नई दिल्लीः भारत के इतिहास में 13 मई का अपना खास मुकाम है। देश के लोकतांत्रिक इतिहास में यह दिन मील का पत्थर है। स्वतंत्र भारत का पहला संसद सत्र 13 मई, 1952 से आहूत किया गया था। तीन अप्रैल, 1952 को पहली बार उच्च सदन यानी राज्यसभा का गठन किया गया और इसका पहला सत्र 13 मई, 1952 को आयोजित किया गया। इसी तरह 17 अप्रैल, 1952 को पहली लोकसभा का गठन किया गया, जिसका पहला सत्र 13 मई, 1952 को आहूत किया गया।
भारतीय संसदीय प्रणाली की औपचारिक शुरुआत
स्वतंत्र भारत का पहला संसद सत्र भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण रहा है। यह सत्र 13 मई 1952 को शुरू हुआ था और इसने भारतीय संसदीय प्रणाली की औपचारिक शुरुआत की। असल में, 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ, और तब तक संविधान निर्माण की प्रक्रिया चल रही थी। 26 जनवरी 1950 को भारत एक संप्रभु गणराज्य बना और भारतीय संविधान लागू हुआ। इसके बाद पहले आम चुनाव 1951-52 में कराए गए, जो अक्टूबर 1951 से फरवरी 1952 तक चले।
यह संसद भारत की जनता की आवाज़ है-जवाहरलाल नेहरू
पहला संसद सत्र 13 मई 1952 को संसद भवन, नई दिल्ली में आयोजित हुआ। यह सत्र भारत की पहली लोकसभा और पहली राज्यसभा की संयुक्त बैठक के रूप में हुआ। पहली लोकसभा की कुल सीटें 489 थीं और लगभग 17.3 करोड़ लोगों ने मतदान किया। निर्वाचित सांसदों में 401 पुरुष और 22 महिलाएं थीं। पहले लोकसभा अध्यक्ष जी.वी. मावलंकर बने। भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस सत्र की शुरुआत में ऐतिहासिक भाषण दिया और कहा, “हम एक नया युग शुरू कर रहे हैं — यह संसद भारत की जनता की आवाज़ है।”
भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में मील का पत्थर
इस संसद में सबसे वरिष्ठ सांसद वृंदावन प्रसाद मिश्र (86 वर्ष) थे, और सबसे युवा सांसद संध्या राय (25 वर्ष) थीं। कार्यवाही हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में होती थी। राज्यसभा की पहली बैठक भी 13 मई 1952 को हुई थी, और इसके पहले सभापति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन बने, जो देश के पहले उपराष्ट्रपति भी थे। यह पहला चुनाव और संसद सत्र था जिसमें दलित, महिला, गरीब और अल्पसंख्यकों ने बड़े पैमाने पर भाग लिया। यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के संवैधानिक और वैधानिक शुरुआत का प्रतीक था। 13 मई 1952 को शुरू हुआ संसद सत्र भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में मील का पत्थर है। यह न सिर्फ भारतीय गणराज्य की नींव को मजबूत करता है बल्कि लोकतंत्र, समावेशिता और नागरिक अधिकारों की स्थापना का प्रतीक भी है।
पहली लोकसभा के चुनाव 25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 के बीच कराए गए थे. उस समय लोकसभा में कुल 489 सीटें थीं लेकिन संसदीय क्षेत्रों की संख्या 401 थी.
लोकसभा की 314 संसदीय सीटें ऐसी थीं जहां से सिर्फ़ एक-एक प्रतिनिधि चुने जाने थे.
वहीं 86 संसदीय सीटें ऐसी थी जिनमें दो-दो लोगों को सांसद चुना जाना था. वहीं नॉर्थ बंगाल संसदीय क्षेत्र से तीन सांसद चुने गए थे.
किसी संसदीय क्षेत्र में एक से अधिक सदस्य चुनने की यह व्यवस्था 1957 तक जारी रही.
लोकसभा की बेवसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक पहली लोकसभा 17 अप्रैल,1952 को अस्तित्व में आई थी. इसकी पहली बैठक 13 मई, 1952 को आयोजित की गई थी.
गणेश वासुदेव मावलंकर पहली लोकसभा के अध्यक्ष थे. वो 15 मई,1952 से 27 फरवरी,1956 तक इस पद पर रहे.
पहली लोकसभा के उपाध्यक्ष एम अनंतशयनम अय्यंगर थे. उनका कार्यकाल 30 मई,1952 से सात मार्च, 1956 तक था.
