नई दिल्ली। दिल्ली लाल किला बम विस्फोट मामले की जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है कई किरदार उभरकर सामने आए रहे हैं। दिल्ली लाल किला बम विस्फोट घटना में आतंकी डॉक्टरों का नेटवर्क सामने आया है। भारत में अब तक कई तरह के आतंकी मॉड्यूल देखे गए हैं लेकिन दिल्ली में हुए बम धमाके के बाद एक ऐसा मॉड्यूल सामने आया है जिसने सभी को चौंकाकर रख दिया। आतंकी डॉक्टरों की फौज और उनके मददगार स्लीपर सेल मॉड्यूल के संदिग्ध शामिल हैं। डॉक्टरों का ब्रेनवॉश कर उन्हें आतंक की राह में लाने वाले दो मौलवी भी जम्मू.कश्मीर और फरीदाबाद पुलिस के शिकंजे में आ गए हैं। इंडिया गेट, लाल किला 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह जैसे बड़े टारगेट इन आतंकियों ने चुने थे दावा है कि वो 26 11 से भी बड़ा हमला करने की फिराक में थे लेकिन जैश ए मोहम्मद की साजिश बेनकाब हो गई जैश ए मोहम्मद के इस नए मॉड्यूल में अब तक करीब 20 लोग गिरफ्तार या हिरासत में हैं फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े डॉ आदिल अहमद डॉ मुजम्मिल और डॉ शाहीन की गिरफ्तारी हो चुकी है जबकि उनका चौथा साथी डॉक्टर उमर मोहम्मद जिसे लाल किला बम ब्लास्ट का संदिग्ध हमलावर बताया जा रहा है। पांच गिरफ्तारी जम्मू कश्मीर से हुई जिनके नाम आरिफ यासिर मकसूद इरफान और जमीर हैं। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से अनंतनाग के डॉ आदिल अहमद की 26 अक्टूबर को गिरफ्तारी, फरीदाबाद से डॉ मुजम्मिल शकील अहमद और डॉक्टर शाहीन शाहिद की गिरफ्तारी। लखनऊ से डॉ शाहीन के भाई डॉ परवेज की गिरफ्तारी, आतंकी डॉक्टरों के मॉड्यूल में शामिल डॉ सज्जाद की भी गिरफ्तारी जम्मू कश्मीर से की गई। अल फलाह यूनिवर्सिटी की लैब के 4 कर्मी भी हिरासत में लिए गए। अल फलाह यूनिवर्सिटी की 17 नंबर बिल्डिंग का रूम नंबर 13 इन आतंकियों का सीक्रेट ठिकाना था जहां आदिल मुजम्मिल उमर शाहीन और अन्य मददगार मिलते थे पुलवामा के मुजम्मिल के इसी रूम में दिल्ली यूपी के बड़े लोकेशन टारगेट के तौर पर चुने गए। कश्मीर से 3 हैंडलर तारिक उमर व आमिर हिरासत में फरीदाबाद सेक्टर 56 से एक और डॉक्टरों के आतंकी मॉड्यूल में शामिल डॉ उमर मोहम्मद ही शायद कार सवार हमलावर था।
इमाम इरफान अहमद जम्मू कश्मीर पुलिस की गिरफ्त में है। उसने ही फरीदाबाद के आतंकी मॉड्यूल में शामिल अल फलाह यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों का ब्रेनवॉश कर उन्हें आतंक की राह पर धकेला उसे ही इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। इन डॉक्टरों को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर मोड़ा ये इमाम इरफान शोपियां जिले का रहने वाला है। कश्मीर के बोनपुर इलाके में जैश ए मोहम्मद के पोस्टर इसी ने लगवाए थे। खुफिया सूत्रों का कहना है कि मौलवी इरफान अहमद ने इन डॉक्टरों की आतंकी फौज तैयार की। इरफान श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में काम करता था। साथ ही नौगाम की एक मस्जिद में इमाम था। दावा है कि इरफान जैश ए मोहम्मद की शह पर इन मेडिकल छात्रों को इस खतरनाक साजिश से जुड़ने के लिए तैयार किया। डॉ मुजम्मिल शकील और डॉ मोहम्मद उमर को उसने मिशन से जोड़ा। दिल्ली ब्लास्ट केस में शामिल डॉक्टरों के आतंकी मॉड्यूल के संपर्क में रहने वाला डॉ सज्जाद को भी पकड़ा गया है सज्जाद की गिरफ्तारी के दो दिन पहले ही शादी हुई थी वो डॉ उमर और मुजम्मिल के संपर्क में था। दिल्ली ब्लास्ट में कार सवार हमलावर डॉ उमर मोहम्मद बताया जा रहा है। फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में उमर पढ़ाता था। उमर ही वो संदिग्ध हमलावर था जिसने लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास कार रोकने के बाद धमाका किया। पुलवामा का रहने वाले उमर नबी मुजम्मिल के साथ तुर्की भी गया था। उमर भी अल फलाह फरीदाबाद में पढ़ाता था। उमर ने एमडी मेडिसिन किया था। श्रीनगर और अनंतनाग में सीनियर रेजिडेंट रहा उमर फिर फरीदाबाद शिफ्ट हो गया। आदिल अनंतनाग का सीनियर डॉक्टर है। आदिल ने 19 अक्टूबर को श्रीनगर में जैश के पोस्टर लगाए थे। धमाके का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। सहारनपुर से 6 नवंबर को उसकी गिरफ्तारी हुई थी। अनंतनाग में उसके यहां से राइफल मिली थी। उसी ने मुजम्मिल का सुराग दिया थां।
फरीदाबाद से डॉक्टर शाहीन को जैश ए मोहम्मद की भारत में महिला विंग और भर्ती करने का जिम्मा सौंपा गया था। जमात उल मोमिनात महिला विंग है। जैश के सरगना मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर ने उसे ये जिम्मेदारी सौंपी थी। सादिया का पति यूसुफ अजहर कंधार विमान अपहरण कांड में एक मास्टरमाइंड था। आदिल की निशानदेही पर डॉण् मुजम्मिल को जम्मू.कश्मीर और हरियाणा की पुलिस टीम ने पकड़ा फरीदाबाद के धौज इलाके में उसके कमरे से 360 किलो विस्फोटक राइफलें और टाइमर वगैरा मिला था फतेहाबाद तंग गांव में उसके एक और ठिकाने से 2550 किलो के करीब विस्फोटक अमोनियम नाइट्रेट का जखीरा मिला था पुलवामा का मुजम्मिल फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाता था। दिल्ली लाल किला बम धमाके से जुड़े आतंकियों से पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। शीर्ष खुफिया सूत्रों ने बताया कि जैश ने पांच चरणों में आतंकी साजिश का पूरा खाका तैयार किया था आतंकियों ने पैसा जुटाने बारूद इकट्ठा करने से लेकर टारगेट को लेकर पूरा फुल प्रूफ टेरर प्लान अगस्त में बनाया था खुलासा हुआ है कि तीन लाख रुपये में तबाही का सामान खरीदा गया था सीरियल ब्लास्ट के लिए 26 लाख रुपये जुटाए गए थे। छह दिसंबर को छह जगहों पर सीरियल बम धमाकों से दिल्ली और आसपास के इलाकों को दहलाना था। हालांकि लाल किला के नजदीक धमाका होते ही साजिश बेनकाब हो गई। जैश आतंकी लंबे समय से विवादित ढांचा विध्वंस का बदला लेने की बात करते रहे हैं। 30 लाख रुपये डॉ मुजम्मिल डॉ आदिल डॉ उमर और डॉ शाहीन ने जुटाए थे। आतंकी साजिश का ये पूरा पैसा उमर के लिए हवाले किया गया। इतना ही नहीं 26 क्विंटल एनपीके फर्टिलाइजर विस्फोटक तीन लाख रुपये में खरीदा गया था। हरियाणा के नूंह और गुरुग्राम जैसे बाजारों से उर्वरक के तौर पर इसे खरीदा इस फर्टिलाइजर और केमिकल का आईईडी के तौर पर इस्तेमाल किया गया।
