नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल गुरुवार शाम जंतर-मंतर पहुंचे और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन को खुलकर समर्थन दिया। उन्होंने पिछले 19 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को सलाम करते हुए उनकी सराहना की और केंद्र सरकार से युवाओं की आवाज सुनने की अपील की। इस दौरान केजरीवाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाए जाने का सुझाव भी दिया। केजरीवाल ने सरकार से कहा कि युवाओं, ‘कॉकरोच मूवमेंट’ और सोनम वांगचुक की बात सुनी जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘वरना तीन साल बाद आपका (केंद्र सरकार का) भी 2014 जैसा हाल होगा।’
मंच पर पहुंचते ही अरविंद केजरीवाल ने सबसे पहले CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके से मुलाकात की और उन्हें गले लगाया। इसके बाद वह सोनम वांगचुक के पास पहुंचे और कुछ देर उनसे बातचीत की। उनके साथ राज्यसभा सांसद संजय सिंह और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज भी मौजूद रहे। केजरीवाल ने कहा कि सोनम वांगचुक अपने लिए नहीं, बल्कि देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर अनशन कर रहे हैं।
‘युवाओं की आवाज सुनिए, नहीं तो होगा नुकसान’
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने केंद्र सरकार से आंदोलनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि युवाओं की आवाज को लगातार नजरअंदाज किया गया, तो इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है। उन्होंने सरकार से संवाद का रास्ता अपनाने और छात्रों से जुड़े मुद्दों का समाधान निकालने की बात कही।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, वांगचुक का नाम आगे किया
केजरीवाल ने NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का जिक्र करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि उनकी राय में सरकार को नया नेतृत्व देना चाहिए और सुझाव दिया कि सोनम वांगचुक को देश का केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाया जाए, क्योंकि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक काम किया है।
CJP आंदोलन को मिला बड़ा राजनीतिक समर्थन
अरविंद केजरीवाल के जंतर-मंतर पहुंचने से CJP के आंदोलन को बड़ा राजनीतिक समर्थन मिला। मंच पर मौजूद नेताओं ने आंदोलन को छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा बताते हुए सरकार से सकारात्मक पहल करने की मांग की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने भी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता की मांग दोहराई।
आंदोलन पर टिकीं राजनीतिक नजरें
सोनम वांगचुक का आमरण अनशन अब राष्ट्रीय राजनीति का भी प्रमुख मुद्दा बनता जा रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों की बढ़ती सक्रियता के बीच यह देखना अहम होगा कि केंद्र सरकार आंदोलन और उससे जुड़ी मांगों पर क्या रुख अपनाती है। फिलहाल, जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन राजनीतिक और सार्वजनिक बहस के केंद्र में बना हुआ है।
पेपर लीक होने से बच्चों का आत्मविश्वास लड़खड़ाने लगा- केजरीवाल
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ” मैंने भी आईआईटी का पेपर दिया था लेकिन उन दिनों में पेपर लीक नहीं होते थे. मेरे दोनों बच्चों आईआईटी से हैं, मेरे बच्चों के टाइम पर भी पेपर लीक नहीं होते थे लेकिन आज जिस तरह से कुछ सालों से पेपर लीक हो रहे हैं, बच्चों का कॉन्फिडेंस लड़खड़ाने लगा है. ये देश के लिए बहुत खतरनाक बात है. हर साल पेपर लीक हो रहे हैं. पेपर लीक होते हैं, कमेटी बनती है, एफआईआर होती है, गिरफ्तारी होती है, बेल मिल जाती है और फिर अगले साल पेपर लीक की तैयारी शुरू हो जाती है.”
