तेहरान: मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की ओर से इज़रायल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने की घटनाएं सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने एक साथ “8 देशों पर एक साथ हमला कर दिया है इनमें UAE, Bahrain, Qatar, Kuwait and Israel और सऊदी अरब आदि शामिल हैं । ईरान ने अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाते हुए इन देशों में हमले किए हैं।कतर स्थित Al Udeid Air Base अमेरिका के सेंट्रल कमांड का फॉरवर्ड मुख्यालय है। यहां हजारों अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। क्षेत्रीय तनाव के दौरान यह बेस अक्सर रणनीतिक फोकस में रहता है। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का मुख्य अड्डा (U.S. Fifth Fleet) भी मौजूद है, जिससे सुरक्षा सतर्कता और बढ़ाई गई है संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी Abu Dhabi के आसमान में एयर डिफेंस गतिविधि देखे जाने की रिपोर्ट सामने आई।
पत्रकार Konstantin Toropin की रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिका ने ईरान पर हवा और समुद्र दोनों रास्तों से सैन्य कार्रवाई की।इसके बाद क्षेत्र में जवाबी हमलों और मिसाइल गतिविधियों की खबरें तेज हुईं।Jon Gambrell की रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत में सायरन और विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। कुवैत अमेरिकी सेना की महत्वपूर्ण मौजूदगी वाला देश है। प्रारंभिक रिपोर्ट में किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं की गई है।
पत्रकार Courtney Bonnell के अनुसार, कतर, बहरीन और इज़रायल में अमेरिकी दूतावासों ने अपने कर्मियों को “shelter-in-place” का निर्देश दिया।
U.S. Embassy in Qatar ने सोशल मीडिया पोस्ट में सभी अमेरिकियों को अगली सूचना तक सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी।यूनाइटेड अरब अमीरात ने भी घोषणा की है कि वह अपना एयरस्पेस बंद कर रहा है, APA की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी WAM नई एजेंसी ने यह जानकारी दी है। राजधानी अबू धाबी में धमाकों की आवाज़ सुनी गई और शहर से धुआं उठता देखा गया। कुछ फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा और क्षेत्रीय रिपोर्ट्स के आधार पर अस्थायी रूप से एयरस्पेस प्रतिबंध/रूट डायवर्जन की जानकारी भी सामने आई है। इज़रायल की बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रणाली Iron Dome और अन्य इंटरसेप्टर सिस्टम हाई अलर्ट पर रखे गए हैं। क्षेत्रीय मीडिया में बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्शन की खबरें आई हैं, लेकिन सभी घटनाओं का स्वतंत्र सत्यापन जारी है।
अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को ईरान पर हमला किया और उसके शीर्ष नेताओं और सैन्य नेतृत्व को मार डाला। तेहरान समेत कई शहरों में हवाई हमलों के बाद ईरान की सेना ने जवाबी आक्रामण शुरू किया। ईरान की ओर से इजरायल में मिसाइलें दागी गई हैं। साथ ही यूएई, बहरीन, कतर, कुवैत जैसे देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान के जवाबी हमलों के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर वह दुश्मन से ज्यादा उसके ‘हिमायतियों’ पर क्यों गुस्सा है। अरब जगत के जो अमीर देश ईरान का निशाना बने हैं, वह लंबे समय से अमेरिका के साथी हैं और इन देशों में कई यूएस मिलिट्री फैसिलिटी हैं।
लंदन के किंग्स कॉलेज में डिफेंस स्टडीज के लेक्चरर रॉब गीस्ट पिनफोल्ड ने अल जजीरा से बात करते हुए कहा है कि ईरान बहुत सोच-समझकर खाड़ी देशों पर हमले कर कर रहा है।रॉब गीस्ट पिनफोल्ड कहते हैं, ‘ईरान मिसाइल हमलों के लिए खाड़ी देशों को इसलिए चुन रहा है क्योंकि वह उन्हें एक सॉफ्ट टारगेट के तौर पर देखता है। इजरायल की तुलना में इन देशों पर हमला करना आसान है। इन देशों में लड़ाई की इच्छा कम है। वह इसमें पड़ना नहीं चाहते क्योंकि यह उनकी लड़ाई नहीं है।’रॉब का मानना है कि इन देशों पर हमला होगा तो वे जल्द से जल्द सीजफायर चाहेंगे और इसके लिए ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन पर दबाव डालेंगे। ये देश दूसरे देशों की लड़ाई की वजह से अपना आर्थिक नुकसान और अपनी जमीन पर उथलपुथल नहीं चाहेंगे। हालांकि अभी तक लड़ाई रुकने के संकेत नहीं मिले हैं।
पिनफोल्ड ने आगे कहा कि खाड़ी देशों की तरफ से कम से कम बयानों में ताकत का प्रदर्शन और एकता दिख रही है। वह मैसेज देने की कोशिश कर रहे हैं कि वे एकजुट और मजबूत हैं। हालांकि अंदर ही अंदर ईरान के साथ कैसे जुड़ना है और ईरान के साथ संपर्क करना है या नहीं, इस बारे में गहरी असहमतियां हैं।रॉब गीस्ट पिनफोल्ड कहते हैं, ‘कुछ खाड़ी देश मिलिट्री फोर्स के लिए दबाव डालेंगे लेकिन यह उनके लिए आसान नहीं होगा। ईरान जानता है कि उसने इन देशों को मुश्किल में डाल दिया है। वे अमेरिका और इजरायल के साथ लड़ाई में शामिल होते हैं तो यह फैसला भी उनके लिए आसान नहीं होने जा रहा है। खाड़ी देशों को शायद अमेरिका और इजराइल की लड़ाई में किस्मत आजमाते हुए देखा जा सकता है। हालांकि इन देशों के लिए विकल्प कम हो रहे हैं। फिलहाल उन्हें यह दिखाने की जरूरत है कि वे अपनी सॉवरेनिटी की रक्षा कर सकते हैं और वे अपने हितों को आगे बढ़ा सकते हैं। खाड़ी देशों के अगले कदम पर दुनिया की नजर होगी।
