इंदौर . देश के सबसे साफ शहर का तमगा लगाने वाला इंदौर इतना गंदा और इतना जहरीला है कि पानी में मिले उस जहर की वजह से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है. पांच से ज्यादा लोग गंभीर रूप से बीमार हैं और 1400 से ज्यादा लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं.अभी तक अपनी सफाई पर इतराते इस शहर में हुई मौतों ने सबको झकझोरकर रख दिया है, जिसने कई सवाल खड़े किए हैं कि इतनी सफाई वाले शहर में जहर आया कैसे, आखिर कैसे पानी की पाइप लाइन और शहर की सीवर लाइन एक हो गई, आखिर इस जहर का जिम्मेदार कौन है और आखिर इस पानी में जहर के नाम पर ऐसा क्या था कि लोगों को इलाज के बाद भी बचाया नहीं जा सका. सभी सवालों का जवाब जानने की कोशिश करेंगे.
पानी लोगों के घरों में नलों के जरिए सप्लाई हुआ
लगातार सात सालों तक देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा हासिल करने वाले मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा में नर्मदा नदी की पाइपलाइन में ड्रेनेज लाइन का पानी मिल जाने से सप्लाई का पानी गंदा हो गया.स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि इंदौर के इस इलाके में अब तक14 लोगों की मौत हुई है. वहीं राज्य सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आज माना है कि आठ-नौ मौतें हुई हैं.मामने की जांच के लिए राज्य सरकार ने एक कमिटी का गठन किया है.दूषित पानी से बीमार कई लोगों को अलग-अलग सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती किया गया है.इंदौर शहर को पीने का पानी मिलता है नर्मदा नदी से. इंदौर से करीब 70-80 किलोमीटर दूर खरगौन जिले के जालौद गांव के पास नर्मदा नदी से पानी निकाला जाता है और उसे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में ट्रीट करने के बाद पाइपलाइन के जरिए इंदौर शहर में पहुंचाया जाता है. नर्मदा वाटर प्रोजेक्ट के तहत ऐसी पाइपलाइन का जाल पूरे शहर में बिछा हुआ है, जो अंडरग्राउंड है.ऐसी ही एक अंडरग्राउंड पाइप लाइन इंदौर शहर की भागीरथपुरा में भी है, जिससे उस इलाके को पानी मिलता रहा है. भागीरथपुरा में चौगी के पास शौचालय बना है, लेकिन शौचालय बनाने वालों ने सेप्टिक टैंक नहीं बनवाया और उसके पैसे बचा लिए. नतीजा पूरा का पूरा सीवेज वाटर सप्लाई वाली पाइप लाइन के साथ कनेक्ट हो गया, जिससे खरगौन से चला साफ पानी गटर के पानी के साथ मिलकर जहरीला हो गया. यही पानी लोगों के घरों में नलों के जरिए सप्लाई हुआ और फिर उसे पीकर लोग बीमार पड़ गए
लोग जिंदगी-मौत से जंग कर रहे हैं
15 लोगों की मौत हो चुकी है. कुछ लोग जिंदगी-मौत से जंग कर रहे हैं और 1500 से ज्यादा लोगों पर इसका गंभीर असर हुआ है. मानवाधिकार आयोग से लेकर हाई कोर्ट तक इस मामले में दखल दे चुका है और अब वक्त जवाबदेही तय करने का है. क्योंकि जो हुआ है, उसे हादसा नहीं बल्कि हत्या कहा जाना चाहिए क्योंकि पीने के पानी में जो मिला है, वो विशुद्ध जहर है. अभी तक की जांच में उस पानी में मिला क्या-क्या है, आपको पहले वो बताते हैं.पानी में मिला है वीब्रियो कोलेरी, जिससे हैजा होता है. इसके अलावा फीकल, कॉलीफॉर्म, ई कोलाई और क्लेस बेला जैसे बैक्टीरिया भी इस पानी में मिले हैं, जो उल्टी और दस्त के लिए जिम्मेदार हैं.
लोगों का आरोप, लंबे समय से हो रही दूषित पानी की आपूर्ति
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से दूषित पीने के पानी की आपूर्ति हो रही है. कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम और संबंधित विभागों ने इस ओर गंभीरता नहीं दिखाई. नलों से गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, लेकिन समय रहते सुधार नहीं किया गया, जिसका खामियाजा अब लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है. इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में निगरानी बढ़ाने और शेष मरीजों की जांच व इलाज की बात कही है.वहीं प्रशासन ने दूषित पानी के सैंपल लेकर जांच कराने का दावा किया है. बावजूद इसके, भागीरथपुरा में लगातार हो रही मौतों ने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और शुद्ध पेयजल की तत्काल व्यवस्था की जाए, ताकि आगे किसी और की जान न जाए.
