17 फरवरी, 2026 को भारत और फ्रांस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ (Special Global Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत करने का निर्णय लिया।
- भारत और फ्रांस ने अपने रणनीतिक और रक्षा संबंधों को नई दिशा देने का फैसला किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने रक्षा, उन्नत तकनीक, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई.इस अवसर पर रक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्वास्थ्य और आर्थिक सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में 21 समझौतों एवं सहमतियों की घोषणा की गई।
प्रमुख बिंदु ; भारत–फ्रांस विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी
- रक्षा संबंधों में गहराई: उन्नत साझेदारी में रक्षा सहयोग केंद्रीय स्तंभ के रूप में उभरा। बेंगलुरु में आयोजित छठे भारत–फ्रांस वार्षिक रक्षा संवाद के दौरान दोनों देशों ने रक्षा सहयोग समझौते को अगले 10 वर्षों के लिए नवीनीकृत किया।
- द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार: यह उन्नयन वर्ष 1998 में आरंभ हुई भारत–फ्रांस रणनीतिक साझेदारी और 2023 में अपनाए गए ‘होराइजन 2047 रोडमैप’ पर आधारित है।
- विदेश मंत्रियों का व्यापक वार्षिक संवाद: दोनों पक्षों ने उन्नत ढांचे के अंतर्गत प्रगति की समीक्षा, आर्थिक सुरक्षा, वैश्विक मुद्दों और जन-से-जन संबंधों के समन्वय हेतु विदेश मंत्रियों के वार्षिक व्यापक संवाद की स्थापना पर सहमति जताई।
- नवाचार सहयोग पहल: ‘भारत–फ्रांस नवाचार वर्ष’ प्रारंभ करने तथा अनुसंधान, स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी पारितंत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए ‘भारत–फ्रांस नवाचार नेटवर्क’ स्थापित करने का निर्णय लिया गया।
- रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग: कर्नाटक के वेमगल में एयरबस H125 हेलीकॉप्टर की अंतिम असेंबली लाइन का वर्चुअल उद्घाटन इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण रहा।
- सैन्य सहभागिता का विस्तार: भारतीय थल सेना और फ्रांसीसी थल सेना के प्रतिष्ठानों के बीच अधिकारियों की पारस्परिक तैनाती पर सहमति बनी, जिससे परिचालन सहयोग और अधिक मजबूत होगा।
- उन्नत प्रौद्योगिकी सहयोग: एक संयुक्त उन्नत प्रौद्योगिकी विकास समूह गठित किया जाएगा। साथ ही, महत्त्वपूर्ण खनिजों और धातुओं पर सहयोग हेतु संयुक्त आशय घोषणा जारी की गई।
- वैज्ञानिक एवं अनुसंधान साझेदारी: उन्नत सामग्री, डिजिटल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा मेटाबोलिक स्वास्थ्य विज्ञान के केंद्र स्थापित करने के लिए आशय पत्रों का आदान-प्रदान हुआ। इसके अतिरिक्त, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और CNRS के बीच वैज्ञानिक सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
- स्टार्टअप एवं नवाचार पारितंत्र: टी-हब और नॉर्ड फ़्रांस के बीच आशय पत्र पर हस्ताक्षर कर स्टार्टअप, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों में रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।
- कर एवं आर्थिक सहयोग: दोनों देशों ने दोहरे कराधान परिहार समझौते के प्रोटोकॉल में संशोधन करने पर सहमति व्यक्त की, जिससे आर्थिक सहभागिता और वित्तीय सहयोग को प्रोत्साहन मिलेगा।
ज्वॉइंट स्टेटमेंट में क्या कहा गया
ज्वॉइंट स्टेटमेंट के मुताबिक, साल 2024 में तय डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप के तहत भारत और फ्रांस उन्नत रक्षा प्लेटफॉर्म के संयुक्त अनुसंधान, सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन को तेज करेंगे. इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना और आधुनिक सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना है. रक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की Defence Research and Development Organisation और फ्रांस की Direction générale de l’armement के बीच नवंबर 2025 में हुए तकनीकी समझौते को अहम बताया गया. इससे दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक सहयोग को संस्थागत आधार मिलेगा.
राफेल खरीद एक बड़ी उपलब्धि
एयरोस्पेस और रक्षा सौदों की बात करें तो 26 Rafale-M लड़ाकू विमानों की खरीद को बड़ी उपलब्धि माना गया. इसके साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत हेलीकॉप्टर और जेट इंजन तकनीक में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया. फ्रांसीसी कंपनी Safran और भारत की Hindustan Aeronautics Limited के बीच इंडियन मल्टी रोल हेलीकॉप्टर परियोजना में जारी सहयोग की भी सराहना की गई. भारत में LEAP और M-88 इंजनों के लिए MRO सुविधाओं की स्थापना, Bharat Electronics Limited के साथ HAMMER मिसाइल प्रोडक्शन और TATA Advanced Systems, Airbus द्वारा H125 हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन को ‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी सफलता बताया गया.
रक्षा अंतरिक्ष सहयोग को मजबूत करने का फैसला
नौसैनिक सहयोग में ‘मेड इन इंडिया’ स्कॉर्पीन-क्लास पनडुब्बी परियोजना की सफलता को हाईलाइट किया गया. इसके अलावा 2025 में हुए वरुण, शक्ति और गरुड़ सैन्य अभ्यासों को सफल बताते हुए 2026 में सहयोग और बढ़ाने पर सहमति बनी. अंतरिक्ष क्षेत्र में Indian Space Research Organisation (ISRO) और National Centre for Space Studies (NASA) के बीच रक्षा अंतरिक्ष सहयोग को मजबूत करने का फैसला लिया गया. आतंकवाद और साइबर सुरक्षा पर भी दोनों देशों ने Financial Action Task Force के मानकों के अनुसार सख्त रुख अपनाने की बात दोहराई.
