नई दिल्ली: लोकसभा में मंगलवार को एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा हो रही है. इस दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई करने के मामले में जवाबदेही की मांग की. उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से पूछना चाहती हूं कि क्या जरूरत थी कि एक मासूम बच्ची पर इस तरह दमन करने की? क्या जरूरत थी उन छात्रों पर आंसू गैस चलवाने की? उन पर लाठियां बरसाने की, उन पर वाटर कैनन चलवाने की? क्या जरूरत थी उन लड़कियों के कपड़े फाड़ने की? क्या जरूरत थी AK47 चलवाने की? क्या वे आतंकवादी थे? जवाब दीजिए. प्रियंका ने कहा, ‘कांग्रेस बोल रही है, जवाब मांग रही है, जवाब दीजिए. कौन जवाब देगा. गृहमंत्री जवाब देंगे. किसने ऑर्डर दिया पैलेट गन चलाने के लिए. मैं पूछती हूं किसने ऑर्डर दिया. प्रधानमंत्री ने दिया, गृह मंत्री ने दिया. जवाब देंगे. पूरा देश पूछ रहा है. देश के माता-पिता पूछ रहे हैं. छात्र पूछ रहे हैं. और आपकी जिम्मेदारी बनती है कि आप इसका जवाब दें. क्यों डरते हैं आप इस देश के नौजवानों से. इस देश की बुलंद आवाज से और उस आवाज दको दबाने का हक आपको किसने दिया है.’उन्होंने कहा कि ‘ये सदन यहां बैठे सांसदों की जागीर नहीं है. ये देश की अमानत है. देश की हर जनता के सेवक हैं. हम उनके प्रतिनिधि हैं और ये सत्ता उन्होंने ही दी है. इस देश का संविधान सिर आंखों पर. इस देश का लोकतंत्र सर्वोपरी है, उसे ध्वस्त करना पाप है. इस देश की जनता हमसे जवाबदेही मांगती है. हमें सत्ता देकर, उसकी सिर्फ गुहार है कि जो करें उसकी भलाई के लिए करें.’
छात्रों के प्रदर्शन पर क्या बोलीं प्रियंका?
संसद में प्रियंका गांधी ने बीते दिनों हुए छात्रों के प्रदर्शन पर भी बात रखी. उन्होंने कहा कि ‘पिछले दिनों हजारों बच्चे सड़क पर उतरे. अपनी पीड़ा व्यक्त की. गांधीजी के दिखाए रास्ते पर अहिंसा और सत्य को अपने दिल में रखते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया. उन्होंने अपनी आवाज उठाई. ये उस भारत के बच्चे हैं जो गांव में रहते हैं, महानगरों में रहते हैं, छोटे कस्बों में रहते हैं. जहां मां अपने गहने बेच देती है, पिता अपनी जमीन गिरवी रख देता है, एक परिवार अपनी पूरी जिंदगी की कमाई बच्चे के सपने पर खर्च देता है और अब उन्हीं बच्चों को लगने लगा है कि इस देश में मेहनत से ज्यादा बेईमानी मायने रखती है. तब सिर्फ एक छात्र नहीं हारता, उम्मीद हारती है.उन्होंने कहा, ‘परेशान बच्चों ने अपनी उम्मीदें आपसे साझा कीं. उनकी मांग थी कि जो सिस्टम उनके भविष्य को कुचल रहा हो, उसे सुधारा जाए. जो माफिया घेरे हुए है, उसे हटाया जाए. जिस मंत्री के कार्यकाल में ये हुआ, उससे इस्तीफा लें. बस यही उनकी मांग थी न कि जो शिक्षा और स्वतंत्र अभिव्यक्ति का अधिकार दिया है, उसे कायम रखा जाए.’