भारत में अब तक कई तरह के आतंकी मॉड्यूल देखे गए हैं लेकिन दिल्ली में हुए बम धमाके के बाद एक ऐसा मॉड्यूल सामने आया है जिसने सभी को चौंकाकर रख दिया इस बार आतंकी घटना को अंजाम देने और साजिश करने वाले कोई और नहीं बल्कि पेश से डॉक्टर थे जिस कार में ब्लास्ट हुआ उसे चलाने वाला उमर मोहम्मद भी एक डॉक्टर था अब कई लोगों का ये कहना है कि आखिर इतने पढ़े.लिखे लोग आतंकियों का साथ कैसे दे सकते हैं और कैसे इतनी बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है इन डॉक्टरों से पहले भी कई ऐसे खूंखार आतंकी सामने आए हैं जो काफी ज्यादा पढ़े.लिखे थे। अमेरिका पर इतिहास का सबसे बड़ा हमला करने वाला और अलकायदा बनाने वाला ओसामा बिन लादेन भी काफी पढ़ा.लिखा था लेकिन उसके मंसूबे काफी खतरनाक थे ओसामा काफी तेज तर्रार था और पेशे से एक सिविल इंजीनियर था बाद में उसने आतंक के रास्ते को चुना और दुनिया का सबसे खतरनाक संगठन खड़ा कर दिया कई साल बाद 2011 में अमेरिका ने पाकिस्तान में उसे मार गिराया। हिजबुल मुजाहिदीन का सरगना सैयद सलाउद्दीन भी काफी ज्यादा पढ़ा लिखा है और उसने पॉलिटिकल साइंस में मास्टर डिग्री ली है। सैयद सलाउद्दीन मोस्ट वांटेड आतंकी है और कई आतंकी हमलों की साजिश रचने का काम करता है। हाफिज सईद लश्कर.ए.तैयबा के चीफ हाफिज सईद का नाम भी दिल्ली बम धमाके से जुड़ रहा है इस आतंकी सरगना ने भारत में कई बड़े हमलों को अंजाम दिया है हाफिज सईद के पास मास्टर डिग्री है यानी ये आतंकी भी पढ़ा लिखा है।याकूब मेमन मुंबई में 1993 में हुए बम धमाकों के मास्टरमाइंड याकूब मेमन ने भी कई डिग्रियां ली थीं और वो पेशे से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट था। अफजल गुरु 2001 में भारतीय संसद पर हमले के मास्टरमाइंड अफजल गुरु ने भी दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम की पढ़ाई की थी पुलिस ने उसे कश्मीर से गिरफ्तार किया था जिसके बाद उसे फांसी के फंदे पर चढ़ाया गया।
दिल्ली बम धमाके के बाद अब एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। जम्मू.कश्मीर और फरीदाबाद से गिरफ्तार हुए डॉक्टर आतंकी संगठन अंसार गजवत उल हिंद से जुड़े हुए थे ऐसे में अब लोगों के मन में सवाल है कि आखिर ये नया आतंकी संगठन कौन सा है और इसे किसने शुरू किया था। अंसार गजवत उल हिंद कश्मीर में काम करने वाला एक आतंकी संगठन है 2017 में हिजबुल मुजाहिदीन के पूर्व कमांडर जाकिर रशीद उर्फ जाकिर मूसा ने इसे शुरू किया था इसके बाद इस संगठन में कई लोगों की भर्तियां हुईं हालांकि दो साल बाद 2019 में भारतीय सेना ने जाकिर मूसा को मौत के घाट उतार दिया। इसके अलावा इससे जुड़े कुछ और आतंकियों को भी ढेर किया गया। कमांडरों के मारे जाने के बाद ये संगठन कमजोर हो गया और इससे जुड़े लोग एक्टिव नहीं दिखे 2021 के बाद से माना जा रहा था कि ये संगठन कश्मीर से पूरी तरह खत्म हो चुका है। कई साल बाद नवंबर 2025 में अंसार गजवत.उल.हिंद एक बार फिर एक्टिव हुआ और कश्मीर में इसके एक मॉड्यूल को पकड़ा गया हालांकि इसके मंसूबों का पहले पता नहीं लग पाया फरीदाबाद में जरूर विस्फोटक और हथियार बरामद किए गए लेकिन इनमें से एक आतंकी ने दिल्ली के लाल किले पर आकर ब्लास्ट कर दिया इस धमाके में 12 लोगों की मौत हो गई ।
