देशभर में आज 12 फरवरी 2026 को भारत बंद बुलाया गया . इस भारत बंद का आह्वान कई केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने किया . बंद का उद्देश्य केंद्र सरकार की नीतियों, नए श्रम कानूनों, महंगाई, बेरोजगारी और किसानों से जुड़े मुद्दों के खिलाफ विरोध जताना है. भारत बंद का ऐलान और आज होने वाली हड़ताल दस सेंट्रल ट्रेड यूनियनों के ज्वॉइंट प्लेटफॉर्म ने बुलाई है, जिसमें AITUC, INTUC, CITU, HMS, TUCC, SEWA, AIUTUC, AICCTU, LPF, और UTUC शामिल हैं. इसका समर्थन संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), कृषि मजदूर संगठन, छात्र और युवा संगठन भी कर रहे हैं. ट्रेड यूनियनों का कहना है कि सरकार की नीतियों से मजदूरों और कर्मचारियों के अधिकार कमजोर हो रहे हैं. महंगाई लगातार बढ़ रही है, जबकि मजदूरी और नौकरियों में बढ़ोतरी नहीं हो रही. किसान संगठन भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी और कर्ज माफी की मांग कर रहे हैं. इन्हीं मांगों को लेकर आज देशव्यापी बंद किया गया है.किसान संगठनों और 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने गुरुवार को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल और ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। इस बंद को कई विपक्षी दलों ने भी अपना समर्थन दिया है। हालांकि बंद का मिला-जुला असर दिखाई दे रहा है।ट्रेड यूनियनों का दावा है कि उनकी चिंताओं को लगातार नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने पिछले साल श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया को 17 सूत्रीय मांगों का एक चार्टर सौंपा था, लेकिन उनका कहना है कि इस पर कोई गंभीर प्रतिक्रिया नहीं हुई है। यूनियन फोरम ने कहा कि सरकार ने देश की कल्याणकारी राज्य की स्थिति को त्याग दिया है। यह विदेशी और भारतीय कंपनियों के हित में काम कर रही है। यह उन नीतियों से स्पष्ट है जिनका सख्ती से पालन किया जा रहा है।
लेबर लॉ के खिलाफ केंद्रीय श्रमिक संगठनों की हड़ताल
हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे
ट्रेड यूनियनों और किसान यूनियनों ने आज देशभर में हड़ताल बुलाई
बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल तक भारत बंद का असर
कोलकाता में वामपंथी दलों के यूनियन ने पैदल मार्च निकालकर भारत बंद में भाग लिया
दिल्ली के झिलमिल इंडस्ट्रियल एरिया में ट्रेड यूनियनों का प्रदर्शन
गाजियाबाद के साहिबाबाद में लिंक रोड पर प्रदर्शन
केरल के कोझिकोड में भारत बंद का रहा असर
ओडिशा के भुवनेश्वर में बंद दिखे पेट्रोल पंप
पुडुचेरी में दुकानें बंद, निजी बस, ऑटो सड़कों से नदारद दिखे
दिल्ली से केरल तक दिखा भारत बंद का असर
जगह-जगह ट्रेड यूनियनों का प्रदर्शन
हिमाचल में भी विभिन्न संगठनों की हड़ताल और विरोध प्रदर्शन
बिलासपुर: जिला मुख्यालय पर मिड डे मील वर्कर्स का धरना
सोलन: एटक के बैनर तले ट्रेड यूनियनों ने निकाली विरोध रैली
ऊना: मनरेगा कर्मचारी यूनियन की केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी
कुल्लू: 108 और 102 कर्मी हड़ताल पर, एंबुलेंस के थमे पहिये
कुल्लू में सड़कों पर उतरे ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता
बिजली बोर्ड कर्मचारी और पेंशनरों ने किया प्रदर्शन
ऊना: न्यूनतम वेतन की मांग को गरजे 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारी
सिरमौर: नाहन में सीटू के आह्वान पर सड़कों पर उतरे कर्मी
मंडी: केंद्र के 4 श्रम कोड के खिलाफ सड़कों पर उतरे मजदूर और किसान संगठन
रामपुर में केंद्रीय ट्रेड यूनियन ने खोला मोर्चा

पंजाब में भारत-अमेरिका की ट्रेड डील के खिलाफ हड़ताल
पंजाब में भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील के खिलाफ ट्रेड यूनियन, किसान संगठन और कर्मचारी संगठन आज हड़ताल पर हैं। कई जिलों में इसका मिलाजुला असर देखने मिल रहा है।कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी हड़ताल पर हैं, लेकिन रेगुलर कर्मचारी सेवाएं मुहैया करवा रहे हैं। सरकारी विभागों में कामकाज जरूर प्रभावित हो रहा है, लेकिन बिल्कुल बंद नहीं है।
हड़ताल के समर्थन में असैन्य रक्षा कर्मचारियों ने एक घंटे देरी से काम शुरू किया.
