एशिया कप के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच 14 सितंबर को होने वाले मुकाबले को लेकर शिवसेना (उद्धव गुट) ने बड़ा निर्णय लिया है। इस मैच के दिन महिला आघाड़ी द्वारा ‘मेरा सिंदूर मेरा देश’ नाम से आंदोलन किया जाएगा। इस बाबत सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला।उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे ने बैठक लेकर यह निर्णय लिया है। अबू धावी में भारत-पाकिस्तान मैच खेला जा रहा है जो जनभावनाओं के खिलाफ है। राउत ने कहा कि अभी हाल ही में पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की हत्या हुई और उनके परिवारों का रोष अभी भी लोगों के सामने है। सरकार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की बात कर रही है। प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री कहते हैं कि पाकिस्तान की कमर तोड़ देंगे। ‘खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे’ ऐसा कहने वाले अब बताएं कि खून और क्रिकेट कैसे एक साथ चल सकते हैं? उन्होंने भाजपा, विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से इस मुद्दे पर अपनी राय स्पष्ट करने की मांग की।
14 को सड़कों पर उतरेगी शिवसेना,‘मेरा सिंदूर मेरा देश’ नाम से आंदोलन किया जाएगा
राउत ने आगे कहा कि 14 सितंबर को शिवसेना महिला आघाड़ी सड़कों पर उतरेगी। आंदोलन का नारा होगा ‘सिंदूर के सम्मान में, शिवसेना मैदान में।’ महिलाएं प्रधानमंत्री मोदी को सिंदूर भेजेंगी और इसका एक अभियान भी चलाया जाएगा। हम इस मैच का विरोध करेंगे। यह देशद्रोह जैसा कृत्य है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं के बच्चे अबू धाची जाकर मैच देखेंगे, जय शाह तो क्रिकेट के सर्वेसर्वा है। अमित शाह हमें राष्ट्रभवित्त का पाठ पढ़ाते हैं और हमे कहते हैं कि हम मूल विचारों से भटक गए हैं लेकिन हम अपने मूल विचारों से कभी दूर नहीं हुए। सोशल मीडिया पर सरकार और बीसीसीआई को याद दिलाया जा रहा है कि जब प्रधानमंत्री मोदी कहते हैं कि पाकिस्तान के साथ टेरर और टॉक साथ नहीं हो सकते, टेरर और ट्रेड साथ नहीं हो सकते, खून और पानी साथ नहीं बह सकते, तो खून और क्रिकेट कैसे साथ हो सकता है
तत्काल सुनवाई से हाई कोर्ट का इनकार
उच्चतम न्यायालय ने आगामी एशिया कप में भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले क्रिकेट मैच को रद्द करने के अनुरोध वाली याचिका पर गुरुवार को तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। एक वकील ने न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ के समक्ष मामले को तत्काल सुनवाई के लिए पेश किया, पीठ ने कहा कि इसमें जल्दी क्या है? यह मैच है, इसे होने दीजिए।मैच इसी रविवार को है, क्या किया जा सकता है? वकील ने दलील दी कि क्रिकेट मैच रविवार को है और यदि मामला शुक्रवार को सूचीबद्ध नहीं किया गया तो याचिका निरर्थक हो जाएगी। इस पर पीठ ने कहा, ‘इस रविवार को मैच है? हम इसमें क्या कर सकते हैं? इसे होने दीजिए। मैच होना चाहिए।’
खेल या व्यापार, पाकिस्तान का हर स्तर पर हो बॉयकॉट, देश भावना के आगे खेल नहीं
हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के संबंधों को संकट में डाल दिया है. जब देश के जवान सीमा पर जान की बाजी लगा रहे हैं, तब ऐसे समय में पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच खेला जाना कई लोगों को खल रहा है. लोगों का मानना है कि इससे यह संदेश जाता है कि हम एक ऐसे देश से खेल का जश्न मना रहे हैं, जो आतंकियों को पनाह देता है. इसी मुद्दे को लेकर सुप्रसिद्ध क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी बयान दिया है कि भारत को पाकिस्तान से मैच नहीं खेलना चाहिए. वहीं, सुप्रीम कोर्ट में चार कानून के छात्रों द्वारा दायर याचिका पर अदालत ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है, जिससे यह बहस और गहरी हो गई है.
समस्तीपुर के युवाओं की प्रतिक्रिया: खेल से बड़ा है देश का सम्मान
इन तमाम घटनाओं के बीच लोकल 18 की टीम ने बिहार के समस्तीपुर जिले के पटोरी शहर में युवाओं की राय जानने के लिए खेल मैदान का रुख किया. यहां क्रिकेट में रुचि रखने वाले खिलाड़ियों से बातचीत की गई. सबसे पहले मुलाकात हुई मिथिलेश कुमार से, जो मूल रूप से वैशाली जिले के निवासी हैं. मिथिलेश ने साफ शब्दों में कहा कि जो देश हमारे नागरिकों और पर्यटकों पर हमला करता है, उसके साथ किसी भी तरह का संबंध रखना सही नहीं है. उन्होंने कहा, भले ही आतंकवादी हमला करते हैं, लेकिन पाकिस्तानी खिलाड़ी भी उसी देश से हैं, जिस देश में आतंकवाद पनपता है. हमें उनके साथ हर स्तर पर बॉयकॉट करना चाहिए, चाहे वह खेल हो या व्यापार.
पाकिस्तान से दूरी ही सही नीति है
दूसरे युवा खिलाड़ी कुंदन कुमार जो पिछले 12 से 15 वर्षों से खेल जगत में सक्रिय हैं, उन्होंने भी पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच को अनुचित ठहराया. कुंदन ने कहा, हरभजन सिंह ने जो कहा है, वह बिलकुल सही है. जब हमारे देश के सैनिक जान की बाजी लगाते हैं, तो हम उन लोगों के साथ कैसे खेल सकते हैं जिनके देश से आतंकवाद फैलता है? उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ सिंधु जल विवाद और ऑपरेशन सिंदूर जैसे कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि जब सरकार इतनी सख्ती दिखा रही है, तो खेल संगठनों को भी उसी नीति पर चलना चाहिए. उन्होंने बीसीसीआई से इस पर सख्त रुख अपनाने की अपील की और कहा कि देश पहले है, क्रिकेट बाद में.
राष्ट्रीय भावना के आगे खेल नहीं
युवाओं की बातों से यह स्पष्ट होता है कि उनके लिए देश की सुरक्षा और सम्मान सबसे ऊपर है. भले ही क्रिकेट को जेंटलमेन गेम कहा जाता हो, लेकिन जब बात देश की गरिमा की हो, तो खेल भावना को कुछ समय के लिए किनारे रखा जा सकता है. समस्तीपुर के युवाओं ने एक स्वर में यह राय दी कि ऐसे समय में जब हमारे सैनिक शहीद हो रहे हैं, तब पाकिस्तान जैसे देश से खेल संबंध रखना हमारे शहीदों के बलिदान का अपमान है. भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध सिर्फ खेल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे की राजनीतिक और भावनात्मक जटिलताएं भी महत्वपूर्ण हैं.