जांच एजेंसियां जैश ए मोहम्मद के फरीदाबाद मोड्यूल की टेरर फंडिंग की जांच में जुट गई और सामने आई जानकारी के अनुसार डॉक्टर शाहीन सईद को आतंकी संगठन जैश से फंडिंग होती थी। शाहीना जैश के इशारे पर वेस्टर्न यूपी में कई जगह महिला विंग के लिए रिक्रूटमेंट सेंटर खोलने में लगी थी शाहीन सहारनपुर और हापुड़ में मिनी रिक्रूट.कमांड सेंटर के लिए कोई ऐसी जगह ढूंढ रही थी जो शहर से थोड़ा बाहरी इलाके में हो और वहां लोगों की गतिविधियां कम हो। सईद पर भारत में जैश ए मोहम्मद की महिला भर्ती शाखा का हिस्सा होने का आरोप है। कहा जा रहा है कि सईद पाकिस्तान में अपने आका के संपर्क में थी और उसे आतंकवादी गतिविधियों के लिए अधिक से अधिक महिलाओं की भर्ती करने के निर्देश दिए गए थे। सईद ने महाराष्ट्र निवासी जफर हयात से विवाह किया था हालांकि 2015 में दोनों का तलाक हो गया था। तलाक के बाद सईद हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय से जुड़ गई थी और वहां अकेली रह रही थी। संभावना है कि इस दौरान सईद किसी विशेष विचारधारा के प्रभाव में आ गईं। जांच एजेंसियों को शक है कि शाहीन के जरिए ही इस मॉड्यूल को जैश की तरफ से टेरर फंडिंग हो रही थी। लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास सोमवार को एक हुंडई आई20 कार में विस्फोट हुआ था इस धमाके में 12 लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई लोग घायल हुए हैं इस मामले में दिल्ली पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम की धाराएं लगाई हैं।
आतंकी बाबरी का बदला लेना चाहते थे: देशभर में 32 कारों से धमाके की साजिश थी
लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए धमाके की जांच में गुरुवार को बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक आतंकी 6 दिसंबर, यानी बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की बरसी के दिन दिल्ली समेत कई जगह धमाके करना चाहते थे।इसके लिए उन्होंने 32 कारों का इंतजाम किया था। इनमें बम और विस्फोटक सामग्री भरकर धमाके किए जाने थे। इनमें ब्रेजा, स्विफ्ट डिजायर, इकोस्पोर्ट और आई20 जैसी गाड़ियां शामिल थीं। जांच एजेंसियों को अब तक 3 कारें बरामद हो चुकी हैं। चौथी चौथी स्विफ्ट डिजायर की तलाश है।10 नवंबर जिस आई20 कार में धमाका हुआ था, वह इसी सीरियल रिवेंज अटैक का हिस्सा थी। ब्लास्ट से अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 लोग घायल हैं, जिनमें से तीन की हालत नाजुक बताई जा रही है।वहीं, केंद्र सरकार ने दिल्ली कार ब्लास्ट को आतंकी हमला माना है। बुधवार को कैबिनेट मीटिंग में टेरर अटैक पर प्रस्ताव पारित किया गया।पुलिस ने आशंका जताई थी कि दिल्ली धमाके में शामिल आतंकियों के पास एक नहीं, बल्कि दो कारें थीं। बुधवार को इसकी तलाश के लिए दिल्ली के साथ पड़ोसी राज्यों यूपी और हरियाणा में अलर्ट जारी किया गया था। इसके बाद हरियाणा के खंदावली गांव में लावारिस गाड़ी की खबर सामने आई।इस गाड़ी की जांच के लिए NSG बॉम्ब स्क्वाड की टीम पहुंची है। गाड़ी अभी तक पूरी तरह से खोली नहीं गई है। सोर्स के अनुसार गाड़ी जहां मिली, वह उमर के ड्राइवर की बहन का घर था।
