मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शनिवार को राज्य का वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। यह उनका लगातार चौथा बजट है। हिमाचल का वर्ष 2026-27 का बजट 54298 करोड़ रुपये होगा। ये बजट वर्ष 2025-26 की तुलना में 3586 करोड़ रुपये कम होगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि आरडीजी बंद होने के कारण बजट का आकर बीते साल की तुलना में कम हुआ है।मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को और सशक्त बनाने के लिए गाय के दूध का खरीद मूल्य 51 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये और भैंस के दूध का खरीद मूल्य 61 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक रूप से उगाई गई गेहूं का समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़कर 80 रुपये प्रति किलो करने, मक्का का समर्थन मूल्य 40 रुपये से बढ़कर 50 रुपये, पांगी के जौ का समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़कर 80 करने और हल्दी का समर्थन मूल्य 90 से बढ़कर 150 रुपये प्रति किलो करने की घोषणा की। उन्होंने अदरक को भी समर्थन मूल्य के तहत लाने और 30 प्रति किलो के हिसाब से खरीदने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने हिमाचल में एक लाख परिवारों को मुख्यमंत्री अपना सुखी परिवार योजना के तहत लाने की घोषणा की। उन्होंने इन परिवारों को 300 यूनिट फ्री बिजली देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने इन परिवारों की महिलाओं को तीसरे चरण में 1500-1500 रुपये प्रति माह देने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने उन चुनावी गारंटियों पर भी काम शुरू करने की घोषणा की जिन पर अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है।
मुख्यमंत्री ने हिमाचल में चौबीसों घंटे दुकानें कानूनी तौर पर खुली रखने की इजाजत देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस फैसले से हिमाचल घूमने आने वाले पर्यटकों को सुविधा होगी और लोगों की आर्थिकी भी मजबूत होगी। सुक्खू ने प्रदेश में अगले वित्त वर्ष में 150 और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को सीबीएससी से सम्बद्ध करने की घोषणा की। इन सभी स्कूलों के लिए शिक्षकों का अलग से डेडिकेटेड कैडर बनाया जाएगा। इसी के साथ प्रदेश में सीबीएसई पाठ्यक्रम वाले स्कूलों की संख्या बढ़कर 250 हो जाएगी।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग के 300 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में भी सीबीएसई के समकक्ष सुविधाएं उपलब्ध कराने की घोषणा की।मुख्यमंत्री ने राज्य में महिलाओं को 80 लाख से एक करोड़ रुपये तक कि संपत्ति खरीदने पर केवल 4 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी लगाने की घोषणा की। पहले 80 लाख से अधिक की संपत्ति खरीदने पर महिलाओं को 8 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी देनी पड़ती थी।इससे पहले, बजट भाषण के आरंभ में ही मुख्यमंत्री ने आरडीजी का जिक्र किया और कहा कि विपक्ष ने आरडीजी बहाली के लिए सरकार का साथ नहीं दिया। विपक्ष ने मुख्यमंत्री के शब्द पर आपत्ति जताई और पूरा विपक्ष पहले अपनी सीट पर खड़ा होकर शोरगुल करने लगा तथा बाद में पूरा विपक्ष सदन के बीचोंबीच नारे लगाते हुए पहुंच गया। इसके बाद हुए भारी हंगामे के कारण मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह को अपना बजट भाषण बीच में ही रोकना पड़ा। विधानसभा अध्यक्ष ने इस दौरान विपक्ष से अपनी सीटों पर जाने को कहा, लेकिन जब विपक्ष हंगामे पर अड़ा रहा तो विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी।
विधानसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद पूरा विपक्ष सदन से बाहर चला गया लेकिन इसी बीच विधानसभा अध्यक्ष ने फिर सदन की कार्यवाही फिर से शुरू कर दी। इस पर विपक्ष भी फिर से सदन में लौट आया और विधानसभा अध्यक्ष के फैसले का विरोध करने लगा। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि वह अपने फैसले को रिव्यू कर सकते हैं, लेकिन जब विपक्ष नहीं माना तो उन्होंने मुख्यमंत्री को बजट भाषण फिर से शुरू करने को कहा। इस पर मुख्यमंत्री ने सदन के भारी हंगामे के बीच ही बजट भाषण शुरू कर दिया। बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था दी की मुख्यमंत्री द्वारा बजट भाषण में कहे गए आपत्तिजनक शब्द को कार्यवाही से निकाल दिया गया है। इसके बाद हंगामा शांत हुआ और मुख्यमंत्री ने अपना बजट भाषण फिर से पढ़ना शुरू किया।
