बरेली। बरेली हिंसा को लेकर पुलिस की जांच लगातार जारी है. पुलिस ने हिंसा की जांच के दौरान अभी तक कुल 62 लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें मौलाना तौकीर रजा, डॉ. नफीस और नदीम भी शामिल है, जो कि इस हिंसा के मास्टरमाइंड बताए जा रहे हैं. पुलिस ने अभी तक मौलाना तौकीर के करीबियों की 150 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है. वहीं अब प्रशासन तौकीर की बेनामी संपत्तियों पर कब्जा करने की तैयारी कर रही है. पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है. बरेली हिंसा को लेकर सीएम योगी भी सख्त हैं.मुसलमानों के हित का ढोंग करने वाला मौलाना तौकीर रजा मजार की आड़ में 74 दुकानें बनवाकर किराया खा रहा था। नगर निगम ने सोमवार को इन दुकानों और तौकीर के संगठन इत्तेहाद ए मिल्लत काउंसिल (आइएमसी) का कार्यालय सील कर दिया।दूसरी ओर बरेली विकास प्राधिकरण की टीम ने उसके करीबियों की छह संपत्तियां चिह्नित कर लीं, जिनका निर्माण मानक के अनुरूप नहीं किया गया। दिनभर अलग विभागों की कार्रवाई के बीच पुलिस ने आइएमसी के पूर्व जिलाध्यक्ष नदीम समेत उपद्रव के 28 अन्य आरोपितों को जेल भेज दिया। सतर्कता के दृष्टिगत प्रशासन ने इंटरनेट बंदी 24 घंटे के लिए बढ़ा दी है। अब 30 सितंबर की रात 12.30 बजे बाद इंटरनेट सेवा सुचारू होगी।
आइएमसी अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खां ने कानपुर के ‘आई लव मोहम्मद’ विवाद के बहाने शुक्रवार को बरेली में उपद्रव कराया था। उसके उकसावे पर आई भीड़ ने पथराव, फायरिंग की, जिसमें 22 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। अब तक मौलाना तौकीर समेत 61 आरोपितों को जेल व छह को थाने से जमानत मिल चुकी है। अब प्रशासन तौकीर व उसके गुर्गों की संपत्तियों की जांच करा रहा है।अधिकारियों के अनुसार, 1992 में नॉवल्टी चौराहा (मुख्य बाजार) पर पहलवान साहब की मजार की देखरेख करने वाले व्यक्ति को तौकीर के लोगों ने साजिशन हटाकर अपना करीबी बैठा दिया। इसके बाद मजार की आड़ में दुकानें बनवाई जाने लगीं, जोकि अब तीन मंजिल बाजार के स्वरूप में हैं। तौकीर पर्दे के पीछे रहता, जबकि उसका करीबी नफीस दुकानों से किराया वसूलकर उसे पहुंचाता था। कुछ दुकानों की बिना कागज बिक्री भी कर दी गई थी। 1995 में नगर निगम ने नोटिस जारी किया कि उसकी भूमि पर अवैध दुकानें व मजार बनी है दुकानदारों को चेतावनी दी गई कि कब्जा नहीं हटाया तो ध्वस्त कर दिया जाएगा, मगर कोई फर्क नहीं पड़ा। 2018 नोटिसों के विरुद्ध दुकानदार हाईकोर्ट गए, मगर वहां से आदेश हुआ कि मजार को छोड़ शेष निर्माण पर नगर निगम अपने स्तर से निस्तारण करे। इसके बाद से अधिकारियों की इच्छाशक्ति की कमी से कब्जे नहीं हटाए जा चुके, नगर निगम 60 नोटिस जारी करने तक सीमित रह गया। अब उपद्रव के बाद शासन ने सख्ती की, तब प्रशासन ने तौकीर व उसके मददगारों, गुर्गों पर सख्ती शुरू की।
सोमवार दोपहर 12 बजे नगर निगम की टीम ने दुकानदारों से कहा कि तीन घंटे के अंदर सामान हटा लें। इसके बाद दोपहर तीन बजे भारी फोर्स की मौजूदगी में 74 दुकानों पर सील लगाकर नगर निगम ने अपना कब्जा ले लिया। इसी बाजार में तौकीर के करीबी आइएमसी प्रवक्ता नफीस ने कार्यालय भी बना लिया था। उसका ताला तोड़ने पर कुछ कागज बरामद हुए, कुछ जलाए जा चुके थे। दो बड़े जनरेटर भी बरामद किए गए। शाम छह बजे टीम कार्रवाई कर लौट गई।बरेली विकास प्राधिकरण की टीम दोपहर को फाइक इन्क्लेव पहुंची। मौलाना तौकीर पुलिस से बचकर गुरुवार रात से शनिवार तड़के तक इसी कालोनी में आइएमसी के पूर्व जिलाध्यक्ष फरहत के घर रुका था। प्राधिकरण ने फरहत, साजिद व रेहान के मकानों का चिह्नीकरण किया। आशंका जताई जा रही कि तीनों भवन मानचित्र के विपरीत बने हैं। इसकी पुष्टि होने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है। इसी तरह नफीस के ब्लू मून होटल, रजा पैलेस समेत तीन भवनों का चिह्नीकरण किया गया।