दिल्ली ब्लास्ट में 3 खुलासे…पहला: जनवरी में लाल किले की रेकी की थी- दिल्ली को दहलाने की साजिश जनवरी से रची जा रही थी। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल डंप डेटा से पता चला कि फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से गिरफ्तार असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मुजम्मिल गनी और धमाके में कथित रूप से मारे गए डॉ. उमर नबी ने जनवरी में कई बार लाल किले की रेकी की थी। दोनों ने वहां की सुरक्षा-और भीड़ का पैटर्न समझा था। पुलिस को शक है कि आतंकियों की प्लानिंग 26 जनवरी पर लाल किले पर हमले की थी, जो तब नाकाम हो गई।
दूसरा: दिल्ली में 6 दिसंबर को हमले का प्लान था – नबी दिल्ली में 6 दिसंबर को हमला करना चाहता था, लेकिन मुजम्मिल की गिरफ्तारी से प्लान बिगड़ गया। यह बात 8 आरोपियों से पूछताछ में सामने आई हैं। इस अंतरराज्यीय मॉड्यूल का केंद्र फरीदाबाद में था। गिरफ्तार आतंकियों में 6 डॉक्टर हैं। श्रीनगर का रहने वाला एक अन्य संदिग्ध डॉ. निसार फरार है। वह डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ कश्मीर का अध्यक्ष भी है। अलफलाह में पढ़ा रहा था। जम्मू-कश्मीर सरकार ने डॉ. निसार को बर्खास्त कर दिया है।
तीसरा: खाद की बोरी बता विस्फोटक जुटा रहा था गनी– फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में काम कर रहा कश्मीरी डॉ. मुजम्मिल गनी खाद की बोरियां बताकर किराए के कमरे में विस्फोटक सामग्री जमा कर रहा था। 20 दिन पहले मुजम्मिल कमरे में कुछ बोरियां रखने आया था, तब पड़ोसियों ने उससे पूछा था कि इसमें क्या है? जवाब में मुजम्मिल ने कहा था कि ये खाद के कट्टे हैं। इन्हें कश्मीर ले जाना है। इस कमरे से 100 मीटर दूर एक मकान में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। पुलिस ने फुटेज जब्त कर लिए हैं।
एक और कार बरामद: अल फलाह यूनिवर्सिटी में खड़ी मिली ब्रेजा, गाड़ी शाहीन के नाम इस्तेमाल कर रहा था कोई और
आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की कथित कमांडर डॉ. शाहीन सईद की दूसरी कार अल फलाह यूनिवर्सिटी में गुरुवार को मिली है। डॉ. शाहीन ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के ही ब्लॉक नंबर 15 के फ्लैट नंबर 32 के पते पर सितंबर 2025 में ये कार खरीदी थी। जम्मू कश्मीर पुलिस से मिले इनपुट के बाद फरीदाबाद पुलिस की टीम ने यूनिवर्सिटी परिसर में कार ढूंढी और इसके आस-पास के इलाके को सील किया गया है। बम निरोधक दस्ता से भी कार की जांच कराई गई है।
शाहीन की दूसरी कार बरामद
इस सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल के तहत लखनऊ से गिरफ्तार की गई डॉ. शाहीन सईद से जम्मू कश्मीर पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है। इसी पूछताछ में पता चला है कि वो आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की कमांडर है। धौज स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी परिसर से 30 अक्तूबर को गिरफ्तार किए गए डॉ. मुज्जमिल अहमद गनेई उर्फ मुसैब से पूछताछ के बाद 8 नवंबर को इस केस में पहली स्विफ्ट कार बरामद हुई थी। ये कार भी डॉ. शाहीन के नाम पर थी और उसने डॉ. मुज्जमिल को ये कार प्रयोग करने के लिए दी थी। इसी कार से पहली बार 8 नवंबर को क्रिनकॉव राइफल, पिस्टल, मैगजीन व गोलियां मिले थे।
