अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक करीब तीन घंटे चली। इसके बाद ट्रस्ट ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें ट्रस्ट ने हरेक सवाल का जवाब दिया। ट्रस्ट ने बताया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन को बनाया गया है।प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म होने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई, जिसमें बताया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के न्यासियों की बैठक सोमवार को अयोध्या में संपन्न हुई। इसमें प्रमुख रूप से दानपात्रों से प्राप्त राशि की गणना की प्रक्रिया में अनियमितता, उसकी जांच और कार्रवाई, महामंत्री और एक न्यासी के न्यासी पद से त्यागपत्रों, मीडिया में चल रही चर्चाओं, भावी अन्तरिम व्यवस्थाओं आदि विषयों पर विचार हुआ।
2020 में ट्रस्ट बना
2020 में ट्रस्ट की स्थापना के बाद छह वर्ष से कम के अल्पकाल में प्रभु श्री रामलला के भावी और अप्रतिम मंदिर के निर्माण का ऐतिहासिक कार्य सम्पूर्ण हुआ। इसी अवधि में मुख्य मंदिर एवं परकोटे में बने समस्त मंदिरों में प्राण-प्रतिष्ठा ध्वजारोहण और श्रीराम यंत्र की स्थापना के महती कार्य प्रभु कृपा से सानंद और शास्त्रीय विधि-विधान से संपन्न हुए। न्यास इस सांस्कृतिक धरोहर के निर्माण और अनेक धार्मिक उत्सवों में सहयोगी सम्पूर्ण हिन्दू समाज श्रमिकों अभियन्ताओं शिल्पकारों वास्तुविदों और केंद्रीय व राज्य सरकारों का हार्दिक आभार मानता है।
31 मार्च तक 582 करोड़ रुपये चढ़ावा मिला
ट्रस्ट ने कहा कि निधि समर्पण अभियान एवं कॉर्पस दान के माध्यम से प्राप्त कुल राशि 3264 करोड़ रुपये में से 2370 करोड़ रुपये निर्माण एवं पूंजीगत व्यय में उपयोग की गई है। प्रारम्भ से लेकर 31 मार्च 2026 तक कुल चढ़ावा 582 करोड़ रुपये प्राप्त हुआ जिसमें से 391 करोड़ रुपये की राशि संचालन व्यय में उपयोग ली गई। शेष राशियां बैंक खातों में उपलब्ध है। ये समस्त वितीय सूचनाएं समय-समय पर ट्रस्ट ने मीडिया के समक्ष प्रस्तुत की हैं।
ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी गठित हुई
चढ़ावे की राशि की गणना प्रक्रिया में अनियमितता से न्यासीगण आहत एवं चिंतित हैं और इस दुर्भाग्यकारी प्रकरण पर गंभीर खेद व्यक्त करते हैं। इस प्रकरण की जानकारी प्राप्त होने पर पाया है कि ट्रस्ट के अधिकारियों ने अनियमितता के संज्ञान में आने पर प्रारंभिक जानकारी एकत्र करने के बाद उतर-प्रदेश शासन से निष्पक्ष जांच का आग्रह किया। ट्रस्ट के अनुरोध पर शासन ने तत्काल उच्च स्तरीय जांच दल (एसआईटी का गठन किया ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष व्यापक और तथ्यपरक जांच हो सके। किसकी क्या भूमिका रही किन लोगों की संलिप्तता है और किसके विरुद्ध मुकदमा दर्ज होना चाहिए-इन सभी प्रश्नों का उत्तर केवल जांच के आधार पर ही संभव था। इसी उद्देश्य से ऐसे जांच दल के गठन के अनुरोध की पहल की गई।
ट्रस्ट ने मुकदमा दर्ज कराया
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में 8 लोगों के नाम सामने आए। जिनके विरुद्ध प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले उनके विरुद्ध ट्रस्ट ने मुकदमा दर्ज कराया और गिरफ्तारियां भी हुईं। अब पूरा मामला कानून के अनुसार आगे बढ़ रहा है। ट्रस्ट का स्पष्ट मत है कि जो भी दोषी हो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई होकर कठोरतम दंड मिलना चाहिए। एसआईटी का कार्यक्षेत्र सिर्फ जांच तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह सुझाव देना भी है कि ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में क्या आवश्यक सुधार करने चाहिए, जिससे व्यवस्था और अधिक सुदृढ़, मजबूत एवं पारदर्शी हो सके।