भारत बंद लाइव अपडेट: मध्य प्रदेश में रक्षा प्रतिष्ठानों में काम करने वाले 25,000 से अधिक असैन्य कर्मचारियों ने राष्ट्रव्यापी श्रमिक संगठनों की हड़ताल के समर्थन में बृहस्पतिवार को एक घंटे देर से काम किया. अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी संघ (एआईडीईएफ) ने यह जानकारी दी. इन संगठनों ने केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी कॉरपोरेट नीतियों के विरोध में दिन भर की हड़ताल का आयोजन किया है.एआईडीईएफ के अध्यक्ष एस एन पाठक ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि राज्य में छह आयुध कारखानों में तैनात 25,000 से अधिक असैन्य कामगार विरोध प्रदर्शन के तौर पर एक घंटे देरी से ड्यूटी पर पहुंचे. उन्होंने कहा, ‘हम पूरी तरह से दिन भर की हड़ताल नहीं कर सके क्योंकि रक्षा उत्पादन और संबंधित कार्य आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में आते हैं.’ पाठक ने कहा कि श्रमिकों को सुबह आठ बजे अपनी ड्यूटी आरंभ करनी थी लेकिन इसके बजाय उन्होंने सुबह नौ बजे काम शुरू किया.
भारत बंद को सपा ने दिया समर्थन
भारत बंद लाइव: समाजवादी पार्टी ने ट्रेड यूनियन्स के भारत बंद का समर्थन किया है. सपा सांसद राम गोपाल यादव ने नए लेबर कोड और VB-G-RAM G एक्ट के खिलाफ ट्रेड यूनियनों ने देशव्यापी आम हड़ताल के आह्वान पर कहा, ‘बंधुआ मजदूर बनाने के लिए ये सारे बिल लाए जाए रहे हैं ये लोगों के खिलाफ, लोगों के हितों के खिलाफ,आम लोगों के आवाज को दबाने का काम ये सरकार रोजाना कर रही हैं.’
मैं मजदूरों और किसानों के साथ मजबूती से खड़ा हूं- राहुल
राहुल गांधी ने आगे कहा कि मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा हूं। वहीं संसद परिसर में भी विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शन किया। गुरुवार सुबह 11 बजे सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी सांसद मकर द्वार पर प्रदर्शन के लिए उतरे। उन्होंने इंडो-यूएस ट्रेड डील की शर्तों के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने किसान संगठनों के ऑल इंडिया बंद के समर्थन में एकजुटता जताई जाएगी।कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस संबंध में एक्स पर पोस्ट लिखा है। चार श्रम संहिताओं का हवाला देते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मजदूरों और किसानों के भविष्य को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मजदूरों और किसानों की सुनेंगे या उन पर किसी ‘ग्रिप’ की पकड़ बहुत मजबूत है? राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि आज देश भर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक की आवाज बुलंद करने के लिए सड़कों पर हैं। मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएं उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी। उनके मुताबिक, किसानों को आशंका है कि (अमेरिका के साथ किया गया) व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा।
भारत बंद को के कविता ने दिया समर्थन
तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष और भारत राष्ट्र समिति (BRS) की एमएलसी के. कविता ने कहा कि कई केंद्रीय (श्रमिक) यूनियनों ने यह बंद बुलाया है। उन्होंने आगे कहा कि तेलंगाना जागृति उनका पूरा समर्थन करती है। पिछले 11 सालों में, नरेंद्र मोदी सरकार ने श्रम सुरक्षा को खत्म करने के उद्देश्य से कई कानून और पिछले दरवाजे से संशोधन पेश किए हैं और अब, केवल कुछ ही श्रम कानून लागू रह गए हैं।
भारत बंद का आह्वान क्यों किया गया है?
इस हड़ताल का आह्वान कई कारणों से किया गया है, जिनमें नई श्रम संहिताएं और भारत-अमेरिका व्यापार समझौता शामिल हैं, जिनकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है.
बंद को इन ट्रेड यूनियनों का समर्थन
इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC)
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC)
हिंद मजदूर सभा (HMS)
सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU)
ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (AIUTUC)
ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर (TUCC)
सेल्फ एम्प्लॉयड वीमेंस एसोसिएशन (SEWA)
ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (AICCTU)
लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (LPF)
यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (UTUC)
भारत बंद के और क्या कारण
- सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के निजीकरण और सरकारी नौकरियों में कटौती का विरोध.
- वेतन में बढ़ोतरी न होना, श्रमिकों के लिए पर्याप्त सामाजिक सुरक्षा और संरक्षण की कमी.
- रोजगार गारंटी को मजबूत करने की मांग, जिसमें मनरेगा जैसी ग्रामीण रोजगार योजनाओं को बहाल या मजबूत करना शामिल है.
- अन्य ऐसे विधेयकों को वापस लेने की मांग, जिन्हें श्रमिकों और ग्रामीण समुदायों के लिए प्रतिकूल माना जा रहा है (जैसे ड्राफ्ट सीड बिल, बिजली संशोधन विधेयक, VB-G RAM G एक्ट).
प्रदर्शनकारियों की मांगें
- प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल किए हैं:
- चारों श्रम संहिताओं और संबंधित नियमों को वापस लिया जाए.
- उन प्रस्तावित विधेयकों को वापस लिया जाए, जिन्हें श्रमिकों और किसानों के अधिकारों के खिलाफ माना जा रहा है.
- ग्रामीण रोजगार योजनाओं के तहत मजबूत रोजगार गारंटी बहाल की जाए.
- सस्ते आयात के खिलाफ कृषि उत्पादकों की सुरक्षा और न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दी जाए (जैसा कि किसान संगठनों ने मांग की है).