क्लियरेंस के बाद ही कार को हाथ लगाएगी पुलिस
अब इस मामले में डॉ. शाहीन के नाम पर रजिस्टर्ड दूसरी ब्रेजा कार मिली है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो जम्मू कश्मीर पुलिस की पूछताछ में डॉ. शाहीन ने खुलासा किया है कि दोनों ही कारों का प्रयोग विस्फोटक लाकर फरीदाबाद में छुपाने में किया गया है। इसी वजह से पुलिस अभी कार को छू नहीं रही है। कार की जांच के लिए गुरुवार दोपहर बाद लगभग 4 बजे बम निरोधक दस्ता को यूनिवर्सिटी परिसर में बुलाया गया। बम निरोधक दस्ते की क्लियरेंस के बाद ही कार को यहां से जब्त कर टीम ले जाएगी।
फरीदाबाद से खरीदी गई थी i20 कार
उधर लाल किले में हुए ब्लास्ट में इस्तेमाल की गई कार को फरीदाबाद से खरीदा गया था। आतंकियों ने ओएलएक्स के जरिये इसका सौदा किया था। इसके बाद वह फरीदाबाद आकर उसको ले गए थे। इस बात की पुष्टि फरीदाबाद के रॉयल कार जोन के मालिक अमित पटेल ने की। उन्होंने बताया कि कार खरीदने के लिए जो आई डी दी गई। उनमें जो पता था वो पुलवामा का था। उन्होंने यह भी कहा कि कार नाम कराने के लिए दिए गए समय से पहले ही दिल्ली में ब्लास्ट कर दिया गया।
आधार और दिया था पैन कार्ड
फरीदाबाद सेक्टर-37 स्थित रॉयल कार जोन के मालिक अमित पटेल ने बताया कि 29 अक्तूबर को ओएलएक्स के माध्यम से एक ग्राहक उनके पास आया था। उस ग्राहक को उनके ऑफिस स्टाफ सोनू ने हैंडल किया। ग्राहक ने हुंडई आई 20 कार मांगी थी। जिनको सोनू ने (मॉडल 2013 या 2014) का मॉडल दिखाया। उसके बाद उनको ग्राहक ने गाड़ी देखने के बाद तुरंत खरीदने का निर्णय लिया। कार को खरीदने के लिए जो दस्तावेज दिए गए उसमें उन्होंने आधार कार्ड और पैन कार्ड दिया था। जिस पर जम्मू-कश्मीर के पुलवामा का दर्ज था।
आरसी को ट्रांसफर के लिए मांगे थे 25 दिन
अमित पटेल ने बताया उनके स्टाफ ने डॉक्यूमेंटेशन पूरा करने के बाद 29 अक्टूबर की शाम करीब 4 बजे गाड़ी आमिर और रशीद नाम के दो व्यक्ति को सौंप दी। उनका कहना है अगर उनको थोड़ा भी शक होता तो वह गाड़ी नहीं देते। आमिर ने गाड़ी की आरसी को ट्रांसफर कराने के लिए 25 दिन का टाइम मांगा था। उन्होंने बताया कि जिस कार को बेचा गया, वह पहले से सेकेंड ओनर के नाम पर थी और आरसी में भी उसी का नाम दर्ज था। इसलिए आमिर रशीद को कहा गया कि 20-25 दिन बाद आरसी अपने नाम ट्रांसफर कराने के लिए आ जाएं।
ऑटो से आए थे कार लेने
अमित पटेल ने बताया कि कार का इंश्योरेंस की डेट अभी बची हुई थी। हालांकि उसका पॉल्यूशन सर्टिफिकेट एक्सपायर हो गया था। इस वजह से उन्होंने नजदीक के ही पेट्रोल पंप में उसका पॉल्यूशन सर्टिफिकेट भी बनवाया। इसके बाद वह कार लेकर चले गए। उन्होंने बताया कि कि आमिर और राशिद नाम के दो युवक कार खरीदने के लिए आए थे। वह दोनों एक ऑटो में गाड़ी लेने के लिए आए थे। उनके साथ एक अन्य व्यक्ति भी था लेकिन वह ऑटो से उतरकर नहीं आया। इसलिए वह उसको नहीं पहचान पाए।