पीड़ितों ने क्या बताया?
दूषित पानी की वजह से मारे गए पांच महीने के अव्यान साहू के पिता सुनील साहू ने बीबीसी को बताया कि उनके परिवार में माता पिता के साथ पत्नी और दस साल की पुत्री है.सुनील साहू कुरियर का काम करते हैं.पांच महीने पहले ही उनके यहां अव्यान ने जन्म लिया था.उन्होंने कहा, ”माँ के दूध के अलावा बच्चे को बाहर के दूध में पानी मिलाकर दिया जाता था. यह पता नहीं था कि नर्मदा का पानी दूषित है. जब बाहर के लोगों ने बताया की कई बच्चे बीमार हैं, तब पता चला कि नर्मदा का पानी दूषित है.”उन्होंने बताया, ”अचानक 26 दिसंबर को बच्चे को दस्त की शिकायत हुई, जिसके बाद उस मोहल्ले के ही एक डॉक्टर को दिखाया लेकिन दवाई के बाद भी उसे फ़र्क नहीं हुआ. लगातार दस्त होने के चले 29 दिसंबर की शाम जब उसकी हालत ख़राब हुई तो उसे डॉक्टर के यहां लेकर पहुंचे तो डॉक्टर ने चेक कर बताया कि देर हो चुकी है. अव्यान की मृत्यु हो गई है.”उन्होंने कहा कि अब तक कोई भी सुध लेने नहीं आया है. प्रशासन को ध्यान देना चाहिए कि किसी और के साथ ऐसा ना हो. जो भी दोषी हैं, उन पर सख़्त कारवाई होनी चाहिए.टेलरिंग का काम करने वाले संजय यादव ने बताया, ”दूषित पानी पीने से मेरी 69 वर्षीय मां को 26 दिसंबर की शाम से उल्टी-दस्त शुरू हो गए. उन्हें दवा दी गई लेकिन जब कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा तो क्लॉथ मार्केट अस्पताल में इलाज कराया गया. लेकिन 22 घंटे के इलाज के बाद उनकी मौत हो गई.”संजय यादव ने बताया कि उनका 11 महीने का बच्चा अब भी भर्ती है. उसकी हालत कुछ सुधरी है लेकिन दस्त अब भी हो रहे हैं. उनका पड़ोसी भी बीमारी है.उन्होंने बताया कि अभी तक प्रशासन का कोई शख़्स हालात की पड़ताल करने नहीं आया है. पानी अभी तक ख़राब आ रहा है.भागीरथपुरा में ही रहने वाले रेलवे से रिटायर्ड 76 साल के नंदलाल पाल की बेटी सुधा पाल ने बताया कि उनके पिता को दो तीन दिन से उल्टी-दस्त लग रहे थे. उन्हें वर्मा अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन उनकी हालत में कोई सुधार नहीं आया.सुधा पाल ने बताया कि संक्रमण से 30 दिसंबर को उनके पिता की मौत हो गई.सुधा पाल ने बताया कि अब भी घर में दूषित पानी आ रहा है. दिखने में पानी ख़राब नहीं है लेकिन इसमें से बदबू आ रही है.50 साल की सीमा प्रजापत की भी दूषित जल पीने से 29 दिसंबर की मौत हो गई थीउनके पुत्र अरुण प्रजापत ने बताया, ”28 दिसंबर की रात को माँ ने परिवार के साथ खाना खाया था. लेकिन 29 दिसंबर की सुबह उनकी तबीयत ख़राब हो गई. उन्हें उल्टी-दस्त होने लगे.”अरुण प्रजापत उन्हें अस्पताल ले जाने लगे लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई.उन्होंने कहा, ”पानी कड़वा तो था लेकिन पता नहीं था जानलेवा है. अब उबाल कर पी रहे हैं. मेरी भी तबीयत ख़राब हो रही है. पड़ोस में भी बच्ची बीमार हुई. लोग बीमार हैं लेकिन यहां पानी की कोई सुविधा नहीं है. वही पानी पीना पड़ रहा है. अब तक हमारी गली में तो कोई नहीं आया. सिर्फ पार्षद आए थे. उन्हें बताया कि पानी की समस्या है. गंदा पानी आ रहा है लेकिन वो दोबारा लौट कर नहीं आए.”
दूषित पानी ने ली अब तक कितनों की जान?
