अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते गैस सप्लाई ठप हो गई है। इससे देश में LPG की किल्लत हो रही है। दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों ने कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर रोक लगा दी है। गैस सप्लाई बंद होने की वजह से कई शहरों में रेस्टोरेंट्स और होटल बंद होने की नौबत आ गई है। ऐसे में सरकारी सूत्रों का कहना है कि तेल कंपनियां तीन सदस्यी कमेटी के जरिए रेस्टोरेंट एसोसिएशनों से बात करेंगी, ताकि LPG सप्लाई की दिक्कतों को समझा जा सके।केंद्र सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की रीफिल बुकिंग के नियमों में बदलाव किया है। अब उपभोक्ता एक सिलेंडर डिलीवर होने के बाद दूसरा सिलेंडर 21 दिन के बजाय 25 दिन बाद ही बुक कर सकेंगे। मिडिल ईस्ट टेंशन के बीच सरकार ने यह कदम गैस की जमाखोरी रोकने और सभी उपभोक्ताओं को समान रूप से सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए उठाया है। पिछले कुछ समय से यह देखा जा रहा था कि जरूरत न होने पर भी लोग सिलेंडर बुक करके स्टॉक कर रहे थे।सरकार का मानना है कि वेटिंग पीरियड को 25 दिन करने से बेवजह की बुकिंग पर लगाम लगेगी। इससे उन लोगों को आसानी से सिलेंडर मिल सकेगा जिन्हें वाकई जरूरत है।
देशभर में ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ लागू
केंद्र सरकार ने गैस समेत जरूरी चीजों की जमाखोरी रोक ने लिए देशभर में ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ लागू कर दिया है। अब गैस को 4 कैटेगरी में बांटा जाएगा….
पहली कैटेगरी (पूरी सप्लाई): इसमें घर की रसोई गैस (PNG) और गाड़ियों में डलने वाली CNG आती है। इन्हें पहले की तरह पूरी गैस मिलती रहेगी।
दूसरी कैटेगरी (खाद कारखाने): खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को करीब 70% गैस दी जाएगी। बस उन्हें यह साबित करना होगा कि गैस का इस्तेमाल खाद बनाने में ही हुआ है।
तीसरी कैटेगरी (बड़े उद्योग): नेशनल ग्रिड से जुड़ी चाय की फैक्ट्रियों और दूसरे बड़े उद्योगों को उनकी जरूरत की लगभग 80% गैस मिलेगी।
चौथी कैटेगरी (छोटे बिजनेस और होटल): शहरों के गैस नेटवर्क से जुड़े छोटे कारखानों, होटल और रेस्टोरेंट को भी उनकी पुरानी खपत के हिसाब से लगभग 80% गैस दी जाएगी।
क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम?
एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955 एक ऐसा कानून है, जो सरकार को यह ताकत देता है कि वह किसी भी जरूरी चीज जैसे- अनाज, दालें, खाने का तेल, दवाइयां या ईंधन की सप्लाई और कीमतों को कंट्रोल कर सके। इसे आसान भाषा में ‘जमाखोरी रोकने वाला कानून’ कह सकते हैं।जब कभी किसी चीज की कमी होने लगती है या उसकी कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ने लगती हैं, तो सरकार इस कानून को लागू कर देती है। इसके तहत व्यापारियों के लिए स्टॉक की एक लिमिट तय कर दी जाती है कि वे एक सीमा से ज्यादा सामान गोदामों में नहीं भर सकते।
संकट से निपटने सरकार ने 5 जरूरी कदम उठाए
- हाई-लेवल कमेटी बनाई: संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो सप्लाई की समीक्षा करेगी।
- एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू: गैस की सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ लागू कर दिया है।
- 25 दिन बाद होगी LPG बुकिंग: घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में बदलाव किया है। उपभोक्ता एक सिलेंडर डिलीवर होने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक होगा।
- OTP और बायोमेट्रिक अनिवार्य: गैस की जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी एजेंट OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का सख्ती से इस्तेमाल कर रहे हैं।
- LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश: सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरीज को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था। सूत्रों का कहना है कि अब उत्पादन 10% बढ़ गया है।
तेल कंपनियां अलग-अलग रेस्टोरेंट एसोसिएशनों से बात करेंगी
सूत्रों के मुताबिक सरकार ने रेस्टोरेंट एसोसिएशनों की शिकायतें सुनने के लिए 3 सदस्यों की एक कमेटी बनाई है। इसमें IOC, HPCL और BPCL के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शामिल हैं।यह कमेटी एसोसिएशन की कॉमर्शियल गैस सप्लाई से जुड़ी जायज जरूरतों को पूरा करेगी। जरूरत के हिसाब से सप्लाई की प्राथमिकता भी भी फिर से तय करेगी।
सप्लाई संकट की 2 वजह
- ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा।दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।
- प्लांट पर ड्रोन हमले से LNG का प्रोडक्शन रुका
पिछले हफ्ते अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर स्ट्राइक की थी। इसके जवाब में ईरान ने UAE, कतर, कुवैत और सऊदी जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है।ईरान के ड्रोन हमले के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने अपने LNG प्लांट का प्रोडक्शन रोक दिया है। इससे भारत में गैस की सप्लाई घट गई है। भारत अपनी जरूरत की 40% LNG (करीब 2.7 करोड़ टन सालाना) कतर से ही आयात करता है।
कब तक सुधरेंगे हालात?
इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबंधक (LPG) के.एम. ठाकुर का कहना है कि ग्राहकों को घबराने की जरूरत नहीं है और पैनिक बुकिंग न करें। सरकार अब अमेरिका जैसे देशों से वैकल्पिक कार्गो मंगाने पर विचार कर रही है।वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर G7 देश अपने इमरजेंसी तेल भंडार से सप्लाई जारी करने पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि ग्लोबल मार्केट में ऊर्जा संकट को कम किया जा सके। रूस और अल्जीरिया से भी अतिरिक्त कच्चा तेल आने की उम्मीद है।
देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है
ईंधन की सप्लाई को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश के किसी भी पेट्रोल पंप पर तेल की किल्लत नहीं है। सप्लाई चैन पूरी तरह सामान्य है। भविष्य में किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए भारत ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के अलावा अन्य रास्तों से कच्चे तेल की सोर्सिंग तेज कर दी है। इससे समुद्री मार्ग में किसी भी तनाव की स्थिति में सप्लाई में रूकावट नहीं आएगी।
एविएशन टर्बाइन फ्यूल का भी पर्याप्त स्टॉक
विमानों में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF को लेकर भी सरकार ने स्थिति साफ की है। अधिकारियों ने कहा कि देश के पास ATF का पर्याप्त स्टॉक है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। भारत न केवल ATF का उत्पादक है, बल्कि इसका निर्यात भी करता है। इसलिए विमान सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर के दाम ₹60 बढ़ाए
