अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत हो सकती है। लेकिन शांति वार्ता से पहले जो शर्तें रखी गई हैं उन्हें देखने से यही पता चलता है कि शायद इन शर्तों को मानना अमेरिका के लिए नामुमकिन होगा। अमेरिकी शर्तें भी ऐसी ही हैं जो शायद ही तेहरान को कबूल हो। इसीलिए डोनाल्ड ट्रंप जो युद्ध से हर हाल में भागना चाह रहे हैं क्या वो तेहरान की इन शर्तों को मानेंगे ये बड़ा सवाल है। अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस शांति वार्ता पर बात करने पाकिस्तान जा रहे हैं और उससे पहले ईरान ने अपनी शर्तें बता दी हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि ईरान के साथ ‘अच्छी बातचीत’ चल रही है। हालांकि पहले तेहरान ने उनके दावों का मजाक उड़ाया था लेकिन बाद में उसने स्वीकार किया है कि उसे ‘कुछ मित्र देशों’ से संदेश मिले हैं जिनमें ‘युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत की अमेरिकी गुजारिश’ का जिक्र है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक जिसमें सूत्रों का हवाला दिया गया है, ईरान के रुख का मूल संदेश यह है कि सिर्फ युद्ध खत्म करना ही काफी नहीं होगा। यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो उसकी मुख्य मांगों में कई मांगे ऐसी हैं जिसपर शायद ही सहमति बन सकती है।अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस इस वार्ता में शामिल होने के लिए पाकिस्तान जा रहे हैं। ईरान के अधिकारी भी इस्लामाबाद पहुंचने वाले हैं। लेकिन युद्धविराम की शर्तें ऐसी हैं जिनपर सहमति बनना अत्यंत मुश्किल या नामुमकिन की तरह है। ऐसा लग रहा है कि ईरान ने जो शर्तें रखी हैं वो युद्ध से भागने की कोशिश करने वाले डोनाल्ड ट्रंप का पैर बांधने जैसा है। भारत के जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट सुशांत शरीन भी इसी बात को उठा रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है कि अमेरिकी 3 बुनियादी मुद्दों पर समझौता करने के लिए तैयार हैं। 1- ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ दे और एनरिच्ड यूरेनियम सौंप दे। 2- ईरान अपने मिसाइल कार्यक्रम को सीमित करने पर सहमत हो और 3- ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दे। लेकिन सच तो यह है कि ईरान पहले से ही अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को खत्म करने के लिए बातचीत कर रहा था और उम्मीदों से कहीं ज्यादा आगे बढ़ रहा था। युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही खुला हुआ था। मिसाइल कार्यक्रम एक मुद्दा था लेकिन ईरान अपनी रक्षा के लिए अपनी सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु क्षमता को छोड़ने पर क्यों सहमत होगा? तो फिर ट्रंप को ऐसा क्या मिला जो युद्ध शुरू करते समय उनके पास पहले से नहीं था?
ईरान में हमलों का असर…
अब तक करीब 1,500 लोगों की मौत, 18,551 घायल।
मरने वालों में 8 महीने के बच्चे से लेकर 88 साल तक के बुजुर्ग।
जंग में अब तक करीब 200 महिलाओं की मौत हुई।
28 फरवरी को स्कूल पर हमले में 168 बच्चों की मौत हुई।
जंग में 55 हेल्थ वर्कर्स घायल, जिनमें 11 की मौत।
ईरान ने युद्धविराम के लिए अमेरिका के सामने प्रमुख मांगे क्या रखी हैं
अमेरिकी सेना की वापसी- ईरान ने मांग की है कि फारसी खाड़ी और पश्चिम एशिया में सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद किया जाए।
होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण- ईरान ने मांग रखी है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी व्यापारिक जहाजों से शुल्क वसूलने का अधिकार उसे मिले। ठीक वैसे ही जैसे स्वेज नहर में होता है।
आर्थिक मुआवजा- युद्ध के दौरान अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान को जो भी नुकसान हुआ है उसकी भरपाई अमेरिका और इजरायल करे।
प्रतिबंध खत्म हों- ईरान ने मांग की है कि उसके ऊपर लगाए गये सभी प्रतिबंध हटाए जाएं।
सुरक्षा की गारंटी- भविष्य में ईरान के खिलाफ कोई भी युद्ध थोपा नहीं जाए।
मिसाइल पर नियम नहीं- ईरान ने कहा है कि वो बगैर किसी बातचीत के अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों का निर्माण जारी रखेगा और ईरानी मिसाइलों के लिए कोई रेंज नहीं होगी।
हिज्बुल्लाह की रक्षा- ईरान ने मांग की है कि लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ होने वाले इजरायली हमलों को रोका जाए।
ईरान की शर्तें मानना अमेरिका के लिए असंभव की तरह क्यों है
सैन्य वापसी- ईरान की शर्त है कि अमेरिका मध्य पूर्व से अपने सभी सैन्य बेस हटा ले। अमेरिका के लिए ऐसा करना इस क्षेत्र में अपने प्रभाव को पूरी तरह खत्म करने और सऊदी अरब जैसे सहयोगियों को असुरक्षित छोड़ने जैसा होगा। अमेरिका किसी भी हाल में इस शर्त को नहीं मानेगा।
