ढाका: बांग्लादेश में चारों तरफ हाहाकार मचा है. तोड़-फोड़ और आगजनी के बीच यूनुस के राज में एक बार फिर से हिंदुओं पर अटैक शुरू हो गए हैं. ग्लोबल प्रेशर की वजह से यूनुस ने मॉब लिंचिंग में दर्दनाक तरीके से मारे गए दीपू के परिवार को आर्थिक सहायता देने का ऐलान करके पल्ला छाड़ लिया है. ऐसे में असहाय हिंदू किन हालातों का सामना कर रहे हैं, इसके बारे में वाइस प्रेसिडेंट इस्कॉन, राधारमण दास ने खुलकर बात की है. उन्होंने हिंदुओं के घरों पर हुए अटैक को लेकर भयावह डीटेल शेयर की है.उन्होंने बताया है कि हिंदुओं को मारने के लिए उनके घरों में आग लगाई जा रही है और कोई बच कर ना निकल पाए, इसके लिए उग्रवादी पहले घरों को बाहर से लॉक कर रहे हैं. राधारमण दास ने कहा कि ‘भारत विरोधी नैरेटिव में हिंदुओं को मारा जा रहा है, कल रात में भी कुछ हिंदू गांवों में कई घर जलाए गए, घर का बाहर से दरवाजा बंद करके घर जलाए जा रहे हैं. लोगों ने किसी तरह खिड़की से कूद कर जान बचाई है’. उन्होंने आगे कहा कि ‘इससे पहले दो प्रमुख न्यूज मीडिया को भी बाहर से लॉक कर दिया था, आर्मी और पुलिस हाथ जोड़कर अनुरोध करना पड़ा जब जाकर उन्हें बचाया जा सका था’.राधारमण दास ने बांग्लादेश में घट रही हिंदुओं की संख्या पर चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा है कि ‘कि बांग्लादेश में 30 प्रतिशत हिंदुओं की संख्या सिर्फ साढ़े सात रह गई है. इस पर विश्व को संज्ञान लेना चाहिए’.यूनुस के राज में एक 27 साल के युवा हिंदू को बिना किसी अपराध के लातों से पीट-पीट कर मार दिया जाता है और फिर उसकी लाश को पेड़ से बांध कर फूंक दिया जाता है. इस भयावह कृत्य को लेकर राधारमण ने कहा कि ‘दीपू दास के जाने के बाद उनके माता-पिता और बच्ची के नुकसान की भरपाई तो नहीं हो सकती लेकिन उनकी बेटी की पढ़ाई और मां-बाप की जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए’.
पूरे विश्व में सबसे ज्यादा नरसंहार हिंदुओं का हुआ है
अलग-अलग मौकों पर हुए हिंदुओं के नरसंहार को याद करते हुए राधारमण ने कहा कि ‘पूरे विश्व में सबसे ज्यादा नरसंहार हिंदुओं का हुआ है. पाकिस्तान में भी 20 परसेंट हिंदू थे लेकिन अब 1 परसेंट रह गई है. हिंदूओं को भी पता नहीं है कि कब-कब और कितने हिंदू मारे गए. मठों को ध्वस्त करने वाले, भिक्षुओं को मारने और नालंदा यूनिवर्सिटी जलाने वाले बख्तियार खिलजी के नाम पर रोड़ बनाई गई है. इस पर सवाल उठने चाहिए’.उन्होंने कहा कि ‘हिंदुओं को एकजुट होना पड़ेगा, कुछ नहीं कर सकते तो सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल करके एक ट्वीट ही कर दें. उनकी इस छोटी सी कोशिश से बांग्लादेश के हिंदुओं को हिम्मत मिल सकती है’.राधारमण दास ने चिन्मय कृष्ण दास को लेकर भी बात की है, जिन्हें यूनुस के राज में सलाखों के पीछे भेज दिया गया है. उन्होंने हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ रैलियां की थीं और इस दौरान देश भर में प्रदर्शन हुए थे. चिन्मय पर राजद्रोह के आरोप लगे थे और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था.