दिल्ली-एनसीआर में सोमवार को जहरीले स्मॉग की परत छाई रही। एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (AQI) ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार दिल्ली के 40 में से 27 निगरानी केंद्रों पर हवा ‘सीवियर’ कैटेगरी में दर्ज की गई। वजीरपुर में AQI 500 तक पहुंच गया, जो अधिकतम सीमा है। सीपीसीबी के मुताबिक 500 से ऊपर AQI दर्ज नहीं किया जाता।घनी धुंध के कारण दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर फ्लाइट ऑपरेशन प्रभावित रहा। सोमवार को दिल्ली एयरपोर्ट से कई एयरलाइंस ने 228 फ्लाइट्स कैंसिल कर दीं और 5 को दूसरे एयरपोर्ट पर डायवर्ट कर दिया। 250 देरी से चलीं।भारत आए अर्जेंटीना के फुटबॉलर लियोनल मेसी खराब मौसम के चलते पीएम नरेंद्र मोदी से नहीं मिल सके। मेसी की मुंबई से दिल्ली आने वाली चार्टर्ड फ्लाइट ने कोहरे की वजह से देरी से उड़ान भरी। वहीं, पीएम एक घंटे की देरी से तीन देशों की यात्रा पर रवाना हुए। मेसी की पीएम मोदी से सुबह के वक्त मुलाकात तय थी।इस बीच, प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने स्कूलों में कक्षा पांचवीं तक क्लासेस केवल ऑनलाइन लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने वकीलों और पक्षकारों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हाइब्रिड मोड के जरिए पेश होने की सलाह दी है। सुप्रीम कोर्ट दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण से जुड़ी याचिका पर 17 दिसंबर को सुनवाई करेगा।
प्रदूषण का असर जानवरों पर : वायु प्रदूषण का असर इंसानों ही नहीं पालतू जानवरों व पक्षियों पर भी दिख रहा है। पशु चिकित्सकों के अनुसार, सांस की तकलीफ, आंखों में जलन, संक्रमण और पेट से जुड़ी बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं। डॉक्टरों ने बताया, पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण जानवरों के फेफड़ों से खून में चले जाते हैं। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है।हाउस ऑफ स्ट्रे एनिमल्स एनजीओ के संस्थापक और पशु चिकित्सक डॉ. संजय मोहपात्रा के मुताबिक, पिछले डेढ़ महीने में 55 से 60 कुत्तों-बिल्लियों में फेफड़ों की गंभीर समस्या सामने आई है। इनमें खांसी, बुखार, आंख-नाक से स्राव और कुछ में निमोनिया तक की स्थिति देखी गई।
दिल्ली-एनसीआर में 82% लोगों के करीबी प्रदूषण से गंभीर बीमार दिल्ली-एनसीआर की जहरीली हवा अब लोगों की सेहत पर सीधा असर डाल रही है। लोकलसर्कल्स के ताजा सर्वे में सामने आया है कि 82% लोगों के करीबी सर्कल में कोई न कोई व्यक्ति गंभीर बीमारी से जूझ रहा है, जो वायु प्रदूषण की वजह से हुई है। 28% लोगों ने बताया कि उनके चार या उससे ज्यादा जानने वालों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं।
ग्रैप-4 के बाद भी सख्ती के उपाय बेअसर सीएक्यूएम ने शनिवार को पहले ग्रैप-3 और फिर ग्रैप-4 लागू किया, लेकिन हालात नहीं सुधरे। ग्रैप-4 में 50% कर्मचारियों का वर्क फ्रॉम होम, बीएस-4 बड़े व्यावसायिक वाहनों की एंट्री पर रोक, निर्माण कार्य बंद, स्कूल हाइब्रिड मोड में, कचरा/ईंधन जलाने पर प्रतिबंध, डीजल जेनरेटर, आरएमसी प्लांट, स्टोन क्रशर, ईंट भट्ठे और खनन पर रोक शामिल है। कच्ची सड़कों पर निर्माण सामग्री के परिवहन पर भी प्रतिबंध है।
दिल्ली की हवा 6 दिन तक गंभीर रहने की संभावना
एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम (AQEWS) के अनुसार, अगले छह दिनों के लिए भी पूर्वानुमान है कि हवा बहुत खराब कैटेगरी में रहने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा कि मौजूदा औसत हवा की गति, जो 10 किमी प्रति घंटे से कम है, प्रदूषकों के फैलाव के लिए अनुकूल नहीं है।रविवार को वजीरपुर में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन ने दिन के समय अधिकतम संभव एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) वैल्यू 500 दर्ज की गई। यह आंकड़ा इससे भी ज्यादा बताया जा रहा है, हालांकि सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) का स्टेशन इससे ज्यादा डेटा रजिस्टर नहीं करता।
17 दिसंबर को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ते वायु प्रदूषण के स्तर से संबंधित याचिका पर 17 दिसंबर को सुनवाई करेगा। कोर्ट सलाहकार और अन्य ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद प्रदूषण के दौरान खेल गतिविधियों को आयोजित करने के तरीके खोज लिए हैं।अब बच्चे भी इससे नहीं बचे हैं। जिन गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध लगाया है, वही गतिविधियां हो रही हैं। CAQM ने भी खेल गतिविधियों पर रोक लगाने संबंधी एक अधिसूचना जारी की है। जिसमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के बाहर खेलने पर रोक लगाई है। लेकिन इसके बावजूद आदेशों को दरकिनार करने के तरीके निकाल लिए गए हैं।कोर्ट ने कहा कि अगर समस्या है, तो व्यावहारिक समाधान क्या है और किस तरह के निर्देश दिए जा सकते हैं। हमें केवल वही निर्देश जारी करने चाहिए। अन्यथा, यह कहा जा सकता है कि अगर हम आदेश पारित करते हैं, तो या तो उनका पालन संभव नहीं है या लोग उसकी संवेदनशीलता को नहीं समझते। लोगों को उन परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालना होगा। उन्हें अपनी जीवनशैली में बदलाव करना होगा।बड़े शहरों में लोगों की अपनी जीवनशैली होती है, जिसे बदलना कठिन होता है। चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि गरीब लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव को भी देखना होगा। एमिकस (कोर्ट सलाहकार) अपराजिता सिंह ने कोर्ट को बताया कि GRAP-IV उपायों के लागू होने के बाद कंस्ट्रक्शन वर्कर्स के पास अब काम नहीं बचा है।मामले की सुनवाई एम.सी. मेहता मामले में हो रही है, जो दिल्ली और एनसीआर से संबंधित प्रदूषण से संबंधित मामला है। मामले में आवेदन दायर करने वाले अन्य वकीलों से सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे अपने मुद्दे और सुझाव एमिकस (कोर्ट सलाहकार) के समक्ष रखें।
