैलरी का 50% तक होती है। इसमें महंगाई भत्ता भी जुड़ता रहता है, जो हर 6 महीने में बढ़ता है। यह स्कीम पूरी तरह सरकारी खर्चे पर चलती है, यानी कर्मचारी को अपनी सैलरी से अंशदान नहीं देना पड़ता। पूरा पैसा सरकार देती है। पेंशन जीवन भर मिलती है और कर्मचारी की मृत्यु के बाद पत्नी/पति को भी फैमिली पेंशन मिलती रहती है। यह पूरी तरह गारंटीड और सुरक्षित होती है। ओल्ड पेंशन स्कीम ब्रिटिश काल से चली आ रही थी। आजादी के बाद भी यही जारी रही और 1 जनवरी 2004 तक सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू थी। 1 जनवरी 2004 से नई पेंशन स्कीम (NPS) शुरू हुई, इसलिए OPS को बंद कर दिया गया।
क्यों बढ़ी OPS बहाली की मांग?
कर्मचारियों का कहना है कि नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) में पेंशन मार्केट पर निर्भर होती है, इसलिए रिटायरमेंट के बाद आय अनिश्चित रहती है। कई कर्मचारी रिटायरमेंट पर उम्मीद से बहुत कम पेंशन पाते हैं। इसीलिए OPS की मांग तेजी से बढ़ी है।NC-JCM का तर्क है कि सरकारी कर्मचारी 30-35 साल नौकरी करते हैं, ऐसे में उन्हें स्थायी और सम्मानजनक पेंशन मिलना उनका हक है। संगठन ने यह भी कहा कि कई राज्य जैसे राजस्थान, हिमाचल, पंजाब और छत्तीसगढ़ पहले ही OPS बहाल कर चुके हैं, इसलिए केंद्र भी पहल करे।
नेशनल पेंशन स्कीम क्या है? (What is National Pension Scheme)?
नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) 2004 में शुरू हुई नई पेंशन व्यवस्था है। इसमें कर्मचारी की सैलरी से हर महीने 10% पैसा कटता है और सरकार भी 10-14% डालती है। यह पैसा शेयर बाजार, बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटी में निवेश होता है। रिटायरमेंट पर 60% राशि एकमुश्त मिलती है, बाकी 40% से एन्युटी खरीदकर हर महीने पेंशन बनती है। पेंशन की राशि बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है, इसलिए यह पूरी तरह गारंटीड नहीं होती। जोखिम कर्मचारी का रहता है।
आठवें वेतन आयोग से OPS का क्या संबंध?
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब सरकार 8वें वेतन आयोग पर विचार कर रही है, उसी दौरान पेंशन सुधार भी होना चाहिए। उनका मानना है कि अगर OPS बहाल होती है, तो लाखों कर्मचारियों को भविष्य की आर्थिक सुरक्षा मिल जाएगी।
क्या कदम उठा सकती है केंद्र सरकार ?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार अभी NPS में सुधार पर काम कर रही है। हालांकि OPS बहाली पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है। लेकिन कर्मचारियों का दबाव बढ़ता जा रहा है और आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की चर्चाओं के बीच यह मुद्दा फिर से सबसे बड़े एजेंडा में शामिल हो गया है।
