नई दिल्ली। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के मुखिया और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बुधवार सुबह एक विमान हादसे में निधन हो गया। इस दुर्घटना में विमान के क्रू और अजित के पीए समेत पांच लोगों की जान गई। इस घटना के बाद पूरे महाराष्ट्र के सियासी जगत में शोक की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर शोक जताया। दूसरी तरफ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने अजित पवार के घर पहुंचकर उनके परिवार के साथ संवेदना प्रकट की। इस हादसे में चार अन्य लोगों की भी जान चली गई। निजी विमान एयरपोर्ट पर उतरते समय क्रैश हुआ है। बताया जा रहा है कि अजित पवार मुंबई एयरपोर्ट से सुबह 8.10 बजे रवाना हुए।
अजित पवार जिला परिषद चुनावों को लेकर आज (बुधवार) बारामती आ रहे थे। घटनास्थल से वीडियो भी सामने आए, जो काफी डरावनी थे। घटनास्थल पर लोगों की भारी भीड़ मौजूद रही। विमान पूरी तरह से मलबे में तब्दील हो गया।मुंबई से बारामती जा रहा चार्टर प्लेन बारामती में सुबह 8.45 बजे क्रैश लैंड हुआ। डीजीसीए (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) ने घटना को लेकर बताया कि बारामती क्रैश लैंडिंग में उपमुख्यमंत्री अजित पवार, 2 और लोगों (1 पीएसओ और 1 अटेंडेंट) और 2 क्रू (PIC+FO) सदस्यों के साथ विमान में सवार थे। विमान में सवार कोई भी व्यक्ति इस दुर्घटना में जीवित नहीं बचा।क्रैश लैंडिंग के दौरान मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने कहा, ‘मैंने यह अपनी आंखों से देखा। यह सच में बहुत दुखद है। जब विमान नीचे आ रहा था, तो ऐसा लगा कि यह क्रैश हो जाएगा और यह क्रैश हो गया। फिर इसमें धमाका हुआ। बहुत बड़ा धमाका हुआ। उसके बाद, हम यहां भागे और देखा कि विमान में आग लगी हुई थी। विमान में फिर से 4-5 धमाके हुए और लोग यहां आए, उन्होंने लोगों को (विमान से) बाहर निकालने की कोशिश की। लेकिन क्योंकि यह बहुत बड़ी आग थी, इसलिए लोग मदद नहीं कर पाए। अजित पवार विमान में सवार थे और यह हमारे लिए बहुत दुखद है। मैं इसे शब्दों में बयान नहीं कर सकता।’
एक स्थानीय महिला ने बताया कि हम यहां रहते हैं और हमारे पीछे एक हवाई पट्टी है, जहां हमने देखा कि एक विमान आया और उतरा नहीं। वह आगे चला गया, लेकिन कुछ देर बाद वापस मुड़कर उतरने लगा। लेकिन रन-वे से ठीक पहले वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जैसे ही हमने यह देखा, हमने हवाई पट्टी के आसपास रहने वाले अपने जानकारों को सूचित किया, इसलिए पुलिस और अन्य लोग तुरंत आ गए। उन्होंने आग बुझाने की कोशिश की। 15 मिनट बाद वे आग पर काबू पाने में सफल रहे और जब हम पास गए, तो हमने वहां एक बिना सिर का शव पड़ा देखा। वह पूरी तरह से जला हुआ और सूजा हुआ था। हम उसकी पहचान नहीं कर सके, लेकिन बाद में हाथ में मिली किसी चीज की मदद से पहचान हुई कि वह दादा (अजीत पवार) का शव था। पुलिस की टीम हमारे पास आई और पानी मांगा। हमने उन्हें पानी दिया, और उन्होंने शव को ढकने के लिए कपड़े भी मांगे, इसलिए हमने अपने घर से एक नया कंबल उन्हें दे दिया।
वीएसआर कंपनी के विमान में सवार थे अजित पवार।
लैंडिंग का पहला प्रयास विफल रहा।
दूसरे प्रयास में विमान घूमकर रनवे की तरफ लौटा।
एयरपोर्ट से महज 100 फीट की दूरी पर प्लेन क्रैश हुआ।
क्रैश होते ही विमान में एक के बाद कई धमाके हुए।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे ने देश की विमानन सुरक्षा और एयरपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच और विशेषज्ञों के विश्लेषण से यह बात सामने आ रही है कि अगर बारामती एयरपोर्ट पर एक खास तकनीक मौजूद होती, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था। दूसरी ओर, उड़ान का संचालन करने वाली कंपनी ने भी अपना पक्ष रखा है। हादसाग्रस्त विमान वीएसआर वेंचर्स नामक कंपनी की थी।कंपनी के मालिक वीके सिंह ने कहा पायलट को शायद रनवे दिखाई नहीं दिया और उसने मिस्ड अप्रोच का सहारा लिया जो एक मानकीकृत प्रक्रिया है। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि दुर्घटनाग्रस्त विमान का रखरखाव बहुत अच्छी तरह से किया गया है। इसके पायलट कैप्टन सुमित कपूर, एक बहुत ही अनुभवी पायलट थे, जिन्होंने 16,000 उड़ान घंटे पूरे कर लिए थे। लीयरजेट 45 विमान में सवार सभी पांचों लोगों की दुर्घटना में मौत हो गई।
कौन हैं अजित पवार?