चंपत राय और अनिल मिश्र ने नैतिक आधार पर त्यागपत्र दिया
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद महामंत्री चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्र ने नैतिक आधार पर त्यागपत्र दिया है जिन्हें आज ट्रस्ट की बैठक में विचारार्थ प्रस्तुत किया गया। ट्रस्ट ने निष्पक्ष जांच के लिए नैतिक आधार पर दिए दोनों के त्यागपत्र को स्वीकार किया है। साथ ही ट्रस्ट ने गोपाल नगरकोटे (गोपाल राव का नाम विशिष्ट आमंत्रित सदस्य सूची से हटाने का निर्णय किया है। ट्रस्ट का मानना है कि जांच की वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने पर सत्य प्रकाशित होगा और तब तक किसी भी व्यक्ति पर दोषारोपण करना उचित नहीं है।
कुछ लोग लगातार भ्रम फैला रहे हैं
ट्रस्ट ने प्रबंधन एवं संचालन की पद्धति और प्रणाली की कमजोरियों को दूर करने और उन्हें सशक्त बनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है और एसआईटी से अपेक्षित अनुशंसाओं के अतिरिक्त विशेषज्ञों से भी स्वतंत्र परामर्श लेने का सुझाव दिया है, जिससे मंदिर प्रबंधन की एक आदर्श कुशल और पारदर्शी व्यवस्था स्थापित हो सके जो इस क्षेत्र में अनुकरणीय उदाहरण बने। कुछ लोग इस दुर्भाग्यपूर्ण प्रकरण को श्रीरामलला मंदिर श्रीराम जन्मभूमि हिंदू समाज और व्यापक हिंदू आस्था को कमजोर करने के अवसर के रूप में उपयोग करने का प्रयास कर रहे हैं। आधारहीन आरोप जनमानस के समक्ष प्रस्तुत किए जा रहे हैं जिनका उद्देश्य सत्य सामने लाना नहीं बल्कि निरंतर भ्रम फैलाना है।
2926 भेंटें मिली हैं
नकद राशि के अतिरिक्त अनेक श्रद्धालुओं ने वस्तु के रूप में प्रभु श्री रामलला को भेंट अर्पित की हैं। ऐसी कुल 2926 भेंट प्राप्त हुई हैं जो समस्त तिथि अनुसार सम्पूर्ण विवरण के साथ रजिस्टर में दर्ज हैं और उनका भौतिक सत्यापन एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट फ़र्म द्वारा आंतरिक अंकेक्षक के नाते प्रति वर्ष किया जाता है। काउंटर पर ऐसी भेंट देने वाले समस्त श्रद्धालुओं को रसीद दी गई हैं और काउंटर के अतिरिक्त दी गई भेंट के लिए भी उन समस्त श्रद्धालुओं को रसीद दी गई है जिन्होंने दानदाता का विवरण दिया। समस्त श्रद्धालुओं से निवेदन है कि जो भी अपनी दी हुई भेंट का उपयोग जानना और सत्यापन करना चाहें वे कभी भी ट्रस्ट के अधिकारी से तिथि व समय निश्चित कर अयोध्या पधारें और प्रभु श्री रामलला के दर्शन के साथ अपनी भेंट का सत्यापन कर सकते हैं।
चांदी को गलाकर छड़ें बना दी गईं
चांदी की वस्तुओं को भारत सरकार की टकसाल मिंट में गला कर छड़ें बनाई गई हैं जिनके मूल स्वरूप का विवरण फोटो व वजन सहित उपलब्ध है। गलाने के पश्चात चांदी की शुद्धता और कुल वजन के टकसाल के प्रमाण-पत्र भी उपलब्ध हैं।
एसआईटी की सामने साक्ष्य पेश करें
ट्रस्ट का आग्रह है कि यदि किसी व्यक्ति संस्था या पत्रकार के पास मंदिर से सम्बद्ध किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध अनियमितता के ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें सार्वजनिक आरोप लगाने के बजाय एसआईटी और संबंधित जांच एजेंसी को उपलब्ध कराया जाए। जांच एजेंसियां प्रमाणों के आधार पर अवश्य कार्रवाई करेंगी।
तीन सदस्यीय समिति गठित
न्यास की बैठक में नए महामंत्री की नियुक्ति होने तक ट्रस्टी कृष्ण मोहन को अंतरिम महामंत्री नियुक्त किया गया है। न्यास ने एक उपयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी का चयन करने के निमित्त तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है जो ट्रस्ट को उपयुक्त नामों की अनुशंसा करेगा। समिति में न्यायाधीश सेवानिवृत प्रमोद कोहली लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े रहेंगे।