इस मामले पर राधारमण ने दास कहा ‘चिन्मय कृष्ण दास को कोर्ट से जमानत मिल गई थी, 30 अप्रैल को बेल मिल गई थी फिर पुलिस ने 4 मामले लगाकर उन्हें जेल भेज दिया’. बता दें कि चटगांव कोर्ट में जब प्रिजन वैन के आसपास थे जो मारपीट हुई थी तो उसमें वकील की मौत हो गई थी, उस हत्या में चिन्मय दास को फंसा दिया गया था’.राधारमण ने बताया कि ‘चिन्मय के केस में कुछ मूवमेंट नहीं हो रहा है. अब सरकार ही कुछ मदद कर सकती है’. उन्होंने बताया कि ‘चिन्मय कृष्ण दास की मां से बात होती है, बूढ़ी मां अपने बेटे से जेल में मिलने जाती हैं और बोलती हैं कि मेरे बच्चे को सब भूल गए हैं, जेल में उसकी से सेहत ठीक नहीं है. उन्हें पहले से ही डायबिटीज है. मां पूछती हैं कि ‘मेरा बेटा कब आजाद होगा? इसका जवाब सिर्फ सरकार के पास है’.
आवामी लीग से बैन हटाओ’, अमेरिका ने युनुस को दे दिया झटका
बांग्लादेश में फरवरी में होने वाले आम चुनाव से पहले शेख हसीना की वापसी का रास्ता बनता दिख रहा है. मोहम्मद यूनुस की तानाशाही के खिलाफ अंतरिम सरकार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव तेज हो गया है. अमेरिका के प्रभावशाली सांसदों के एक समूह ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यूनुस को शेख हसीना की पार्टी वामी लीग से बैन हटाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी को चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखा गया, तो यह चुनाव न तो स्वतंत्र होगा और न ही निष्पक्ष. अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ सदस्य ग्रेगरी डब्ल्यू मीक्स, बिल हुईजेंगा और सिडनी कैमलागर-डोव ने मंगलवार को बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस को एक औपचारिक पत्र भेजा. इस पत्र में उन्होंने कहा कि किसी पूरे राजनीतिक संगठन पर प्रतिबंध लगाना लाखों मतदाताओं को उनके वोट के अधिकार से वंचित कर सकता है.अमेरिकी सांसदों ने यह पत्र ऐसे समय में भेजा है जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने जुलाई विद्रोह के बाद अवामी लीग और उसकी छात्र इकाई बांग्लादेश छात्र लीग पर प्रतिबंध लगा रखा है. सांसदों ने स्पष्ट किया कि वे राष्ट्रीय संकट के दौरान अंतरिम सरकार की भूमिका को समझते हैं, लेकिन किसी पार्टी को सामूहिक रूप से दोषी ठहराना बुनियादी मानवाधिकारों और व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी के सिद्धांत के खिलाफ है.पत्र में यह भी चेतावनी दी गई कि राजनीतिक गतिविधियों पर रोक और इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) को दोबारा उसी पुराने स्वरूप में शुरू करना चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकता है.
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 22 दिसंबर को कड़ा बयान देते हुए कहा कि अवामी लीग के बिना चुनाव चुनाव नहीं बल्कि ‘राजतिलक’ होगा. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी पार्टी पर प्रतिबंध बरकरार रहा तो लाखों लोग मतदान से दूर रहेंगे और ऐसी सरकार को नैतिक वैधता नहीं मिलेगी. हसीना ने मौजूदा हिंसा, अल्पसंख्यकों पर हमलों और उस्मान हादी की हत्या के लिए यूनुस सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि भारत समेत पड़ोसी देश बांग्लादेश की अराजकता को चिंता के साथ देख रहे हैं.
