बजट सत्र के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश की। आर्थिक सर्वेक्षण पर बात इसलिए क्योंकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2025 26 की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट गुरुवार को संसद में पेश की। आर्थिक सर्वेक्षण पूरे वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की गतिविधियों पर केंद्रीत एक गहन अध्ययन पर आधारित रिपोर्ट होता है।वित्त वर्ष 2025 26 के आर्थिक सर्वेक्षण में भारत की अर्थव्यवस्था को स्वदेशी से आगे बढ़कर रणनीतिक अनिवार्यता की ओर ले जाने की रूपरेखा को दर्शाता है। साथ ही वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को दर्शाता है।इस बीच बजट सत्र के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने संसद भवन परिसर में मीडिया से बात करते हुए विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बजट सत्र को महत्वपूर्ण बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज समय व्यवधान का नहीं है आज समय समाधान का है।
1. आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट बजट से ठीक पहले आने वाला सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है जिसमें अर्थव्यवस्था की स्थिति अनुमान और सेक्टर वाइज परफॉर्मेंस शामिल होती है। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2025 26 देश की अर्थ व्यव्स्था की क्या तस्वीर पेश कर रही है।
2.विकास दर का अनुमान
सर्वेक्षण के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी विकास दर 7% से अधिक रहने का अनुमान है। सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि अगले वर्ष भी विकास दर 7% या उसके आसपास रहने की संभावना है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को दर्शाता है।
3. राजकोषीय अनुशासन
सरकार ने राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त की है। वित्तीय वर्ष 2025 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.8% रहा, जो 4.9% के बजट अनुमान से कम है । वित्तीय वर्ष 2026 के लिए इसे 4.4% तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।
4. रणनीतिक अनिवार्यता
सर्वेक्षण का केंद्रीय विषय ‘स्वदेशी’ से ‘रणनीतिक अनिवार्यता’ की ओर बढ़ना है। इसका अर्थ है कि भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखला में इतना महत्वपूर्ण बनना होगा कि उसे नजरअंदाज करना या प्रतिस्थापित करना संभव न हो। यह केवल आत्मनिर्भरता नहीं, बल्कि वैश्विक निर्भरता भारत पर बढ़ाने की रणनीति है ।
5 तीन वैश्विक परिदृश्य
सर्वेक्षण ने 2026 के लिए तीन संभावित वैश्विक परिदृश्य प्रस्तुत किए हैं: ‘प्रबंधित अव्यवस्था’ (Managed Disorder), ‘अव्यवस्थित बहुध्रुवीय टूटन’ (Disorderly Multipolar Breakdown), और ‘प्रणालीगत झटकों का सिलसिला’ (Systemic Shock Cascade)। भारत को इन तीनों स्थितियों से निपटने के लिए अपनी आर्थिक बफर्स (Buffers) को मजबूत करने की सलाह दी गई है।
6. कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन
कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा है। वर्ष 2024-25 में अनाज का उत्पादन रिकॉर्ड 3,320 लाख टन तक पहुंच गया है। रबी की बुवाई में भी पिछले वर्ष की तुलना में 3.3% की वृद्धि देखी गई है, जो खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आय के लिए सकारात्मक संकेत है।
7. पूंजीगत व्यय में भारी वृद्धि
सरकार ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पूंजीगत व्यय (Capex) में भारी बढ़ोतरी की है। वित्त वर्ष 2026 के लिए इसके लिए 11.21 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जो वित्त वर्ष 2022 के 5.92 लाख करोड़ रुपये से लगभग 89% अधिक है ।
8. शासक राज’ से ‘नागरिक राज
सर्वेक्षण में राज्य की क्षमता (State Capacity) को बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसमें ‘उद्यमी राज्य’ (Entrepreneurial State) की अवधारणा पेश की गई है, जो जोखिम लेने और अनिश्चितता के बीच निर्णय लेने में सक्षम हो। लक्ष्य शासन को ‘रूलर्स राज’ से ‘सिटिजन्स राज’ में बदलना है।
9. वृद्धि दर में नरमी के संकेत
सर्वे में साफ कहा गया है कि वैश्विक हालात अब पहले जैसे नहीं रहे। सबसे बड़ी चिंता अमेरिका को लेकर है:
• ट्रंप का टैरिफ वार: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर 50% तक टैरिफ (आयात शुल्क) लगा दिया है। इसका सबसे बुरा असर भारत के कपड़ा उद्योग, जेम्स एंड ज्वैलरी और लेदर सेक्टर पर पड़ा है।
• वजह: रूस से तेल खरीदने के भारत के फैसले और यूक्रेन मुद्दे के कारण अमेरिका ने यह सख्त कदम उठाया है।
• सर्वे में माना गया है कि आज के दौर में अच्छी इकोनॉमी होने के बावजूद देशों को करेंसी और ग्लोबल मार्केट की अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है।
10. घरेलू बाजार और मैन्युफैक्चरिंग
ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद भारत डटा हुआ है। इसकी मुख्य वजहें हैं:
• मैन्युफैक्चरिंग बूम: देश में निवेश और मैन्युफैक्चरिंग में जबरदस्त उछाल आया है।
• सस्ता कर्ज: महंगाई कम होने से आरबीआई ने 2025 में ब्याज दरों में 1.25% की कटौती की, जिससे क्रेडिट (लोन) की मांग बढ़ी है।
• जीएसटी में राहत: जीएसटी दरों में कमी ने भी बाजार में मांग को सपोर्ट किया है