‘ हमारे एजुकेशन में RSS के प्रचारकों को भर-भरकर उसे खोखला बना दिया है. ‘
प्रियंका गांधी वाड्रा ने आगे कहा, ‘बच्चों पर जो प्रेशर डाला जाता है, उसकी वजह से सैकड़ों बच्चों ने आत्महत्या कर ली है. ज्यादा बच्चे डिप्रेशन में जूझ रहे हैं. परिवारों पर बच्चों को पढ़ाने लिखाने पर घिनौने दबाव हैं. लोन लेना पड़ता है, सामान बेचना पड़ता है और कोई गारंटी नहीं कि बच्चों के भविष्य मजबूत बन पाएंगे, क्योंकि बेरोजगारी चरम पर है. एग्जाम सिस्टम खुद फेल हो गया है. एक दशक में 152 पेपर लीक हुए हैं. लेकिन एक भी दोषी, एक भी माफिया को सजा नहीं मिली.’उन्होंने कहा, ‘हमारे एजुकेशन में RSS के प्रचारकों को भर-भरकर उसे खोखला बना दिया है. जबरदस्ती एनटीए बनवाकर सिस्टम का केंद्रीकरण करके उसे और भी उलझा दिया. एजुकेशन बजट की हिस्सेदारी घटती जा रही है. 1.4 लाख करोड़ का बजट है और 1.32 लाख करोड़ नीट देने वाले 22 लाख परिवारों से खींचा जाता है. एक और शर्मनाक आंकड़ा है. 1.4 लाख करोड़ का बजट और 16 लाख करोड़ के लोन माफ कर दिए. इस सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं. सच ये है कि जिस तरह अस्पताल में उस छात्रा की मां का विश्वास पूरे सिस्टम से हट गया है, उसी तरह युवाओं का भरोसा सिस्टम से टूट गया है.’सरकार पर हमला करते हुए प्रियंका ने कहा, ‘इतना हो जाने के बाद भी प्रधानमंत्री और उनके साथ इस सच्चाई को समझ नहीं पा रहे हैं. वे अभी भी ये सोच रहे हैं कि पीआर, नैरेटिव चेंज और पालतू मीडिया के सहारे नैया पार हो जाएगी. शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दिया और कल जिंदाबाद के नारे लगाए गए. उनका संसद में ऐसे स्वागत किया जैसे सुपरस्टार आ गए. जब मुकुट पहनाया जा रहा था, तब महाराष्ट्र में एक नीट पेपर लीक का पीड़ित शोक मना रहा था. आपको किस बात का अभिमान है? जहां आंखों में शर्म होना चाहिए, वहां बेशर्मी के नगाड़े बजा रहे हैं.’
प्रियंका की टिप्पणी पर हुआ बवाल
प्रियंका गांधी ने कहा कि आपकी सरकार ने करोड़ों छात्रों को क्या संदेश दिया. आपको किस बात का अभिमान है. ये कौनसा अहंकार है. जहां आंखों में शर्म होना चाहिए, वहां बेशर्मी और स्वागत के नगाड़े बजा रहे हैं. एक तरफ मातम है, दुख है और यहां आप फूलमाला डाल रहे हैं. कोई आप पर कैसे यकीन करे. प्रधानमंत्री जी ने नया शिक्षा मंत्री चुना. एक ऐसे व्यक्ति को पद पर आसीन किया, जिसने एक गर्भवती महिला के बलात्कारियों की रिहाई पर अपनी सहमति व्यक्ति की. देश की करोड़ों लड़कियों को इससे क्या संदेश दिया. प्रियंका की इस टिप्पणी के बाद संसद में जमकर हंगामा हो गया. किरेन रिजिजू ने कहा कि हम लोग शांति से सुन रहे हैं लेकिन वर्तमान शिक्षा मंत्री पर जो उन्होंने टिप्पणी की, वह एक तरह चरित्र हनन है और इस तरह की भाषा हम उम्मीद नहीं करते हैं. प्रियंका जी ने जो गलत बात कही है, उसको रिकॉर्ड से हटा दिया जाए और इस तरह की भाषा का इस्तेमाल न करें. आपने डिबेट से पहले आपने अपील की कि संसद में डिबेट के स्तर को नहीं गिराना चाहिए. पार्टी की सीनियर लीडर हैं, वो पहली बार चुनकर आई हैं, लेकिन वो सीनियर हैं और जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए. अगर ऑथेंटिक नहीं कर सकती हैं तो क्षमा मांगनी चाहिए सदन से. इसके बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि इस तरह की बातें सदन के पटल पर नहीं करनी चाहिए. काफी देर तक चले हंगामे के बाद प्रियंका गांधी का भाषण दोबारा शुरू हुआ.
पेपर लीक पर क्या बोलीं प्रियंका?
