दिल्ली सरकार ने सोमवार को राजधानी के लिए नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी ( Delhi EV Policy 2.0 ) को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक इस नीति को 1 जुलाई 2026 से लागू किए जाने की उम्मीद है। सरकार का प्लान है कि अगले चार सालों के अंदर इस पॉलिसी के तहत ₹15,000 करोड़ का भारी-भरकम निवेश किया जाएगा। इस नई नीति का मकसद दिल्ली को देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का सबसे बड़ा हब बनाना है।सरकार ने लक्ष्य रखा है कि साल 2027 तक दिल्ली में रजिस्टर होने वाली कुल नई गाड़ियों में से 95 प्रतिशत गाड़ियां पूरी तरह इलेक्ट्रिक (EV) हों। साथ ही सरकार पुरानी गाड़ी को स्क्रैप करने पर ₹1 लाख का इंसैंटिव भी देगी। आइए आपको इस नई ईवी पॉलिसी के बारे में डिटेल में बताते हैं।
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा
प्रदूषण कम करने के लिए सरकार ने कुछ कड़े कदम उठाए हैं।
सिर्फ इलेक्ट्रिक ऑटो – दिल्ली में 2027 से सिर्फ और सिर्फ इलेक्ट्रिक ऑटो का ही नया रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। पेट्रोल, डीजल या सीएनजी वाले नए ऑटो बंद हो जाएंगे।
सिर्फ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर – 1 अप्रैल 2028 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (स्कूटर और मोटरसाइकल) ही रजिस्टर किए जा सकेंगे।
ग्राहकों को मिलेगी बंपर सब्सिडी और छूट
इलेक्ट्रिक गाड़ियों को आम लोगों के बजट में लाने के लिए सरकार ने बड़े फायदों का एलान किया है।
पुरानी कार स्क्रैप करने पर ₹1 लाख – अगर आपके पास पुरानी BS-IV (BS4) चार पहिया गाड़ी है और आप उसे स्क्रैप (कबाड़) करने के लिए देते हैं, तो सरकार आपको ₹1 लाख का स्क्रैपिंग इंसेंटिव देगी।
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर छूट – इस पॉलिसी के पहले साल में नया इलेक्ट्रिक स्कूटर या बाइक खरीदने पर ग्राहकों को ₹30,000 की सब्सिडी मिलेगी।
इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर पर छूट – नया इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (ऑटो आदि) खरीदने वालों को सरकार की तरफ से ₹50,000 की सब्सिडी दी जाएगी।
हाइब्रिड कारों पर छूट नहीं
इलेक्ट्रिक गाड़ियों के साथ ही हाइब्रिड कारें भी आज के समय में काफी पॉपुलर हो रही हैं। शुरुआती ड्राफ्ट (प्रस्ताव) में सरकार ने कहा था कि ₹30 लाख तक की कीमत वाली हाइब्रिड कारों के रोड टैक्स में 50% की छूट दी जाएगी। उम्मीद थी कि हाइब्रिड कार खरीदने पर भी ग्राहकों को छूट मिलेगी। लेकिन, एक अधिकारी ने साफ किया है कि अंतिम मंजूर की गई इस नई ईवी पॉलिसी में हाइब्रिड गाड़ियों के लिए कोई सब्सिडी या छूट शामिल नहीं की गई है। फिलहाल, दिल्ली में इन्हें इस नीति से बाहर रखा गया है।