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप से 10 लोगों की मौत की जानकारी मिली है. वहीं स्थानीय नागरिकों ने इस प्रकोप अब तक 6 माह के बच्चे समेत करीब 15 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है. वहीं भागीरथपुरा के बीजेपी पार्षद ने TV9 से कहा कि अब तक 15 लोगों की जान गई एक शख्स की हालात गंभीर है.8 दिन हो गए लीकेज कहां से हुआ अब तक पता नहीं चल सका. इस लापरवाही का सिस्टम जिम्मेदार है. मुझे इस्तीफा देने में कोई दिक्कत नहीं है. इस दावे की स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि नहीं की है. पेयजल के नमूनों की शुरुआती जांच रिपोर्ट के आधार पर इलाके में हैजा फैलने के संदेह पर महापौर ने कहा कि इस बारे में स्वास्थ्य विभाग ही जानकारी दे सकता है.
क्या कहते हैं अधिकारी?
अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में एक पुलिस चौकी के पास पेयजल आपूर्ति की मुख्य पाइपलाइन में उस जगह लीकेज मिला है, जिसके ऊपर एक शौचालय बना है. अधिकारियों का दावा है कि इस लीकेज के कारण ही पेयजल दूषित हुई है.
दूषित पेय जल आपूर्ति से कितने लोग प्रभावित?
भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त प्रकोप से गुजरे 9 दिनों में करीब 1400 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार रात तक की स्थिति के हवाले से बताया कि इस क्षेत्र के 272 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया गया था, जिनमें से 71 लोगों को छुट्टी दी जा चुकी है. अधिकारी ने बताया कि अस्पतालों में भर्ती 201 मरीजों में शामिल 32 लोग आईसीयू में हैं.
देश के सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा रखने वाले इंदौर में दूषित पेयजल से 15 लोगों की मौत हो जाना बहुत ही आघातकारी और शर्मनाक घटना है। यह स्वच्छता के मानकों पर सवाल खड़े करने के साथ ही नगर निगम के नाकारापन को बयान करने वाली एक ऐसी घटना है, जो देश की छवि भी मलिन कर रही है। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल की आपूर्ति इसलिए जानलेवा साबित हुई, क्योंकि सीवर की गंदगी पीने की पाइपलाइन में चली गई और फिर वह घरों तक पहुंच गई।यदि दूषित पेयजल आपूर्ति की शिकायत पर तत्काल ध्यान दिया गया होता तो इस भयावह त्रासदी को रोका जा सकता था, लेकिन जैसा कि अपने देश में होता है, गंदी जलापूर्ति की शिकायतों पर तब तक ध्यान नहीं दिया गया, जब तक लोग मरने नहीं लगे। 14 लोगों की मौत और एक हजार से अधिक लोगों के बीमार होने और इनमें से सौ से ज्यादा लोगों के अस्पताल में भर्ती होने से यह सहज ही समझा जा सकता है कि कितने अधिक जहरीले जल की आपूर्ति हो रही थी।यह आपूर्ति इंदौर के उस इलाके में हो रही थी, जो नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का निर्वाचन क्षेत्र है और पेयजल की आपूर्ति करने वाला विभाग उनके ही मंत्रालय के तहत आता है। जब मंत्री महोदय से इस हत्यारी लापरवाही पर सवाल किए गए तो उन्होंने संवेदनहीनता का परिचय देते हुए ऐसे सवालों को फोकट का बता दिया।इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि चौतरफा आलोचना से घिरने के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने खेद जता दिया, क्योंकि उनकी वह संवेदनहीनता तो प्रकट हो ही गई, जो ऐसी घटनाओं का कारण बनती है। यह भी संतोषजनक नहीं कि इंदौर नगर निगम के संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया, क्योंकि एक तो निलंबन कोई सजा नहीं और दूसरे, इसमें संदेह है कि ऐसे उपाय किए जा सकेंगे, जिससे फिर कभी दूषित जलापूर्ति न हो सके।यह समझा जाए तो अच्छा कि स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति केवल इंदौर नगर निगम को ही सुनिश्चित नहीं करनी, क्योंकि देश में आम तौर पर पेयजल की गुणवत्ता संतोषप्रद नहीं। इसका प्रमाण यह है कि लोगों को स्वच्छ पेयजल के लिए आरओ आदि का सहारा लेना पड़ता है या फिर पीने का पानी खरीदना पड़ता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि एक ओर जहां पेयजल की गुणवत्ता के मानकों की अनदेखी होती है, वहीं दूसरी ओर और टूटी-फूटी पाइपलाइनों की सुधि मुश्किल से ही ली जाती है।इसका परिणाम यह है महानगरों तक में गुणवत्ताहीन पेयजल की आपूर्ति होती है। इसके चलते प्रति वर्ष टाइफाइड, हेपेटाइटिस और हैजा जैसी जलजनित बीमारियों के लाखों मामले सामने आते हैं। यह तथ्य नीति आयोग के समग्र जल प्रबंधन सूचकांक का है कि भारत में सुरक्षित पेयजल के अभाव में हर साल लगभग दो लाख लोग जान गंवाते हैं।
