नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा में वित्त वर्ष 2026 का बजट पेश किया गया, जिसमें कुल ₹1,03,700 करोड़ का प्रावधान रखा गया है. यह पिछले वर्ष के मुकाबले ₹3,700 करोड़ यानी करीब 3.7 प्रतिशत अधिक है. कुल बजट में ₹62,550 करोड़ योजनाओं और परियोजनाओं के लिए, जबकि ₹41,150 करोड़ राजस्व और पूंजीगत व्यय के लिए तय किए गए हैं. सरकार की आय का बड़ा हिस्सा जीएसटी से आएगा, जिससे ₹43,500 करोड़ मिलने का अनुमान है, जबकि कुल कर राजस्व ₹74,000 करोड़ रहने की उम्मीद है. इसके अलावा केंद्र प्रायोजित योजनाओं, केंद्रीय सहायता और बाजार से कर्ज के जरिए भी धन जुटाया जाएगा.क्षेत्रवार आवंटन में शिक्षा को सबसे ज्यादा ₹19,326 करोड़ (18.64%) मिले हैं, जबकि स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए ₹13,034 करोड़ (12.57%) तय किए गए हैं. परिवहन और सड़कों के लिए ₹12,613 करोड़, आवास और शहरी विकास के लिए ₹11,572 करोड़, सामाजिक सुरक्षा के लिए ₹10,537 करोड़ और जल एवं स्वच्छता के लिए ₹9,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है.
बजट की बड़ी खासियत ग्रीन पहल है, जिसके तहत कुल बजट का 21.44 प्रतिशत यानी ₹22,236 करोड़ पर्यावरण से जुड़े कार्यों पर खर्च किया जाएगा. इसमें प्रदूषण नियंत्रण, हरित क्षेत्र बढ़ाने, कचरा प्रबंधन और स्वच्छ ऊर्जा पर फोकस रहेगा.इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नगर निगम को ₹11,266 करोड़, लोक निर्माण विभाग को ₹5,921 करोड़ और शहरी विकास के लिए ₹7,887 करोड़ दिए गए हैं. 750 किलोमीटर सड़कों के पुनर्विकास के लिए ₹1,392 करोड़ और अनधिकृत कॉलोनियों के लिए ₹800 करोड़ तय किए गए हैं.जल आपूर्ति और सीवेज व्यवस्था सुधारने के लिए दिल्ली जल बोर्ड को ₹9,000 करोड़ दिए गए हैं. स्वास्थ्य क्षेत्र में नए अस्पताल और आईसीयू परियोजनाओं के लिए ₹150 करोड़, दवाओं और उपकरणों के लिए ₹787 करोड़ तथा आयुष्मान योजना के विस्तार के लिए ₹202 करोड़ का प्रावधान है. 750 से अधिक नए हेल्थ सेंटर स्थापित किए जाएंगे.
