पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी ने सोमवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ काली शॉल ओढ़कर दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से मुलाकात की। उनके साथ SIR प्रभावित 13 परिवार और TMC के नेता भी थे।मुलाकात के बाद ममता ने कहा, “मैं बहुत दुखी हूं। मैं दिल्ली की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हूं। मैं चार बार केंद्रीय मंत्री और सात बार सांसद रह चुकी हूं। मैंने आज तक ऐसा अहंकारी और झूठा चुनाव आयुक्त नहीं देखा।ममता ने कहा- जब गृहमंत्री पश्चिम बंगाल आते हैं तो हम उन्हें रेड कारपेट देते हैं, लेकिन जब हम दिल्ली आते हैं तो हमें ब्लैक कारपेट दिया जाता है।इसके पहले सुबह ममता ने दिल्ली पहुंचते ही कहा कि वे SIR के मुद्दे पर लड़ाई जारी रखेंगी। अगर इस देश में कोई नहीं लड़ेगा, तो मैं लड़ूंगी, हमारी पार्टी लड़ेगी।
ममता बनर्जी ने कहा कि अगर आपको SIR करना ही था, तो आपको चुनाव वाले राज्यों को छोड़कर सही प्लानिंग के साथ करना चाहिए था, लेकिन आपने ऐसा नहीं किया। असम में आपकी बीजेपी सरकार है। आपने असम में एसाईआर नहीं किया, लेकिन पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में किया। आपने हमारे साथ क्या किया? आपने 58 लाख लोगों को हटा दिया। यहां बहुत ज़्यादा गड़बड़ी और गलत मैपिंग है। अगर हमें 2022 में SIR करना होता, और हमसे हमारे पिता के बर्थ सर्टिफ़िकेट लाने को कहा जाता, तो यह मुमकिन नहीं होता। पहले बच्चे घरों में पैदा होते थे, अस्पतालों में नहीं… अपने प्रधानमंत्री से पूछिए कि क्या उनके पास अपने माता-पिता के इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी सर्टिफ़िकेट हैं।बंगाल में वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चल रहा है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुरू से ही इसके लिए केंद्र और चुनाव आयोग की आलोचना करती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि वोटर-ओरिएंटेड बंगाल में राजनीतिक मकसद से बिना पूरी तैयारी के एसआईआर किया जा रहा है। सोमवार को वह राजधानी दिल्ली में चीफ इलेक्शन कमीशन के ऑफिस पहुंचीं। उनके साथ अभिषेक बनर्जी और एसआईआर से प्रभावित लोगों के परिवार भी थे। इस दौरान ममता बनर्जी काली शॉल में लिपटी हुई थीं। बाकी लोगों ने काले कपड़े पहने हुए थे।
बंग भवन के बाहर दिल्ली पुलिस की तैनाती
इस बीच, हेली रोड और चाणक्यपुरी स्थित दोनों बंग भवनों के बाहर दिल्ली पुलिस की भारी तैनाती की गई है। ममता ने आरोप लगाया कि बंगा भवन में ठहरे बंगाल के लोगों को धमकाया जा रहा है। वहां भारी संख्या में पुलिस डराने के लिए तैनात की गई है।
ममता ने कहा हमारा मामला सुप्रीम कोर्ट में है। लोगों की मौत हुई है, तो क्या उनके परिवार मीडिया से बात भी नहीं कर सकते?”