अजित अनंतराव पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में हुआ। वह एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे हैं। उनके पिता वी. शांताराम के राजकमल स्टूडियो में काम करते थे। अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के राजनीतिक नक्शेकदम पर चलते हुए राजनीति में प्रवेश किया। जनता और समर्थकों के बीच वह ‘दादा’ के नाम से लोकप्रिय हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा देओली प्रवर से की और माध्यमिक शिक्षा महाराष्ट्र शिक्षा बोर्ड से पूरी की। उनकी शिक्षा माध्यमिक स्तर तक ही रही।
राजनीतिक सफर
अजित पवार ने राजनीति की शुरुआत 1982 में की, जब वह मात्र 20 वर्ष के थे। उन्होंने सबसे पहले एक चीनी सहकारी संस्था का चुनाव लड़ा।
1991: पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने, 16 साल तक इस पद पर रहे।
1991: बारामती से लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन अपने चाचा शरद पवार के लिए सीट छोड़ दी।
उसी वर्ष महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने गए।
1992-1993: कृषि और बिजली राज्य मंत्री बने।
साल 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 में बारामती निर्वाचन क्षेत्र से वह लगातार जीतते रहे।
उन्होंने कृषि, बागवानी, बिजली और जल संसाधन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने कृष्णा घाटी और कोकण सिंचाई परियोजनाओं की जिम्मेदारी संभाली।
सत्ता तक पहुंच का सफर
अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वाकांक्षी और प्रभावशाली नेता माना जाता है। 2009 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने उप मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताई थी, लेकिन उस समय यह पद छगन भुजबल को मिला। हालांकि, दिसंबर 2010 में वह पहली बार उप मुख्यमंत्री बने। 2013 में उनका नाम सिंचाई घोटाले से जुड़े विवाद में आया और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। बाद में उन्हें क्लीन चिट मिली और वह फिर से पद पर लौटे।
विवादों से रिश्ता
अजित पवार का राजनीतिक जीवन विवादों से भी जुड़ा रहा है।
2013: “अगर बांध में पानी नहीं है तो क्या पेशाब करके भरें?” वाला बयान, जिसकी काफी आलोचना हुई। बाद में उन्होंने माफी मांगी।
2014: लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं को धमकाने के आरोप।
भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोप भी समय-समय पर लगे
लवासा लेक सिटी प्रोजेक्ट में कथित मदद और अन्य मामलों को लेकर विवाद।
हालांकि, इन विवादों के बावजूद अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे।
राजनीतिक पहचान
अजित पवार को एक मजबूत संगठनकर्ता और प्रशासनिक अनुभव वाले नेता के रूप में देखा जाता रहा। उनके और चाचा शरद पवार के बीच राजनीतिक मतभेदों की चर्चा भी होती रही है, लेकिन उन्होंने हमेशा खुद को शरद पवार का अनुयायी बताया है। आज अजित पवार महाराष्ट्र की सत्ता राजनीति के सबसे अहम चेहरों में शामिल रहे और राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका निर्णायक मानी जाती था।
