प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड्स की अपनी यात्रा के दौरान ईरान-अमेरिका जंग और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट, युद्ध और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों पर गहरी चिंता जताई. नीदरलैंड की राजधानी ‘द हेग’ में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अगर मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां तेजी से नहीं बदलीं, तो दुनिया की बड़ी आबादी दोबारा गरीबी के दलदल में जा सकती है. उन्होंने कहा कि भारत और नीदरलैंड मिलकर भविष्य के लिए भरोसेमंद और पारदर्शी सप्लाई चेन तैयार करने पर काम कर रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते संकट का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि दुनिया पहले कोरोना महामारी से जूझी और अब युद्धों के कारण ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है. पीएम मोदी ने कहा, ‘यह दशक दुनिया के लिए आपदाओं का दशक बनता जा रहा है. अगर हालात नहीं बदले तो बीते कई दशकों की उपलब्धियां खत्म हो सकती हैं और दुनिया की बहुत बड़ी आबादी फिर से गरीबी के दलदल में चली जाएगी.’
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में दुनिया अब ‘रेजिलिएंट सप्लाई चेन’ यानी मजबूत और भरोसेमंद आपूर्ति व्यवस्था की बात कर रही है. इसी दिशा में भारत और नीदरलैंड साथ मिलकर काम कर रहे हैं. प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा से लेकर जल सुरक्षा तक दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है. ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी भारत और नीदरलैंड की साझेदारी अहम भूमिका निभा रही है.प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक ट्रेड एग्रीमेंट का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इससे भारत और नीदरलैंड के आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलेगी और दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे.
अपने संबोधन की शुरुआत में पीएम मोदी ने भारतीय समुदाय के उत्साह की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा, ‘इतना प्यार और उत्साह देखकर कुछ देर के लिए मैं भूल ही गया कि मैं नीदरलैंड में हूं. ऐसा लग रहा है जैसे भारत में कोई त्योहार चल रहा हो.’
प्रधानमंत्री ने नीदरलैंड में बसे भारतीय समुदाय के योगदान की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय यहां की अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और इस पर हर भारतीय को गर्व है. उन्होंने नीदरलैंड की सरकार और वहां की जनता का भारतीयों को सम्मान और अवसर देने के लिए आभार जताया.
भारतीय संस्कृति और प्रवासी भारतीयों की पहचान का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यहां बसे भारतीय परिवारों की कहानी सिर्फ प्रवास की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, संस्कृति और प्रगति की कहानी है. उन्होंने कहा कि भारतीयों ने विदेश में रहते हुए भी अपनी भाषा, संस्कृति, त्योहार और परंपराओं को जीवित रखा है. उन्होंने कहा, ‘आपने डच भाषा को अपनाया, लेकिन अपनी जड़ों और पुरखों की भाषा को नहीं छोड़ा. यहां के कम्युनिटी रेडियो भारतीय संस्कृति और संगीत को नई पीढ़ियों तक पहुंचा रहे हैं. यह बेहद सराहनीय है.’ प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के जरिए साफ संकेत दिया कि भारत वैश्विक संकटों के बीच खुद को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करना चाहता है. ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन, ग्रीन एनर्जी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए भारत भविष्य की चुनौतियों का समाधान खोजने की दिशा में काम कर रहा है.