ममता ने कहा, जब मैं यहां आती हूं तो ये लोग घबरा जाते हैं। मैं चाहती तो लाखों लोगों को साथ ला सकती थी।
दिल्ली को “जमींदारी जैसा” बताते हुए उन्होंने कहा कि यहां गरीबों के लिए जगह नहीं है। ममता ने दिल्ली पुलिस से कहा कि SIR से प्रभावित परिवारों को परेशान न किया जाए। हम यहां न्याय के लिए आए हैं।
पुलिस ने बताया कि ममता की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस की तैनाती की गई थी
बंग भवन के बाहर तैनात दिल्ली पुलिस से ममता बनर्जी की बहस
इससे पहले ममता बनर्जी की सोमवार को दिल्ली के बंग भवन के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों से बहस हुई और उन्होंने अपने राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से प्रभावित परिवारों के उत्पीड़न का आरोप लगाया। इसके बाद बंग भवन के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पत्रकारों से बातचीत में बनर्जी ने दावा किया कि बंग भवन में ठहरे पश्चिम बंगाल के लोगों को धमकी दी जा रही है और उन्होंने भारी पुलिस तैनाती पर सवाल उठाया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह पुलिस को नहीं, बल्कि ऊपर बैठे लोगों को दोषी ठहराती हैं।
कई ऐसे परिवार हैं जो एसआईआर प्रक्रिया से प्रभावित
मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां कई ऐसे परिवार हैं जो एसआईआर प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं। एसआईआर से प्रभावित परिवार जहां भी ठहरे हुए हैं, हर उस जगह पर दिल्ली पुलिस तैनात है। दिल्ली में धमाका होने पर दिल्ली पुलिस कहां होती है? उन्होंने आरोप लगाया कि लेकिन मैं दिल्ली पुलिस को दोष नहीं देती, मैं शीर्ष पदों पर बैठे लोगों को दोष देती हूं। यह अक्षमता है… वे देश की रक्षा नहीं कर सकते, वे बंगाल और आम जनता को प्रताड़ित करते हैं, और एसआईआर के नाम पर अत्याचार कर रहे हैं।
दिल्ली पुलिस पर लगाए आरोप
बनर्जी ने कहा कि जब मैं यहां आती हूं तो वे घबरा जाते हैं… मैं लाखों लोगों को ला सकती थी। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली एक जमींदारी की तरह हो गई है और इसमें गरीबों के लिए कोई जगह नहीं है। इससे पहले बनर्जी पुलिसकर्मियों के पास जाती हुई दिखीं और उन्होंने कहा कि मैं यहां आंदोलन करने के लिए नहीं आई हूं। अगर मैं आंदोलन के लिए आई होती, तब तो आप अपना आपा ही खो देते। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस को एसआईआर से प्रभावित उन परिवारों को परेशान नहीं करना चाहिए जो शहर में आए हैं।
ममता का दिल्ली आने का मकसद
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने जानबूझकर नेशनल कैपिटल की यात्रा के लिए यह समय चुना है, क्योंकि चल रहे बजट सत्र के कारण सभी विपक्षी पार्टियों के शीर्ष नेता वहां मौजूद रहेंगे। सीएम ममता के कोलकाता लौटने की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों ने बताया कि वह 5 फरवरी से पहले लौट आएंगी, क्योंकि उस दिन पश्चिम बंगाल विधानसभा में वोट ऑन अकाउंट पेश किया जाएगा।
बजट सत्र के बीच दिल्ली में दीदी
पश्चिम बंगाल विधानसभा का बजट सत्र भी महत्वपूर्ण है और ट्रेजरी बेंच सदन में दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश करेगी। इसमें एक प्रस्ताव राज्य में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (सबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका की निंदा करने के लिए होगा। तो वहीं, दूसरा प्रस्ताव राज्य में चल रहे एसआईआर को जिस तरह से किया जा रहा है, उसकी निंदा करने के लिए होगा। इससे पहले सीईसी को लिखे पत्र में सीएम ममता ने स्पेशल रोल ऑब्जर्वर (एसआरओ) और माइक्रो-ऑब्जर्वर के अधिकार पर सवाल उठाया था, जिन्हें उनके अनुसार, राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) की समीक्षा के लिए केवल पश्चिम बंगाल में नियुक्त किया गया है।
चुनाव आयोग को ममता ने लिखा था….
पत्र के अनुसार, मुख्यमंत्री का मुख्य तर्क यह है कि एसआरओ और माइक्रो-ऑब्जर्वर की भूमिका एसआईआर प्रक्रिया की देखरेख तक सीमित नहीं थी, क्योंकि उन्हें अप्रूविंग अथॉरिटी के रूप में भी नामित किया गया है। सीईसी के नाम लिखे पत्र में ममता बनर्जी ने दावा किया कि माइक्रो-ऑब्जर्वर को यह अधिकार देने से चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक चुनावी पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) असहाय, अलग-थलग पड़ गए हैं और सिर्फ दर्शक बनकर रह गए हैं। उन्होंने दावा किया कि ऑब्जर्वर और माइक्रो-ऑब्जर्वर को यह अतिरिक्त अधिकार भारतीय संविधान द्वारा गारंटीकृत लोकतांत्रिक मूल्यों, संघवाद और मौलिक अधिकारों की भावना के खिलाफ है।
12 राज्यों में चल रही SIR की प्रोसेस
फिलहाल देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया चल रही है। अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी को जारी की जाएगी। अंडमान-निकोबार, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में SIR हो रहा है।चुनाव आयोग के अनुसार, 28 अक्टूबर से 3 नवंबर के बीच छपाई और प्रशिक्षण का कार्य हुआ। इसके बाद 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक गणना (एन्यूमरेशन) चरण चला। मसौदा मतदाता सूची 9 दिसंबर को प्रकाशित की गई। इसके बाद 9 दिसंबर से 8 जनवरी 2026 तक दावे और आपत्तियों की अवधि रही।नोटिस चरण (सुनवाई और सत्यापन) 9 दिसंबर से 31 जनवरी तक चला, जबकि अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 7 फरवरी 2026 को किया जाएगा।