प्रियंका गांधी ने कहा कि आज हम सदन पटल पर एक ऐसी विधेयक में संशोधन पर डिबेट कर रहे हैं, जो 2024 में पास हो गया था. इसमें मुख्य संशोधन यही है कि इसमें सजा बढ़ाई जाएगी. मगर जब से ये बिल पास हुआ, तब से एक भी अपराधी को सजा नहीं दी. आपने देखा है कि कल और परसों से फेस रिकग्निशन से प्रदर्शन करने वाले बच्चों के नाम और पते सार्वजनिक किए जा रहे हैं, मगर यही काम पेपर लीक करने वालों के लिए नहीं किया गया है. न इस विधेयक में पेपर लीक रोकने के ठोस कदम हैं. इससे युवाओं का भरोसा कैसे बनेगा.उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री से कहना चाहती हूं कि उन्हें शायद अपने सलाहकार बदलने चाहिए. वे असलियत से टूट चुके हैं. नई कमेटियां बनाने से काम नहीं चलेगा. राधाकृष्ण कमेटी भी सुधार लाने के लिए बनी थी. आजतक उसकी एक सिफारिश लागू नहीं हुई है. इस नई कमेटी में तो एक एक्स आईबी चीफ, एक आईटी कंपनी के मालिक और एक गोमूत्र के विशेषज्ञ भी हैं. इन्हें शिक्षा के बारे में क्या पता जी? सर सच है. आप आज मेरे से नाराज हो रहे हैं. थोड़ा मुस्कुरा लीजिए.
प्रियंका ने सरकार को दी सलाह
प्रियंका गांधी ने कहा कि संसद में विपक्ष को दोषी ठहराने से, राजनीतिक खेल खेलने से काम नहीं चलेगा. आप जेन-जी का भरोसा जीतना चाहते हैं तो नए-नए एंगल से अपने फोन से वीडियो बनाने से नहीं होगा. प्रधानमंत्री जी को कैमरे का एंगल नहीं, दिल का एंगल बदलना पड़ेगा. ये जेनरेशन जागरूक है, समझता है, झूठ पहचानने की क्षमता है. इनका दिल-दिमाग जीतने के लिए आपको सच्चाई पर उतरना होगा. आपके शासन में नौजवान पीढ़ी के साथ घोर अन्याय हुआ है, अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने से काम नहीं चलेगा. उन्होंने कहा कि शिक्षा विशेषज्ञों को इकट्ठा कीजिए, छात्रों-अध्यापकों को साथ लेकर, अन्य विचारधाराओं के थॉट लीडर्स के साथ चर्चा करवाकर एक नई शिक्षा प्रणाली तैयार कीजिए. मौजूदा प्रणाली में 8 महीने तो एग्जाम चलते हैं. सिर्फ RSS के लोगों से भरने की बजाय, सिस्टम को शिक्षित, उन्नत और उदार दृष्टिकोण से भी भरिए, जिनकी योग्यता सिर्फ विचारधारा न हो. मेडिकल कॉलेज की संख्या बढ़ाइए. चिकित्सा शिक्षा का विस्तार कीजिए. ताकि ये बच्चे मेहनत करके-करके भी भविष्य नहीं बना पा रहे हैं, एक उज्जवल भविष्य का सपना देख पाएं.
‘छात्रों को सड़क से हटा सकते हैं लेकिन सवालों को नहीं’
प्रियंका गांधी ने कहा कि छात्रों को सड़क से हटाया जा सकता है लेकिन उनके सवालों को नहीं. हर लाठी जो चली है, वे बच्चों की पीठ से ज्यादा सरकार की साख पर पड़ी है. देश के नौजवान न्याय मांग रहे हैं, भीख नहीं. सरकार गिराने नहीं, अपना भरोसा बचाने आए थे. मैं सरकार से कहना चाहती हूं, अपनी साख बचाइए, नीयत ठीक कीजिए, अपनी अकड़ का इलाज कीजिए, अपने वादों पर अमल कीजिए.उन्होंने कहा कि बड़ी-बड़ी चोरियां देखी हैं. चुनाव में वोटों की चोरी, राम मंदिर में चंदा चोरी, संपत्ति की चोरी, किसानों की जमीन की चोरी लेकिन सबसे बड़ी चोरी तब हुई जब देश के नौजवानों के भविष्य, उनके सपने चुराए गए. भविष्य की चोरी, सपने की चोरी किसी भी चोरी से कहीं बड़ी होती है. अगर देश का युवा निराश हो गया, उसकी उम्मीद टूट गई तो सबसे बड़ी हार भारत की होगी. हम कांग्रेस और विपक्ष के लोग जान दे देंगे लेकिन भारत का हार नहीं होने देंगे.