दरगाह आला हजरत, तौकीर रजा .राजनीतिक महत्वकांक्षा
सुन्नी बरेलवी मुस्लिमों का सबसे बड़ा केंद्र दरगाह आला हजरत, जहां पर हाजिरी देकर चादरपोशी और गुलपोशी करते हैं। करोड़ों की संख्या में देश-दुनिया में अनुयायी हैं, जिसमें लाखों लोग तो इमाम अहमद रजा खां फाजिल ए बरेलवी के उर्स ए रजवी में शामिल होने के लिए आ जाते हैं, जहां से धार्मिक एजेंडा जारी किया जाता है, जिस पर सभी अमल करते हैं।दरगाह से जुड़े होने के नाते मौलाना तौकीर रजा का सामाजिक कद शुरू से बड़ा रहा। यही वजह रही कि उनके मन में राजनीतिक इच्छाओं ने जन्म लिया और अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए इत्तेहादे मिल्लते कौंसिल (आईएमसी) बनाई, जिसको बनाने का उद्देश्य मुस्लिमों को एकजुट करना था, लेकिन बाद में यह राजनीतिक दल केवल भड़काऊ बयान देने के दायरे तक सिमटकर रह गया। अभी जो बवाल हुआ, उसमें आईएमसी प्रमुख समेत बड़ी संख्या में पदाधिकारियों को पकड़ा गया।मौलाना तौकीर रजा बदायूं जिले में पंचायत चुनाव से लेकर बिनावर विधानसभा से विधायक बनने के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके। इस वजह से राजनीतिक महत्वकांक्षा अधूरी रह गई।
राजनीतिक पार्टी बनाने से लेकर सत्ता का स्वाद चखने के लिए मौलाना के प्रयास जारी रहे। मौलाना तौकीर रजा पर वर्ष 2010 में हिंदुओं और मुसलमानों के बीचे दंगा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन कुछ दिनों के बाद ही उनको रिहा कर दिया गया था।इसके बाद मौलाना तौकीर रजा को अक्सर भड़काऊ बयान जारी के लिए खास तौर पर पहचाना जाने लगा। कई बार ऐसा हुआ कि मौलाना के बयानों की वजह शहर में बड़ी संख्या में भीड़ एकत्र हुई, जिसके बाद भारी पुलिस बल लगाना पड़ा।मौलाना की राह पर उनके बाकी नेता भी चल पड़े। आईएमसी के राष्ट्रीय महासचिव व प्रवक्ता नफीस खान ने बीते दिनों इंस्पेक्टर के हाथ काटने की धमकी दी। इसके बाद ”आइ लव मोहम्मद” की आड़ में अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा की रोटियां सेंकने के लिए तूल देना शुरू कर दिया।मौलाना के 26 सितंबर को जुमे की नमाज के बाद इस्लामिया ग्राउंड में जमा होकर ज्ञापन देने का ऐलान पर पुलिस प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी।मौलाना तौकीर रजा ने कार्यक्रम करने का निर्णय जारी रखा, लेकिन गुरुवार रात को मौलाना के कार्यक्रम के निरस्त होने का पत्र प्रसारित हो गया, लेकिन शुक्रवार सुबह मौलाना ने वीडियो प्रसारित करके इस्लामिया मैदान में भीड़ को एकत्र होने का संदेश प्रसारित रखा।
मौलाना तौकीर रजा का आपराधिक इतिहास
मौलाना तौकीर रजा का आपराधिक इतिहास लंबा है। वर्ष 1982 से मौलाना के विरुद्ध मुकदमे पंजीकृत होना शुरू हो गए थे। पूर्व में 10 मुकदमे पंजीकृत हो चुके हैं। वह वर्ष 2010 के दंगे में भी आरोपित है। इसके बाद भी पूर्व की सरकारों में वह जेल जाने से बचता रहा। इसी बात से हर बार मौलाना की हिम्मत बढ़ती रही और पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाता गया। इस बार भाजपा सरकार में मौलाना ने जब फिर से उपद्रव कराया तो महंगा पड़ गया। उपद्रव की रात ही पुलिस ने मौलाना को खींचकर लाई और भोर में जेल भेज दिया। मौलाना तौकीर रजा के विरुद्ध सबसे पहले वर्ष 1982 में दंगा कराने की प्राथमिकी कोतवाली में पंजीकृत हुई। इसके बाद दूसरी प्राथमिकी 1987, तीसरी प्राथमिकी 1988, चौथी प्राथमिकी फिर दंगे की 1996 में पंजीकृत की गई। इसके बाद पांचवीं प्राथमिकी 2000, छठी प्राथमिकी 2007, सातवीं प्राथमिकी 2010 में प्रेमनगर थाने में दंगे की, आठवीं प्राथमिकी 2019 में कोतवाली में, नौ प्राथमिकी संभल में वर्ष 2020 में पंजीकृत की गई। इसके बाद दसवीं प्राथमिकी वर्ष 2023 में फरीदपुर थाने में पंजीकृत की गई।
