बरेली 7 नवबंर। भारतीय हॉकी के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में उत्तर प्रदेश में भी अनेक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। बरेली के डोरीलाल स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित शताब्दी समारोह में बरेली के दिग्गज हॉकी वरिष्ठ हॉकी खिलाडियों का सम्मान किया गया। इस मौके पर बरेली हॉकी के गौरवशाली इतिहास को याद किया गया। भारतीय हॉकी मैं बरेली के योगदान को याद किया गया । इस कार्यक्रम में बालिकाओं बालकों और सीनियर खिलाड़ियों के बीच मैच हुए और सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार और प्रमाण पत्र दिए गए। आयोजन का उद्देश्य भारतीय हॉकी के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में। समापन केक काटकर समारोह की शुरुआत हुई और खिलाड़ियों को प्रमाण पत्र व पुरस्कार दिए गए।इस मौके पर बरेली के मेयर उमेश गौतम भी उपस्थित थे उन्होंने पूर्व और वर्तमान हॉकी खिलाड़ियों का अभिनंदन किया। हॉकी इंडिया के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में तीन मैच खेले गए। एक बालिकाओं का एक बालकों का तथा एक सीनियर खिलाड़ियों के बीच मुकाबला हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत केक काटकर की गई। समारोह में प्रतिभागी खिलाड़ियों को प्रमाण पत्र व पुरस्कार प्रदान किए गए। यह आयोजन गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होने के लिए किया गया। हॉकी एसोसिएशन के सचिव मोण् वसीम खान क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी चंचल मिश्रा समेत अन्य लोग रहे।
श्याम मनोहर वर्मा का डोरीलाल स्पोर्ट्स स्टेडियम में हार फूल मालाओं के साथ किया गया स्वागत। सम्मान स्वरूप उन्हें बैच लगाया गया

बरेली की हॉकी का इतिहास शानदार रहा है। बरेली ने उत्तर प्रदेश को देश को कई शानदार खिलाड़ी दिए;श्याम मनोहर वर्मा
करीब 70 के दशक के बरेली के हॉकी के दिग्गज खिलाड़ी और उस दौर में आगरा यूनिवर्सिटी की हॉकी टीम के कप्तान रहे बरेली के श्याम मनोहर वर्मा का डोरीलाल स्पोर्ट्स स्टेडियम में हार फूल मालाओं के साथ स्वागत किया गया। सम्मान स्वरूप उन्हें बैच लगाया गया।श्याम मनोहर वर्मा ने कहा की बरेली की हॉकी का इतिहास शानदार रहा है। बरेली ने उत्तर प्रदेश को देश को कई शानदार खिलाड़ी दिए। बरेली में हॉकी की अपार संभावनाएं हैं। क्लब हॉकी लीग को फिर से बढ़ावा मिलना चाहिए। श्याम मनोहर वर्मा ने कहा एस्ट्रो टर्फ ने भारतीय हॉकी के स्वरूप को बदला। इसका नुकसान भारत की कलात्मक हॉकी की शैली को हुआ।हॉकी ने हमें अनुशासन सम्मान और देशप्रेम सिखाया है। श्याम मनोहर वर्मा ने उस दौर में आगरा यूनिवर्सिटी की हॉकी टीम की कप्तानी की जब बरेली, अलीगढ, नैनीताल, मुरादाबाद आदि जिलों की एक आगरा यूनिवर्सिटी थी। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय की स्थापना 1975 में एक सम्बद्ध विश्वविद्यालय के रूप में की गयी थी। तत्कालीन आगरा विश्वविद्यालय इस क्षेत्र की साक्षरता दर में आवश्यकता के अनुरूप बृद्धि करने की सामर्थ्य नहीं रखता था अतरू राष्ट्रीय साक्षरता दर के स्तर पर लाने की दृष्टि से इस विश्वविद्यालय की नींव रखी गयी। सन् 1985 में जब चार विभाग इसमें और बढ़ाने पडे तब इसे आवासीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया गया। इसके बाद 1987 में तीन विभाग इसमें और बढ गये। अगस्त 1997 में महात्मा ज्योतिबा फुले के साथ जोडते हुए इसका नाम बदलकर एमजेपी रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय कर दिया गया।

एंडरसन लिस्ले फ्रैंक, झम्मन लाल शर्मा और याकूब खान जैसे सितारों ने भारत के हॉकी इतिहास में सुनहरे अध्याय लिखे
यहां से हॉकी की प्रतिभाएं निखरकर निकलीं और राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचीं। उस दौर में हॉकी का जुनून हर गली मोहल्ले में देखा जा सकता था। यहीं से एंडरसन लिस्ले फ्रैंक झम्मन लाल शर्मा और याकूब खान जैसे सितारों ने अपने खेल की शुरुआत की और भारत के हॉकी इतिहास में सुनहरे अध्याय लिखे। 11 जुलाई 1942 को शहर में जन्मे एंडरसन लिस्ले फ्रैंक भारतीय हॉकी टीम में मिडफील्डर रहे हैं। लेफ्ट.हाफ पोजीशन पर खेलने वाले फ्रैंक ने वर्ष 1962 1963 और 1965 में राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीती। 1965 में जापान दौरे के लिए चुने जाने के बाद उनका अंतरराष्ट्रीय करियर शुरू हुआ। उन्होंने यूरोप और एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 1966 में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के अहम सदस्य रहे। साथ ही उन्होंने भारतीय रेलवे में भी सेवाएं दीं।

1932 में जन्मे झम्मन लाल शर्मा भारतीय हॉकी के प्रसिद्ध खिलाड़ी और कोच रहे। उन्होंने 1960 के रोम ओलंपिक में भारत को रजत पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। बतौर खिलाड़ी अपनी टीम को अहम उपलब्धियां दिलाने के बाद उन्होंने कोचिंग और प्रबंधन में भी योगदान दिया और एशियाई खेलों में भारतीय टीम के प्रबंधक रहे। भारत सरकार की ओर से उन्हें वर्ष 1990 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा जा चुका है।शहर की गीता अरोरा शर्मा ने वर्ष 1983 में हॉकी करियर की शुरुआत की। उन्होंने लखनऊ स्पोर्ट्स हॉस्टल में प्रशिक्षण प्राप्त किया और आठ सीनियर नेशनल के साथ कई अंतरराष्ट्रीय सीरीज खेलीं। वर्ष 1992 में मलेशिया में एशिया कप में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने शहर और देश का गौरव बढ़ाया। गीता ने इंडियन रेलवे की टीम का भी प्रतिनिधित्व किया है।रजनी दीक्षित ने वर्ष 1984 में 37वीं सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भाग लिया और 1985 में कोयंबटूर में कांस्य पदक जीता। इसके बाद उन्होंने भारत.चीन हॉकी टेस्ट सीरीजए सिंगापुर में चैंपियनशिपए इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय गोल्ड कप और एशिया कप में देश का प्रतिनिधित्व किया और कई ऐतिहासिक उपलब्धियां अपने नाम की। उन्हें वर्ष 2020 में रानी लक्ष्मीबाई अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है।