होर्मुज स्ट्रेट पर टैक्स- दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल का व्यापार इसी रास्ते से होता है। अगर ईरान यहां टैक्स वसूलने लगा तो वैश्विक तेल की कीमतें पूरी तरह ईरान के नियंत्रण में आ जाएंगी और इसे अमेरिका और पश्चिमी देश कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
प्रॉक्सी संगठन- इजरायल हिज्बुल्लाह जैसे ईरान के प्रॉक्सी संगठनों का खात्मा चाहता है और ईरान की शर्त में हिज्बुल्लाह को बचाना शामिल है। ये शर्त भी अमेरिका-इजरायल को मंजूर नहीं होगा।
मिसाइल प्रोग्राम- अमेरिका और इजरायल अब ईरानी मिसाइलों की क्षमता को बहुत अच्छी तरह से जान चुके हैं। ईरान के लिए इस पर समझौता करना आत्मसमर्पण जैसा होगा। अमेरिका ईरान को उसकी बैलिस्टिक मिसाइलों को लेकर ‘आजादी’ नहीं दे सकता।
परमाणु क्षमता- सबसे बड़ा सवाल ईरान के परमाणु बम को लेकर है। क्या ईरान अपने परमाणु सपने को खत्म होने देगा। इजरायल किसी भी ऐसी संधि का विरोध कर रहा है जिसमें ईरान को यूरेनियम संवर्धन की थोड़ी भी छूट मिले। अमेरिका के लिए इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज करना लगभग असंभव है।
अमेरिका ने ईरान को युद्ध समाप्त करने के लिए 15-सूत्रीय शांति योजना भेजी
संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान को मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए एक विस्तृत 15-सूत्रीय शांति योजना भेजी है।न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से ईरान तक पहुंचाया गया, जहां पाकिस्तानी सेना प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। दो अज्ञात अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि ट्रंप प्रशासन युद्ध के आर्थिक प्रभावों से जूझते हुए जल्द से जल्द संघर्ष समाप्त करने का रास्ता निकालना चाहता है। योजना में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त प्रतिबंध, सभी यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों को समाप्त करना और संवर्धित यूरेनियम स्टॉक को सौंपने का प्रावधान शामिल है।एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिका और ईरान एक महीने के युद्धविराम की घोषणा कर सकते हैं, जिस दौरान इस 15-सूत्रीय योजना पर विस्तृत बातचीत होगी। योजना के प्रमुख बिंदु ये हो सकते हैं:
ईरानी धरती पर किसी भी प्रकार का यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करना और मौजूदा संवर्धित सामग्री को अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण में सौंपना।
होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना और निर्बाध समुद्री आवागमन सुनिश्चित करना, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग एक-पांचवां हिस्सा प्रभावित हो रहा है।
ईरान द्वारा क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को समर्थन बंद करना।
इसके बदले में ईरान पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाए जा सकते हैं।
ईरान को बुशहर जैसे स्थानों पर नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित करने में अंतरराष्ट्रीय सहायता प्रदान की जा सकती है।
ईरान ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य में आंशिक नाकाबंदी के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। योजना के तहत इस नाकाबंदी को हटाने के एवज में प्रतिबंधों में राहत का प्रावधान है।ट्रंप प्रशासन ने इन रिपोर्टों पर अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। व्हाइट हाउस और अमेरिकी विदेश विभाग दोनों ने चुप्पी साध रखी है। इजरायल की ओर से भी अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह विकास ऐसे समय में आया है जब युद्ध अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। ईरान ने अभी तक योजना पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, हालांकि कुछ सूत्रों का कहना है कि तेहरान कुछ मुद्दों पर लचीलापन दिखा सकता है।
ईरान की इन मांगों को मानना अमेरिका और इजरायल के लिए मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन की तरह है। जैसे आर्थिक मुआवजे को ही मान लें। हालांकि ईरान ने आधिकारिक तौर पर अभी तक कोई आंकड़ा नहीं रखा है लेकिन विभिन्न रिपोर्ट्स में कहा गया है कि मुआवजे की ये राशि 500 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकती है। इतना ज्यादा मुआवजा कौन देगा? इसके अलावा बैलिस्टिक मिसाइस की रेंज। ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के पीछे डोनाल्ड ट्रंप ने जिन कुछ वजहों के बारे में बताया था उनमें से एक उसकी बैलिस्टिक मिसाइल का खतरा भी था। यानि जिस वजह से अमेरिका ने युद्ध शुरू किया क्या उस वजह को ही युद्धविराम की शर्तों से हटाकर वो युद्ध खत्म करेगा?
